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Karnal News: बहरों के कान खोलने को धमाका बहुत जरूरी है...

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साझा साहित्य मंच की ओर से कर्ण पार्क में काव्य गोष्ठी आयोजित
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। साझा साहित्य मंच की ओर से सोमवार को कर्ण पार्क में मासिक काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें कवियों ने कविताएं पेश कर तालियां बटोरीं। जिसकी शुरुआत करते हुए मनोज मधुरभाषी ने पाकिस्तान पर कटाक्ष करते हुए कहा- भारत के पीठ पीछे वार बहुत करते हैं, दहकते अंगारों के सामने बहुत घबराते हैं। कतलाहेड़ी से आए राष्ट्रवादी कवि प्रवीण ''जन्नत'' बोले- बहरों के कान खोलने को धमाका बहुत जरूरी है, आंखों वाले अंधों से सदा बख़ूबी दूरी है।
इंद्री से आए जनवादी कवि दयाल चंद जास्ट ने हरियाणवी में रचना पढ़ी- विषैली धरती होती जावै, कुछ तो इसपे विचार करो। भारी संकट आण पड़ेगा, इस खतरे की पहचान करो। गीतकार नरेश लाभ ने अपने भाव रखे-सच्ची बातें जब करें, दिल को रखना साफ, रख आईना सामने, करें आप इंसाफ।
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तरावड़ी से आए कवि जय भारद्वाज ने शेर पढ़ा- झोल है तेरे तकव्वुर में सदा खोट है, अब समझ आया कि तेरी हर अदा में खोट है। हरबंस लाल पथिक बोले- अश्क बहते रहे आहें भरते रहे, दर्द की हद से आगे गुजरते रहे। रचनाकार कृष्ण कुमार निर्माण ने मां की महत्ता बताई- मां से बढ़कर धरती पर कोई तीर्थ स्थान नहीं, सच पूछो तो मां से बढ़कर होता भगवान नहीं। गोष्ठी में शिवम, समर्पिता कृष्ण, हरबंस लाल, कवि कमलेश कुमार पालीवाल भी पहुंचे।
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