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डेंगू के बाद अब वायरल ने पसारे पांव

Sun, 10 Nov 2013 11:26 PM IST
करनाल
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करनाल में अभी लोगों को डेंगू के डंक से मुक्ति नहीं मिली थी कि बुखार, सर्दी, खांसी और जुकाम ने भी लोगों को रुलाना प्रारंभ कर दिया है। सैकड़ों लोग सर्दी के कारण जुकाम, खांसी और वायरल की चपेट में है।
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सरकारी अस्पताल समेत निजी डॉक्टरों की ओपीडी में सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल बुखार के मरीजों की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है। पूरा दिन सरकारी अस्पताल में सर्दी के सताए लोगों की लंबी कतार चेकअप कराने के लिए पहुंच रही है। इससे बुरा हाल निजी क्लीनिकों पर है।

निजी डॉक्टरों को देर रात तक लोगों के चेकअप से फुर्सत नहीं मिल रही है। जिलेभर में डेंगू अभी थमने का नाम नहीं ले रहा था कि ठंड ने भी अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया। ठंड के प्रभाव के कारण डेंगू के मरीजों की संख्या कम जरूर हुई है लेकिन सरकारी आंकड़ों की जुबानी ही लोगों के सामने बयां की जाए तो साफ है कि इस बीमारी ने भी लोगों को झकझोर कर रख दिया है।
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इसका प्रभाव अभी जारी है। डेंगू के सामने सरकारी अस्पताल के तमाम डॉक्टरों के पास लाचारी बयां करने के अलावा कुछ बाकी नहीं बचा था। अधिकतर लोग करनाल के अस्पताल में मरीजों का उपचार कराने के नाम रोते हुए वापस गए हैं। जो भी हो अब मौसम के बदलते ही सर्दी से होने वाली बीमारियों ने अपने पांव पसार लिए है।

मौसम विभाग पहले ही सचेत कर चुका है कि इस बार पहाड़ों में जल्दी बर्फबारी के कारण मैदानी इलाकों में ठंड प्रभाव दिखाने में कोई कसर नहीं छोडे़ेगी। बर्फबारी की ठंड और सर्द हवाओं के झोंकों ने पिछले कई दिनों से लोगों को बुरी तरह रुला रखा है। एक औसत अनुमान के अनुसार हर तीसरे परिवार में कोई एक व्यक्ति सर्दी, जुकाम, खांसी या फिर वायरल से पीड़ित है।

ऐसे में सरकारी अस्पताल समेत तमाम चिकित्सकों के पास पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में निरंतर इजाफा होे रहा है। सरकारी अस्पताल के डॉक्टर संजीव ग्रोवर ने कहा कि 20 से 25 प्रतिशत लोग खांसी जुकाम के अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक आने लगे हैं।

ऐसे ही तमाम प्रकार के बुखार का जिक्र करें तो 40 प्रतिशत मरीजों की संख्या बुखार से बढ़ी है। इसमें घबराने की आवश्यकता नहीं है। मौसम में परिवर्तन हो रहा है। मानव शरीर अचानक हुए मौसम में परिवर्तन को सहन करने की क्षमता तैयार कर लेता है।

सामान्य में लोगों को लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। सरकारी अस्पताल में हर सुविधा मौजूद है। अस्पताल नहीं पहुंच सकते तो अपने निकट के क्वालीफाई डॉक्टर से परामर्श लें। दूसरी ओर शहर के सैकड़ों निजी क्लीनिकों पर ऐसे मरीजोें की भीड़ लगी रहती है। देर रात तक डॉक्टर मरीजों का चेकअप करते हैं।
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