प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को इस बार निशुल्क किताबें मिलेंगी। दो साल बाद विभाग की ओर से कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। पिछले दोनों वर्षों में कोरोना के कारण किताबें नहीं आई थी। वर्ष 2021 में विद्यार्थियों को किताबों की जगह सरकार की ओर से पैसे दिए गए थे। ऐसे में विद्यार्थियों को पुरानी किताबें या बाजार से खरीदकर पढ़ाई करनी पड़ी थी।
इस बार भी सत्र शुरू हुए 15 दिन का समय बीत चुका है, लेकिन विद्यार्थियों को अभी तक किताबें नहीं मिलीं। ऐसे में स्कूलों की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था करके अगली कक्षाओं में प्रमोट हो चुके विद्यार्थियों की पुरानी किताबें नए विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही हैं, लेकिन ये किताबें भी सभी विद्यार्थियों को नहीं मिल पाईं। नई किताबें न आने का मुद्दा अमर उजाला ने 13 अप्रैल के अंक में उठाया था। पिछले दिनों करनाल पहुंचे शिक्षामंत्री कंवरपाल गुर्जर से भी इस विषय पर बात की गई। उन्होंने कहा कि इस बार राजकीय स्कूलों में किताबों की कमी नहीं रहेगी। जरूरत के अनुसार सभी स्कूलों में किताबें उपलब्ध कराएंगे।
सरकार की ओर से दिए गए थे 300 रुपये
2021 में कोरोना के कारण किताबें नहीं आई थी। ऐसे में सरकार की ओर से विद्यार्थियों को किताबें खरीदने के लिए 300 रुपये के हिसाब से राशि दी गई थी। विद्यार्थियों ने बाहर से एनसीईआरटी की किताबों के सेट खरीदे थे। जिले के 779 राजकीय स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक एक लाख पांच हजार विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।
समय पर मिलनी चाहिए किताबें
अभिभावक एकता संघ के अध्यक्ष दिनेश नरूला और एडवोकेट संदीप राणा का कहना है कि सरकार जल्द किताबें उपलब्ध कराए। किताबें आने में देरी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि दाखिला प्रक्रिया के साथ-साथ स्कूलों में कक्षाएं लगनी शुरू हो चुकी हैं। शिक्षकों ने बताया कि कई छात्रों को पुरानी किताबें नहीं मिली हैं। वे अपने सहपाठियों के साथ मिलकर पढ़ाई कर रहे हैं।
वर्जन-
फिलहाल हमने वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए विद्यार्थियों को पुरानी किताबें उपलब्ध कराई हैं। जल्द किताबें आने की उम्मीद है। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी
- रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
वर्जन-
पिछली बार कोविड के कारण किताबें उपलब्ध कराने में दिक्कत आई थी। इस बार कोई दिक्कत नहीं आने देंगे। सभी स्कूलों में किताबें पहुंचेंगी।
- कंवर पाल गुर्जर, शिक्षा मंत्री