पानीपत। साइबर ठगी के बढ़ते नेटवर्क के कारण लोगों के सामने कई तरीके की समस्याएं आ रही हैं। ऑनलाइन लेने देन में बैंक खाते साइबर ठगी की चेन में फंसकर फ्रीज हो रहे हैं। इनमें ज्यादातर खाते व्यापारियों और दुकानदारों के हैं। खातों को खुलवाने के लिए लोगों को बैंकों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं लेकिन अब इस प्रक्रिया को आसान कर दिया गया है। साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (सीएफएमसी) के माध्यम से बैंक में एक शपथ पत्र देकर और वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबंधित जांच अधिकारी के सामने पेश होकर खाता खुलवाया जा सकेगा।
साइबर क्राइम थाने में 150 से अधिक मामले खातों के फ्रीज होने के पहुंचे हैं। साइबर क्राइम थाना पुलिस की जांच में सामने आया कि साइबर अपराध से जुड़े खातों का इस्तेमाल अक्सर राह चलते दुकानों और प्रतिष्ठानों में जाकर किया जाता है। खरीदारी कर ऑनलाइन भुगतान अपराधी करते हैं। भुगतान लेने वाले की गलती नहीं होती मगर उसे परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में खाता खुलवाने के लिए कई बार कोर्ट और थाने के चक्कर भी लगाने पड़ते हैं।
सीएफएमसी के माध्यम से आसान हुई प्रक्रिया
साइबर थाना प्रभारी दीपक ने बताया कि जिन लोगों के खाते साइबर फ्रॉड चेन के कारण बंद हुए हैं, उनके खातो को खुलवाने के लिए सीएफएमसी की ओर से नई प्रक्रिया शुरू की गई है। जिनके खाते फ्रीज हुए वह बैंक में जाकर पहले ये जानकारी प्राप्त करें कि खाता फ्रीज क्यों और किस राज्य की पुलिस ने किया है। इसके बाद सीएफएमसी की ओर से जारी एक फॉर्म भरकर आवेदन करें। जिसमें बैंक स्टेटमेंट और अन्य जानकारी दी जाएंगी। इसके बाद नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपना पक्ष रखें। जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारी के साथ वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बात करें और उनकी जांच में शामिल होकर अपना पक्ष रखें और संबंधित पेमेंट की जानकारी दें। जांच अधिकारी संतुष्ट होने के बाद एनओसी जारी करेंगे इसके बाद खाते को डी-फ्रीज कर दिया जाएगा।
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पहले अदालत और थाने पहुंचना पड़ता था
इससे पहले यह प्रक्रिया काफी जटिल और लंबी थी। खाता खुलवाने के लिए खाताधारक को कोर्ट में भी जाना पड़ता था। इस परेशानी को देखते हुए अनजाने में किसी संदिग्ध पेमेंट के कारण खाता बंद होने पर खाताधारक को सीएफएमसी की ओर से राहत दी गई है।