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Karnal News: नोटिस तक ही कार्रवाई, सीलिंग आज तक नहीं

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। ऊंची इमारतों की फायर एनओसी न लेने की लापरवाही जान-माल पर तो भारी पड़ ही सकती है। साथ ही इमारत को सील करवा सकती है। चूंकि फायर एनओसी ही ऐसी इमारतों की सुरक्षा का प्रमाण है जो गैर रिहायशी हों। अगर किसी शैक्षणिक, वाणिज्यिक, व्यावसायिक, औद्योगिक, अस्पताल, होटल, बैंक्वेट हॉल की इमारतों की फायर एनओसी नहीं है तो दमकल ऐसी इमारतों को सील तक कर सकता है।
दमकल विभाग के एक्ट में फायर एनओसी न होने पर इमारत सील करने प्रावधान है। इसके लिए दमकल विभाग के अधिकारी इमारत का निरीक्षण कर तीन बार नोटिस जारी करते हैं। इसके बाद इसकी रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाती है। मुख्यालय से अनुमति और जिला प्रशासन की ओर से ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस बल मिलने के बाद इमारत को सील किया जा सकता है।
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हालांकि अब तक प्रदेश भर में ऐसी किसी भी इमारत को सील नहीं किया गया है। एनओसी अनिवार्य होने के बावजूद दमकल ऐसी इमारतों को केवल नोटिस थमाने तक सीमित रह जाता है। इमारत की सुरक्षा का प्रमाण आग लगने की घटनाओं में मुआवजा दिलवाने में भी आवश्यक है। एनओसी के लिए दमकल टीम इमारत का वैध नक्शा तक मांगती है।
नक्शे इमारत मालिकों के पास होते नहीं। इमारतों को बिना नक्शे के ही बना दिया जाता है। ऐसी इमारतों के नक्शे में बेसमेंट से लेकर ऊपरी मंजिल तक आपातकाल में बाहर निकलने के वैकल्पिक रास्ते होना अनिवार्य है।
इमारत का निर्माण, उसकी तकनीकी बारीकियों की जांच की जाती है। इसमें अग्निशमन यंत्रों से लेकर उपकरणों का भी हर साल रखरखाव कराया जाता है। विशेष रूप से ऐसी इमारतों में पार्किंग अनिवार्य होती है। फॉयर अफसर सुरक्षा के मापदंड पूरे होने के बाद ही आवेदक को एनओसी दे सकते हैं। शहर में आज भी सैंकड़ों कोचिंग सेंटर, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बैंक्वेट हॉल ऐसे हैं जिनके पास आज भी एनओसी नहीं है।
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देश भर में हर साल अग्निकांडों में हजारों लोग मारे जाते हैं। इसके अलावा हर साल करोड़ों रुपये की संपत्ति और सामान नष्ट हो जाते हैं। कई इमारतें तो दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद भी रिपेयर होने की हालत में नहीं होती। जिनका मुआवजा तक लेने में इमारत मालिकों को परेशानी आती है।
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