सीएम आवास पर रविवार को पेंशन बहाली संघर्ष समिति के सदस्यों की पुलिस के साथ भिड़ंत हुई। एसडीएम की बात से असंतुष्ट सदस्यों के बैरियर तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की। इसके बाद उन पर वाटर कैनन का प्रयोग किया गया।
सुबह से ही 2006 के बाद लगे सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों ने एनपीएस का विरोध करने के लिए फव्वारा पार्क में जमा हुए। इस मार्च में हरियाणा के करनाल, कैथल, पानीपत, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, अंबाला, सोनीपत व पंचकूला जिले के एनपीएस कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। विरोध में आक्रोश मार्च निकाला। एनपीएस की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद विरोध करते सीएम आवास पर पहुंचे। जहां पर ज्ञापन लेने के लिए एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक पहुंचे। उन्होंने नौ सितंबर को ओएसडी के माध्यम से सीएम से मिलवाने का आश्वासन दिया। इस पर समिति के सदस्यों ने असहमति जताकर विरोध किया और बैरियर तोड़कर जीटी रोड की तरफ बढ़ने का प्रयास किया। जैसी ही आंदोलनकारी पुलिस पर हावी हुए तो पानी की बौछार का प्रयोग करके भीड़ को तितर-बितर किया।
पेंशन नीति 1972 को लागू करने की मांग
अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल ने की व मंच संचालन जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष पदम सिंह ने किया। उन्हाेंने बताया कि बार-बार प्रदर्शन व रैलियां करके पेंशन बहाली संघर्ष समिति कर्मचारियों की एकता व एनपीएस के विरोध को सरकार तक पहुंचा चुकी है। परंतु सरकार इस ओर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठा रही है। कर्मचारी 30 से 35 साल तक सेवा करने के बाद भी अपने बुढ़ापे को सुरक्षित नहीं महसूस कर रहा है। एनपीएस को भंग कर पुरानी पेंशन नीति 1972 को लागू किया जाए। इस अवसर पर राज्य कार्यकारिणी से ऋषि नैन, सुशील शर्मा, संदीप बड़ौदा, अनूप लाठर, ज्ञान चंद, पुरुषोत्तम मजोका, देवराज बालियान, प्रमोद, जिला प्रधान संदीप टूर्ण, प्रदीप सिंहमार, जितेंद्र पांचाल, वरुण, पदम प्रजापति व राजवीर मौजूद रहे।
पहले पुलिस फिर कर्मियों पर बरसा पानी
कर्मियों ने विरोध जताकर बैरियर तोड़कर जीटी रोड की तरफ कूच किया तो विरोध में पानी की बौछार करने के आदेश दिए। जैसी ही पानी की बौछार शुरू हुई तो पहले पुलिसकर्मियों की तरफ पानी फेंका गया। इसके बाद विरोध जताने वाले कर्मचारियों की तरफ मोड़ा गया। ऐसा होने से विरोध जताने वाले और उन्हें रोकने वाले सभी भीग गए।