पुलिस की नौकरी आग का दरिया है और इस दरिया को कूदकर नहीं इसमें नहाते
तपाते हुए स्वयं को हीरा बनाना है। ऐसा हीरा जिसकी चमक से समाज में न्याय
और व्यवस्था और अधिक रोशन हो उठे। यह उद्गार हरियाणा के डीजीपी (ओएसडी
होमगार्ड) लायक राम डबास ने हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन में उनके सम्मान
में आयोजित परेड के अवसर पर व्यक्त किए।
1984 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के
अधिकारी डबास सोमवार को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। मधुबन में उनके सम्मान में
सम्मान परेड का आयोजन किया गया। इसमें सशस्त्र पुलिस टुकड़ी ने उन्हें
सलामी दी। इसका नेतृत्व अकादमी के डीएसपी सुल्तान सिंह ने किया। डबास को एक
स्मृतिचिन्ह भी भेंट किया गया। डबास ने अपने सेवा काल के अनुभवों को साझा
करते हुए कहा कि 1984 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में अच्छा रैंक मिला
और उन्होंने हरियाणा प्रदेश को अपनी कर्मभूमि के लिए चुना।
31 साल के लंबे
सेवाकाल में हरियाणा पुलिस व हरियाणा के लोगों ने जो प्यार व सम्मान
उन्हें दिया। वह इसके लिए हरियाणा के आभारी हैं। डबास ने कहा कि उन्होंने
अपने जीवन में अनुभव किया है कि भलाई करने वालों का भला स्वयं ईश्वर करता
है, जो हमेशा अच्छा करने की नीयत और प्रयास रखता है उसका कभी बुरा हो नहीं
सकता। पुलिस के पास तो भलाई करने के सबसे अधिक मौके हैं। नई पीढ़ी को अपने
संबोधन में सलाह देते हुए डबास ने कहा कि अपना व्यक्तित्व बढ़ाने का प्रयास
करें। डबास ने उनके सम्मान में परेड आयोजित कराने के लिए डीजीपी यशपाल
सिंघल व अकादमी के निदेशक केके सिंधू का आभार व्यक्त किया और वादा किया कि
वे पुलिस सेवा से रिटायर हो रहे हैं, लेकिन पुलिस और समाज के हितों के लिए
हमेशा कार्य करते रहेंगे।
इस अवसर पर हरियाणा पुलिस अकादमी के निदेशक एवं
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक केके सिंधू ने मुख्य अतिथि लायक राम डबास का
स्वागत करते हुए डबास के सेवाकाल की उपलब्धियों से परिचित कराया। सम्मान
समारोह में हरियाणा पुलिस में मानवाधिकार के डीजीपी एमएस मान, हरियाणा
पुलिस अकादमी के संयुक्त निदेशक राजबीर सिंह देसवाल, अकादमी की पुलिस
महानिरीक्षक डॉ. सुमन मंजरी, करनाल रेंज के महानिरीक्षक हनीफ कुरैशी,
अकादमी के पुलिस अधीक्षक बलबीर सिंह, डबास के परिवार से उनकी धर्मपत्नी
गीता डबास, पुत्र वधू एवं उप पुलिस अधीक्षक भारती डबास, पुत्र नवदीप, सुदीप
व बेटी संगीता आदि उपस्थित रहे।