माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। सदर बाजार स्थित रघुनाथ मंदिर में श्री रामकथा के दौरान स्वामी अखिलेश्वारानंद सरस्वती ने कहा कि इंसान का आचरण उसकी असल पहचान है, इंसान कैसे बोलता है, दूसरों से कैसे व्यवहार करता है यह उसके संग और कुसंग पर निर्भर करता है। इसलिए इंसान को मित्रता करते समय विशेष रूप से सजग रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान श्री राम को सबसे अधिक प्रेम करने वाली माता कैकेयी को मंथरा ने भड़का दिया तो उसने उसके कुसंग के कारण अपने दो वचन राजा दशरथ से मांग लिए, पहले वचन में श्री राम को 14 वर्ष का बनवास और दूसरे वचन में श्री भरत का राज्याभिषेक। इसलिए इंसान को सोच समझकर विवेकशील लोगों से ही संगत करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कलियुग में केवल नाम ही आधार है, इसलिए श्री राम का नाम लेते चलो, प्रभु पर पूरा विश्वास रखो। इंसान का जीवन कर्मों पर आधारित है, हर समय दूसरों का अच्छा करो, भला सोचो, नीयत साफ रहो। उन्होंने भक्तों को तुलसी विवाह ओर देवउठनी एकादशी की बधाइयां दी और कार्तिक माह को भगवान का सबसे प्रिय माह बताया। श्रीराम कथा 30 नवंबर तक चलेगी।