माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। अनाज मंडी में तीन दिन तक इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टीकल्चर, राइस एंड ग्रेन एक्सपो में भविष्य की कृषि एवं बागवानी तकनीक का प्रदर्शन किया गया। शनिवार को एक्सपो का अंतिम दिन था। एक कंपनी ने चावल के दानों को स्कैन करने की एआई मशीन प्रदर्शित की। एआई ग्रैम्स स्कैनर नाम की मशीन के बारे में कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि स्कैनर चावल के हर दाने को स्कैन करता है। इसमें रंग, मोटाई, टूटा है या साबुत आदि गुणवत्ता से संबंधित कई पैमानों पर जांचने की क्षमता है।
कंपनी प्रतिनिधियों ने बताया कि ये स्कैनर 100 ग्राम चावल के दानों को 180 सेकंड में स्कैन कर सकता है। स्कैनर एआई और क्लाउड आधारित है जिसे मोबाइल से कनेक्ट भी किया जा सकता है।
डेयरी क्षेत्र में गुणवत्ता और पशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए एनडीआरआई की ओर एक पेपर स्ट्रिप आधारित नई टेस्ट किट विकसित की गई है। इसे भी प्रदर्शित किया गया। इससे दूध में मिलावट और दुधारू पशुओं में मास्टाइटिस (थनेला) रोग का पता कुछ ही मिनटों में लगाया जा सकता है। यह तकनीक किसानों और डेयरी संचालकों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। यह किट क्लिनिकल और सब-क्लिनिकल दोनों प्रकार के मास्टाइटिस यानी थनेला रोग का पता मात्र 6 मिनट में लगा सकती है। मास्टाइटिस के दौरान दूध में निकलने वाले सोमैटिक सेल मार्कर को पहचानकर स्ट्रिप रंग बदलती है। जांच के लिए दूध के नमूने में एक्टिवेटर मिलाकर पेपर स्ट्रिप डाली जाती है और निर्धारित तापमान पर रखने के बाद परिणाम प्राप्त होता है। अगर स्ट्रिप पर हल्का नीला रंग दिखाई देता है तो सब-क्लिनिकल मास्टाइटिस माना जाता है, जबकि गहरा नीला रंग क्लिनिकल मास्टाइटिस की पुष्टि करता है। रंग परिवर्तन न होने पर पशु स्वस्थ माना जाता है। इसके लिए केवल एक इनक्यूबेटर की आवश्यकता होती है। परीक्षण की लागत करीब पांच रुपये प्रति सैंपल बताई गई है, जिससे छोटे पशुपालक भी इसका लाभ उठा सकेंगे।
इस तकनीक से दूध में यूरिया, हाइड्रोजन पेरॉक्साइड, ग्लूकोज, सुक्रोज, फॉर्मेलिन और नमक जैसी मिलावट की भी पहचान की जा सकती है। 4 डिग्री सेल्सियस तापमान पर स्ट्रिप 6 से 8 महीने तक सुरक्षित रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दूध की गुणवत्ता सुधरेगी, पशु स्वास्थ्य बेहतर होगा और उपभोक्ताओं को सुरक्षित दूध उपलब्ध हो सकेगा।
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सूरजमुखी, शीशम और सरसों का शहद
पबाना हसनपुर के किसान संजय कुमार ने भी एक्सपो में अपना स्टॉल लगाया। उन्होंने बताया कि पिछले 20 साल से मधुमक्खी पालन कर अलग-अलग किस्म का ऑर्गेनिक शहद तैयार करते हैं। उनके पास शहद की तीन किस्में हैं। सूरजमुखी, शीशम और सरसों से तैयार शहद भी है। सरसों के फूलों से तैयार शहर का रंग सफेद है। अन्य के रंग भी अलग हैं। उन्होंने शहद आधारित आंखों की दवाई भी तैयार की है।
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मंत्रियों ने किया एक्सपो का दौरा
दोनों मंत्रियों ने एक्सपो में राज्यों, विभागों व संस्थानों की ओर से लगाई गईं स्टॉल का अवलोकन किया। आधुनिक कृषि यंत्रों के बारे में जानकारी ली। कहा कि एक्सपो किसानों को नवीनतम तकनीक से रूबरू करा रही है। जितनी जानकारी बढ़ेगी, किसान उतना ही उन्नत और समृद्ध होगा। मेले में पहुंचे सरकार के मुख्य सचेतक रामकुमार कश्यप ने कहा कि एक्सपो ने नई नई तकनीकों के बारे में बताया गया है। किसानों और व्यापारियों के लिए ये मेला काफी लाभदायक साबित होगा। सीईओ प्रमोद कुमार सिरोहा, सहायक आयोजक बलिंद्र कुमार और विभिन्न विभागों व संस्थानों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।