करनाल। मौसम की मार से जहां अन्य फसलों पर असर पड़ा है, वहीं गन्ना किसानों और चीनी मिल प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ गई है। लगातार पांच दिनों तक बादल और बूंदाबांदी से गन्ना कटाई और छिलाई का काम ठप हो गया है। गन्ना आपूर्ति नहीं होने से जिले की तीनों चीनों मिलों का संचालन फिलहाल थम गया है। अब किसानों और मिल प्रबंधन को मौसम साफ होने का इंतजार है।
गन्ने की कमी से मेरठ रोड स्थित सहकारी चीनी मिल रविवार सुबह और असंध के फफड़ाना स्थित हैफेड चीनी मिल दोपहर 3:30 बजे बंद हुई। वहीं भादसों गांव स्थित पिकाडली चीनी मिल शनिवार रात दो बजे गन्ने की आपूर्ति न होने के कारण बंद करनी पड़ी। मिलें बंद होने से जहां किसानों के समक्ष मुश्किल खड़ी हो गई, वहीं प्रबंधन को भी इसे दुबारा चलाने में मशक्कत करनी पड़ेगी।
सहकारी चीनी मिल के कुंजपुरा जोन डायरेक्टर ओमपाल मंढाण ने कहा कि मौसम खराब होने का खामियाजा न केवल चीनी मिलों पर पड़ा है बल्कि गन्ना उत्पादकों पर भी लेबर खर्च बढ़ गया है। खराब मौसम में श्रमिक काम नहीं कर पा रहे और किसान को उनका खर्च लगातार देना पड़ता है।
50 लाख का लक्ष्य, अभी 17.60 लाख क्विंटल ही पेराई
वर्षा के कारण गन्ना कटाई और छिलाई का कार्य नहीं हो पा रहा। बीती नौ नवंबर को पेराई सत्र शुरू हुआ था। अब तक 17.60 लाख क्विंटल गन्ना पेराई हो चुकी है। पेराई सत्र में 50 लाख क्विंटल से ज्यादा गन्ना पेराई का लक्ष्य है। नई मिल की मशीनरी बेहतर ढंग से काम कर रही है, लेकिन अब मौसम खुलने पर ही गन्ने की आवक होगी।
- अदिति, प्रबंध निदेशक, सहकारी चीनी मिल मेरठ रोड करनाल।
37 लाख का लक्ष्य, 11 लाख क्विंटल गन्ना पेराई
अधिक वर्षा होने के कारण चीनी मिल का काम प्रभावित हुआ और किसान खेतों से गन्ने की ट्रालियां नहीं निकाल पा रहे। मौजूदा सत्र में करीब 37 लाख क्विंटल गन्ना पेराई का लक्ष्य है। अब तक 11 लाख क्विंटल गन्ना पेराई हो चुकी है। उम्मीद है सोमवार शाम तक गन्ने की आवक दुबारा से शुरू हो जाएगी।
- सैयद जफर अली, अतिरिक्त महाप्रबंधक, हैफेड चीनी मिल फफड़ाना।
80 लाख का लक्ष्य, 23 लाख क्विंटल गन्ना पेराई
शनिवार रात यार्ड में गन्ना खत्म हो जाने के कारण रात्रि दो बजे ही मिल को बंद करना पड़ा। मौसम खराब होने के कारण गन्ना नहीं आ पा रहा। मिल के अंतर्गत करीब 29 हजार एकड़ गन्ना क्षेत्रफल है। इस सत्र में 80 लाख क्विंटल गन्ना पेराई का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 23 लाख क्विंटल गन्ना पेराई हो चुकी है।
-- करतार सिंह, गन्ना प्रबंधक, पिकाडली चीनी मिल भादसो।
मोढ़ी फसल की कटाई तेजी से चल रही थी। अब मौसम ठीक होने पर ही गन्ना कटाई हो सकेगी। गीले खेत में कटाई करने पर गन्ने की जड़ें उखड़ जाएंगी। यदि किसी खेत में फिर मोढ़ी फसल लेनी है तो कटाई के बाद खेत में पत्तियां ढकें, क्योंकि तापमान कम होने पर फुटाव कम रहता है।
- डा. एसके पांडे, अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक गन्ना प्रजनन केंद्र, करनाल।