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गद्दी विवाद के चलते एक ओंकारेशवर महादेव मंदिर में लगा प्रशासक

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गांव बीड-बडालवा में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में गद्दी विवाद के बाद अब प्रशासन की ओर से प्रशासक नियुक्त कर दिया गया है। साथ ही मंदिर के सभी महंतों को बाहर कर सामान जब्त कर लिया गया है। मंदिर के नाम से खरीदी गयी एक बोलेरो गाड़ी भी प्रशासन ने कब्जे में ले लिया है। मंदिर के नाम बैंक खाते का रिकार्ड और एटीएम कार्ड भी ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने लेकर रिकार्ड में दर्ज किए हैं।
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ओंकारेश्वर मंदिर में 12-13 मार्च की रात्रि को गद्दी महंत ओंकार पुरी की उनके ही चेले गोकुलपुरी द्वारा आग लगाकर हत्या कर दी गई थी। तभी से मंदिर की गद्दी को लेकर दो महंतों में आपसी विवाद चल रहा है। दो माह से गद्दी के लिए बाबा लदाना के महंत दूजपुरी और राधेश्याम पुरी में टकराव की स्थिति बनी हुई है। इस कारण प्रशासन की ओर से वहां तीन पुलिस कर्मियों को 24 घंटे तैनात किया गया है। विदित हो कि एक ओंकारेश्वर महादेव मंदिर के नाम 85 एकड़ जमीन है। यह भूमि हर वर्ष ठेके पर दी जाती है, जिसका सारा ठेका मंदिर के महंत के पास जमा होता था। मंदिर की जमीन को लेकर आपस में महंतों का कई वर्षों से कोर्ट में केस भी चल रहा है।
बनाएगी जाएगी पांच सदस्यीय कमेटी
ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि मंदिर की व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे। इसके लिए जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों से बात कर पांच सदस्यीय कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें उनके साथ, हल्का पटवारी, ग्राम सचिव, गांव के सरपंच व अन्य सम्मानित व्यक्ति को मेम्बर बनाया जाएगा। मंदिर के नाम जमीन को 15 जून से पहले ठेके पर बोली करवाकर दी जाएगी। इस मौके पर पटवारी शमसेर सिंह, पंचायत प्रतिनिधि सुनील शर्मा, रिटायर्ड सूबेदार मेजर बालक राम अत्री, मा.तारा चन्द व पूर्व सरपंच मदन लाल मौजूद रहे।
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हत्या के बाद नहीं हुआ कोई महंत नियुक्त
गांव बीड-बडालवा में बने एक ओंकारेश्वर महादेव मंदिर जिसको ओंकार खेड़ा के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर एक बहुत बडे़ टीले पर स्थित है जोकि आस-पास के गांवों से दिखाई पड़ता है। क्षेत्र के बुजुर्गों का कहना है कि मंदिर में सबसे पहले बाबा मुकुट पुरी महाराज को गद्दी का महंत बनाया गया। उनके बाद विधापुरी और फिर सोमपुरी को महंत की गद्दी सौंपी गई। उसके बाद महंत रविपुरी ने गद्दी को संभालते हुए देवीपुरी को गद्दी का महंत नियुक्त किया। महंत देवीपुरी के बाद ओंकार पुरी को मंदिर का महंत बनाया गया था, जिनकी हत्या के बाद से अभी कोई नया महंत नियुक्त नहीं हो सका है।
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