गांव टपराना के मिडिल स्कूल को 12वीं कक्षा तक अपग्रेड कराने को लेकर आंदोलित छात्राओं का गुस्सा कम होने की जगह बढ़ता ही जा रहा है। हालांकि, प्रशासन द्वारा 15 दिन का आश्वासन दिया गया है, बावजूद इसके छात्राओं को प्रशासन के आश्वासन पर विश्वास नहीं है। इसी के चलते रविवार को सैकड़ों की संख्या में छात्राएं और उनके परिजन पैदल ही चंडीगढ़ सीएम हाउस की तरफ कूच कर गए। इसकी सूचना जैसे ही प्रशासन के पास पहुंची तो अधिकारियों के पसीने छूट गए। आनन-फानन में सदर थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ वसंत बिहार के पास पहुंचे और छात्राओं को वहीं पर रोक लिया। लेकिन विद्यार्थी अड़े रहे, बाद में डीएसपी राजीव कुमार पहुंचे और उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद डीईईओ राजपाल और एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक मौके पर पहुंचे और छात्राओं को समझा कर वापस जाने की अपील की, लेकिन छात्राओं के तेवर कम नहीं हुए। आखिरकार एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों और विद्यार्थियों से बात की। एसपी ने आश्वासन दिया कि वे खुद छात्राओं को पढ़ाएंगे और सोमवार को डीसी विनय प्रताप सिंह के साथ गांव में आएंगे। करीब तीन घंटे तक चले हंगामे के बाद एसपी के आश्वासन पर छात्राएं मान गईं।
गांव दर गांव आए अधिकारी, नहीं मानी छात्राएं
दोपहर 12.15 बजे टपराना गांव ग्रामीण और विद्यार्थी पैदल ही नंगे पांव ही चंडीगढ़ की तरफ चल पड़ीं। टीकरी गांव के पास सदर थाना एसएचओ बलजीत सिंह ने उनको रोककर शांत करने का प्रयास किया, लेकिन वह नारेबाजी करते आगे बढ़ गए। कैलाश गांव में नायब तहसीलदार हवा सिंह ने उनसे बात करनी चाही, लेकिन उन्होंने तहसीलदार को रास्ते से हटा दिया और आगे निकल गए। बागपती गांव के समीप पुलिस ने बस सड़क के बीच खड़ी कर दी। इस पर डीएसपी राजीव कुमार पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को रोक कर कुछ देर का समय मांगा और उच्च अधिकारियों को मौके पर बुलाने का आश्वासन दिया। बाद में नगर निगम कमिश्नर राजीव मेहता और एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया मौके पर पहुंचे। एसपी ने छात्राओं व ग्रामीणों को लिखित आश्वासन दिया कि सोमवार को सुबह 10 बजे वह जिला उपायुक्त विनय प्रताप सिंह के साथ गांव में आएंगे और समस्या का समाधान करवाया जाएगा। इसके बाद ग्रामीण वापस गांव गए। हालांकि, ग्रामीणों ने चेताया कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे रोहतक में होने वाली पीएम की रैली में भी पैदल जा सकते हैं।
एक छात्रा हुई बेहोश, अधिकारियों के हाथ पैर फूले
इसी दौरान एक नौवीं कक्षा छात्रा ममता की बेहोश होकर गिर गई। इस पर महिला पुलिस थाना की प्रभारी इंस्पेक्टर कविता ने उसे संभाला। इस दौरान उसे प्राथमिक उपचार दिया गया और बाद में एंबुलेंस बुलाकर उसे मेडिकल कालेज भेजा गया। लड़की के होश में आने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली। बता दें कि पुलिस ने करीब एक घंटे तक छात्राओं को सड़क पर ही रोके रखा, गर्मी के कारण लड़की बेहोश हो गई।
अन्य गांवों का भी मिल रहा समर्थन
इससे पहले, सुबह गांव में हुई बैठक में राज्यसभा सांसद रामकुमार कश्यप पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह स्कूल अपग्रेड कराने की बाबत राज्य सरकार से बात करेंगे। उनके जाने के बाद बैठक बरकरार रही। मंदिर में ग्रामीण महिलाएं अनशन पर बैठी थी और छात्राओं ने वहीं कक्षा लगा रखी थी। दोपहर 12.15 बजे टपराना, बड़ागांव, प्रीतमपुरा, जड़ौली, घीड़ गांव के लोगों ने भी लड़कियों का समर्थन किया।
डीसी नहीं आए थे मिलने, बेटियों को मलाल
एक छात्रा ने कहा वे 26 अगस्त को सात किलोमीटर पैदल चलके डीसी से मिलने जिला सचिवालय गए थे। वह भी प्रशासन की बेटियां हैं। डीसी साहब उनके मिलने अपने कार्यालय से बाहर नहीं आए थे। उन्हें इस बात का बेहद अफसोस है कि उपायुक्त बेटियों से मिलने चार कदम नहीं आए थे। वह पैदल चलकर चंडीगढ़ सीएम से मिलने जाने के लिए मजबूर हुई हैं।
बच्चों की पढ़ाई की चिंता
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे सर्वहित पार्टी के जिला उपाध्यक्ष राहुल राणा ने एसपी से बातचीत की। लिखित आश्वासन के बाद राहुल ने प्रदर्शनकारियों से वापस गांव मुड़ने की अपील की। ग्रामीण मनोज, बीरबल, सन्नी, सुशील, राजेश, संजू, राहुल, विशाल, दिलबाग, पूर्ण सैनी, कर्मबीर, अजय, गुलशन, रवि व संदीप ने प्रशासन से अपील की है कि गांव में बेटियों को पढ़ाने के लिए अध्यापक भेजने की मांग की, ताकि पढ़ाई बाधित ना हो।
विभाग की तरफ से चल रही है कार्रवाई
मौके पर पहुंचे जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी राजपाल ने कहा कि स्कूल अपग्रेड करवाने के लिए नियम होते हैं। उनके गांव के स्कूल को अपग्रेड करवाने के लिए जुलाई 2018 में प्रस्ताव भेजा था, लेकिन नियमों के अनुसार स्कूल अपग्रेड नहीं हो पाया। इस बार उन्होंने खुद लेटर जारी करवाया है कि गांव के स्कूल को अपग्रेड का दर्जा दिया जाए, जो कि बच्चों के हित में है। फाइल मूवमेंट में है, जल्द ही स्कूल अपग्रेड हो जाएगा।
80 साल की बुजुर्ग महिला भी थी नाराज
टपराना गांव की छात्राएं जब अपनी पढ़ाई की चिंता को लेकर सीएम से मिलने पैदल चंडीगढ़ के लिए चली तो गांव की 80 वर्षीय बीरमती भी उनके साथ चली। बुजुर्ग बोली कि जब तक बेटियों की मांग पूरी नहीं होती वह उनके साथ हैं और चंडीगढ़ व रोहतक पैदल जाने के लिए तैयार हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों को फ्लाईओवर से गुजारा
रोष मार्च के चलते राष्ट्रीय राजमार्ग पर सर्विस लेन के वाहनों को फ्लाइओवर से गुजारा गया। दो घंटे यह व्यवस्था जारी रखी गई, ताकि यातायात व्यवस्था प्रभावित ना हो। चंडीगढ़ से दिल्ली जाने वाले वाहनों को बलड़ी बाईपास से फ्लाइओवर पर चढ़ाया गया। यह व्यवस्था अप व डाउन दोनों के लिए की गई। आईटीआई चौक पर पुलिस बल डटा रहा। दूसरी ओर ग्रामीणों ने कह दिया था कि वह अनुशासित एवं लोकतांत्रिक तरीके से जीटी रोड से होते हुए चंडीगढ़ जाएंगे। वह जाम नहीं लगाएंगे और ना ही यातायात को बाधित करेंगे। हालांकि, प्रशासन जाम की आशंका के चलते बसों को नीचे की बजाए फ्लाईओवर से निकाला। इससे सवारियों को जरूर परेशानी का सामना करना पड़ा।
यूं चला घटनाक्रम
सुबह आठ बजे मंदिर परिसर में छात्राएं कक्षा में पहुंची। इसी दौरान ग्रामीण महिलाएं अनशन पर बैठी।
9 बजे राज्यसभा सांसद रामकुमार कश्यप ग्रामीणों से मिलने पहुंचे।
12.15 बजे पर छात्राएं व ग्रामीण चंडीगढ़ के लिए पैदल निकल पड़े।
12.34 बजे पर छात्राएं टीकरी के समीप पहुंचे, जहां सदर थाना एसएचओ बलजीत सिंह ने उन्हें रोकने का प्रयास किया।
12.41 बजे छात्राएं व ग्रामीण कैलाश गांव पहुंची और नायब तहसीलदार हवा सिंह ने उन्हें रोकने का प्रयास किया।
12.47 बजे वह गांव बागपती पहुंचे और डीएसपी राजीव ने रोककर समझाया और उच्च अधिकारियों से बात करने को कहा।
1.22 बजे जिला शिक्षा अधिकारी राजपाल ने ग्रामीणों व छात्राओं के साथ बातचीत की।
1.25 पर एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक पहुंचे और छात्राओं को समझाने का प्रयास किया।
2.12 बजे एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया व नगर निगम कमीश्नर राजीव मेहता मौके पर पहुंचे।
2.58 पर छात्राएं बस में बैठकर अपने घर की ओर चली गई।
यह है मामला
छात्राएं समीप लगते गांव टीकरी में पढ़ने के लिए जाती हैं। जहां युवकों की छेड़खानी की वजह से परेशान होने के बाद उन्होंने स्कूल जाना छोड़ दिया। 26 अगस्त को छात्राओं ने गांव से जिला सचिवालय तक सात किलोमीटर पैदल चलकर गई थी। प्रशासन को अपनी समस्या व मांग से अवगत करवाया था। 27 सितंबर को एसडीएम इंद्री सुमित सिहाग व 29 सितंबर को एसडीएम करनाल नरेंद्र पाल मलिक गांव टपराना गए थे। छात्राओं व ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया था। 18 दिन में स्कूल अपग्रेड करने का आश्वासन दिया था। गांव में तब से लगातार बैठके जारी हैं। सातवें दिन रविवार को ग्रामीण बच्चों के साथ चंडीगढ़ के लिए पैदल चल दिए थे।