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एनडीसी जारी होने में नहीं होगी गड़बड़ी, तीन स्तरीय प्रक्रिया से गुजरेगी फाइल

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प्रॉपर्टी लेन-देन में रजिस्ट्री कराने से पहले नगर निगम से जारी होने वाली एनडीसी में अब गड़बड़ी नहीं होगी। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद सरकार ने इसके एडमिन पावर प्रारूप को बदल दिया है। पहले जहां क्लर्क और बाबू लेवल की रिपोर्ट के बाद फाइल आगे बढ़ती थी। अब ऐसा नहीं होगा। नए प्रारूप में दो ब्रांचों से मेकर व चेकर लगाए गए हैं। इनके ऊपर एडमिन पावर भी ईओ से लेकर संयुक्त आयुक्त को दी गई है। नगर निगम में अब बिल्डिंग इंस्पेक्टर (बीआई) और प्रॉपर्टी टैक्स सुपरिंटेंडेंट (पीटीएस) आईडी मेकर व डीटीपी और डीएमसी चेकर होंगे।
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इन दोनों स्तर के अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद संयुक्त आयुक्त फाइल को स्वीकृति देंगे। कार्य में पूरी पारदर्शिता रहे, इसके लिए फाइल में फेरबदल या बदलाव से पहले भी लिखित आदेश दोनों स्तर के अधिकारियों को एनडीसी पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। जमीन की नगर निगम एरिया में खरीद फरोख्त के लिए रजिस्ट्री से पहले नगर निगम एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) जारी करता है। नगर निगम एरिया में करीब 1.62 लाख प्रॉपर्टी आईडी बनी हैं। हर माह करीब 300 के करीब एनडीसी के लिए आवेदन आते हैं। हाल में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्री कराने के लिए एनडीसी जारी करने में फर्जीवाड़ा सामने आया। करनाल में सामने आए मामले की भी जांच चल रही है। इसलिए सरकार ने इसकी व्यवस्था को और मजबूत व पारदर्शी बनाने के लिए यह फेरबदल किया है।
ऐसे रहेगी व्यवस्था-
-अब गलत कार्यों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने मेकर और चेकर लगा दिए हैं। मेकर में केवल दो विभागों को ही रखा है। इसके बाद एडमिन पावर ज्वाइंट कमिश्नर को दी है।
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-डेवलपमेंट विंग से बिल्डिंग इंस्पेक्टर मेकर और डीटीपी चेकर होंगे।
-प्रॉपर्टी टैक्स विंग में सुपरिंटेंडेंट मेकर और डीएमसी चेकर होंगे।
प्रॉपर्टी टैक्स या आईडी में दिक्कत है तो पांच तक करें आवेदन
एनडीसी लेने के लिए घर बैठे ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं। प्रॉपर्टी वैध कॉलोनी में और पूरा टैक्स भरा हुआ होना चाहिए। यदि टैक्स ज्यादा आया है या डेवलपमेंट चार्ज भरने के बाद दोबारा से लगा है तो उस स्थिति में कार्यालय आना पड़ सकता है। नए सर्वे में करीब 1700 ऑब्जेक्शन आए हैं। संशोधन के लिए 5 अप्रैल तक पीएमएस पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।
एनडीसी में फेरबदल के लिए किसी भी स्तर के अधिकारी को पहले डायरी नंबर लगाना होगा। साथ ही लिखित आर्डर को स्कैन कर पोर्टल पर अपडेट करना होगा। पहले जो छोटी-मोटी गड़बड़ी हो जाती थी अब नहीं होगी। जो भी बदलाव फाइल में होगा, उसका पूरा पता चलेगा कि किस स्तर पर हुआ है।
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-गगनदीप सिंह, संयुक्त आयुक्त नगर निगम करनाल
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