देश की आजादी की लड़ाई के लिए न जाने कितने देशभक्तस्वतंत्रता सेनानियों
ने भूखे प्यासे रहकर लड़ाई लड़ी। देश तो आजाद हो गया, अब इन स्वतंत्रता
सेनानियों और उनके परिवारों की देखभाल व सुनवाई करने वाला कोई नहीं।
केंद्र
और प्रदेश की सरकारें स्वतंत्रता सेनानियों व उनके परिवार की अनदेखी कर
रही है। अकेले हरियाणा प्रदेश से चार हजार के करीब स्वतंत्रता सेनानियों ने
आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों से लोहा लिया था। इस समय इन सेनानियों और
उनकी विधवाओं की संख्या मात्र करीब 650 रह गई है।
मगर केंद्र्र और प्रदेश
की सरकारें इन परिवारों की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है। देश के
स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिजन अब देश की आजादी मिलने के बाद परिवारों
के हकों की लड़ाई के लिए 10 जनवरी को जंतर मंतर पर एक दिन का सांकेतिक
धरना देंगे। अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं उत्तराधिकारी संघ के
महासचिव धर्मबीर पालीवाल ने बताया कि केंद्र व प्रदेश की सरकारें
स्वतंत्रता सेनानियों और उत्तराधिकारी की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है। इस
अनदेखी से परेशान होकर इन परिवारों ने यह कदम उठाया है।
हरियाणा प्रदेश
इकाई के सदस्य रमेश पाल ने बताया कि देश के स्वतंत्रता सेनानियों व उनके
परिजन की सबसे बड़ी मुख्य मांग रोजगार की है। इसके लिए स्वतंत्रता सेनानी
परिवारों से सांसदों व विधायकों से भी समर्थन मांगा है। मुख्यमंत्री
भूपेंद्र सिंह हुड्डा व हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी शकील अहमद खुद
स्वतंत्रता सेनानी परिवार से होने पर भी इन परिवारों के रोजगार व कल्याण के
लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। इससे हरियाणा के स्वतंत्रता सेनानियों के
उत्तराधिकारियों में रोष है।
यह मांगते हैं स्वतंत्रता सेनानी
- स्वतंत्रता सेनानियों के उत्तराधिकारियों को सम्मान पेंशन दी जाए।
-
स्वतंत्रता सेनानियों के उत्तराधिकारियों को सरकारी, गैर सरकारी,
अर्द्धसरकारी, निगमों व बोर्डों की नौकरियों में केंद्र व प्रदेश की
सरकारों में आरक्षण दिया जाए।
- उत्तराधिकारियों के बच्चों को विभिन्न कोर्सों व सरकारी दाखिलों में आरक्षण देकर छात्रवृत्ति प्रदान की जाए।
- स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रित शब्द के स्थान पर उत्तराधिकारी शब्द लिखा जाए।
- सरकारी व गैर-सरकारी अस्पतालों में स्वतंत्रता सेनानियों व उत्तराधिकारियों का मुफ्त कैश लैश इलाज किया जाए।
- स्वतंत्रता सेनानियों को मिल रही सम्मान पेंशन को मूल पेंशन में परिर्वतन किया जाए।