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जान भी जहान भीःदूसरों की जिंदगी बचाने को अपनों से दूर रहे कर्णवीर डाक्टर, नर्स

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कोरोना की जंग में दूसरों की जान बचाने के लिए चट्टान की तरह खड़े हैं। अपनों की चाह है, लेकिन उनसे जुदा रहने को मजबूर हैं। उनका हौसला और जज्बा ही है, जो संसाधनों के अभाव में भी कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। बात हो रही है करनाल में क्षेत्रीय कोरोना नियंत्रण केंद्र बनाए गए कल्पना चावला मेडिकल कालेज की, जहां निदेशक से लेकर चिकित्सक और पूरा स्टाफ कोरोना की जंग में आगे हैं। घर-परिवार होते हुए भी इन्होंने कालेज, होटल और धर्मशालाओं में डेरा डाल रखा है, ताकि परिजनों को कोरोना संक्रमण का खतरा न हो।
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कल्पना चावला मेडिकल कालेज में डाक्टर, नर्स आदि 175 लोगों का मेडिकल स्टाफ,162 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, 200 स्वीपर आदि सभी सेवाभाव से जुटे हुए हैं। घर पर जाने में परिजनों के कोरोना संक्रमण का खतरा है, इसलिए निदेशक समेत सभी जूनियर व सीनियर डाक्टर, स्टाफ नर्स आदि अपने घरों पर नहीं जाते हैं। जो डाक्टर व स्टाफ सिंगल रूम में रहते हैं, वह तो अपने कक्षों में हैं, लेकिन जो परिवार सहित रहते हैं, उनके लिए एनडीआरआई व तीन अन्य धर्मशालाओं, होटलों में ठहरने की व्यवस्था के साथ साथ खाने की भी व्यवस्था की गई है। कुल मिलाकर दूसरों की जिंदगी को बचाने को कर्णवीर सैनिक डाक्टरों ने खुद के परिवार से भी दूरी बना ली है। एक ही शहर में रहकर भी वह अपने बच्चों से मिलने नहीं जा रहे है, बस फोन व वीडियो काल पर ही बच्चों से बात होती है। आखिर, यह सामाजिक त्याग नहीं तो और क्या है?
..तो एनडीआरआई से मशीन लेकर शुरू की टेस्टिंग
कल्पना चावला मेडिकल कालेज के लिए मंगाई जा रही कोरोना टेस्ट मशीन अभी चेन्नई में लॉकडाउन में फंसी है, लेकिन इससे पहले ही एनडीआरआई से मशीन लेकर टेस्टिंग शुरू कर दी गई है।
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कोविड-19 के प्रभावितों के लिए 21 कक्ष सुरक्षित
मेडिकल कालेज के निदेशक प्रो.डा.जगदीश चंद्र दुरेजा के अनुसार कोविड-19 के प्रभावितों के लिए 21 कक्ष सुरक्षित किए गए हैं, जिसमें प्रत्येक कोरोना प्रभावित, संदिग्ध के लिए बाथरूम से लेकर तौलिया, मग, गिलास और चप्पल तक सभी कुछ अलग देकर व्यवस्था की गई है। आक्सीजन व दो वेंटीलेटर भी यहां रखे गए हैं। टेस्ट से लेकर सभी आवश्यक उपचार यहीं हो रहा है, कहीं जाने की जरूरत नहीं है। पांच व छह फ्लोर पर 125 बेड दिए गए हैं।
कोरोना से युद्ध को मेडिकल सैनिकों ने बदल दी दिनचर्या
-कल्पना चावला मेडिकल कालेज के डायरेक्टर प्रोफेसर डा.जगदीशचंद्र दुरेजा की बात करें तो वह सुबह आठ से नौ बजे के बीच मेडिकल कालेज पहुंच जाते हैं। इसी समय अन्य डाक्टर व स्टाफ भी पहुंच जाता है। रात्रिकालीन ड्यूटी वाले चले जाते हैं। नई सुबह को नई ऊर्जा के साथ कोरोना से युद्ध शुरू होता है। खुद को कवर रखकर दिनभर राष्ट्रभक्ति से लबरेज होकर चिकित्सा सेवा चलती है। अधिकांश तो एक ही बार ही भोजन करते हैं। लगातार रात आठ नौ बजे तक काम लगातार काम करते हैं। डा.दुरेजा पूरे स्टाफ का पूरा ध्यान भी रखते हैं, क्योंकि जब यह टीम स्वस्थ रहेगी, तभी तो लड़ाई जीती जा सकेगी।
एक पखवाड़े में और आ जाएंगे उपकरण
-कल्पना चावला मेडिकल कालेज में कोरोना से जंग की लड़ाई अगले एक पखवाड़े में और तेज होने वाली है। हालांकि इस समय काफी हद तक संसाधन उपलब्ध हो गए हैं, स्थिति लगातार नियंत्रण में आ रही है लेकिन जो डिमांड भेजी गई थी, उसमें 30 वेंटीलेटर, 30 मानीटर स्वीकृत हो गए हैं। 45 दिन में मिलने को कहा गया था, जिसमें 30 दिन बीत चुके है, अगले कुछ ही दिनों में यह कालेज को मिल जाएंगे। डाक्टरों को हरियाणा मैटीरियल एंड सप्लाई कारपोरेशन से पीपी किट मिल रही है लेकिन 20 हजार किट की मांग की गई है।
सिर्फ ड्यूटी नहीं, आज देश को हमारी जरूरत : डा.दुरेजा
करनाल। कल्पना चावला मेडिकल कालेज के निदेशक डा.जगदीशचंद्र दुरेजा स्वयं की नहीं बल्कि उनका पूरा परिवार खुद को देश क, पैरामेडिकल स्टाफ आदि की सख्त जरूरत है, यह समय अपनी राष्ट्रभक्ति दिखाने का है, देश के कुछ कर गुजरने का है। लॉकडाउन का असर दिखने लगा है। दुनियां को देखे तो हम काफी हद तक बचे हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सही समय पर रही फैसला लिया है। यदि जमाती न आते तो स्थिति कहीं बेहतर होती। इन लोगों को भी समझना चाहिए। डा.दुरेजा तो सुबह से देर रात तक कार्य करते ही है, उनकी पत्नी डा.संगीता दुरेजा भी देशभक्ति से लबरेज है और कोरोना से जंग में उतरने वाली है, उनकी ज्वाइनिंग इसी कालेज में एक दो दिन में हो जाएगी। उनकी बेटी हिमानी दुरेजा भी चंडीगढ़ राजकीय मेडिकल कालेज में इंटर्नशिप कर रही हैं। उनका बेटा तुषार दुरेजा घर पर ही रहता है।
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