कुरुक्षेत्र। शाहाबाद से दो बार विधायक बने खरैती लाल शर्मा के इस्तीफा देने का मामला नया नहीं है। वे इस तरह के फैसले लेकर चौंकाने में माहिर रहे हैं। चेयरमैन पद से इस्तीफा देकर वे विरोधियों के साथ-साथ और अपनी पार्टी से दो-दो हाथ के मूड में हैं। शर्मा ने गोसेवा आयोग से इस्तीफा ही नहीं दिया, बल्कि पार्टी छोड़ने का निर्णय ले चुके हैं। कुरुक्षेत्र की शाहाबाद विधानसभा सीट से दो बार विधायक चुने जा चुके पूर्व सहकारिता मंत्री केएल शर्मा की राजनीति फेरबदल से शुरू हुई थी। पहली बार 1991 में भाजपा के प्रत्याशी के रूप में शाहाबाद से जीत दर्ज करने वाले शर्मा ने तब भाजपा से नाता तोड़ कर खुद की भाजपा (खरैती) बनाई थी।
तब भाजपा (खरैती) के जनक रहे केएल शर्मा ने भजन लाल सरकार को समर्थन देकर मंत्रिमंडल में जगह पाई थी। पिछले चुनाव में शाहाबाद की सीट आरक्षित श्रेणी में आने पर उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें थानेसर से टिकट मिलेगी। लेकिन कांग्रेस के एक प्रभावशाली सांसद की बदौलत उन्हें यह सीट नसीब नहीं हुई। पिछले चार वर्ष से शर्मा कांग्रेस में गौण स्थिति में पहुंच चुके थे। कुछ ही समय पहले उन्हें हरियाणा गौसेवा आयोग का चेयरमैन नियुक्त कर लालबत्ती मिल गई थी। लेकिन पार्टी के प्रति असंतोष रहा।
शर्मा ये भांप चुके थे कि भविष्य में भी पार्टी कोई मेहरबानी नहीं करेगी, लिहाजा उन्होंने पार्टी से यू टर्न का निर्णय ले लिया और पहली कड़ी में आयोग के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया है। पता लगा है कि इनेलो उन्हें कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बना सकती है। वे भी एक पुराना हिसाब चुकता करने के मूड में हैं।
केएल शर्मा के जोड़तोड़ की खबर 20 जून को अमर उजाला में प्रकाशित एक समाचार में की थी। 19 जून को कुरुक्षेत्र में शर्मा ने हजकां नेताओं और इनेलो नेताओं से संपर्क के बारे में कहा था कि राजनेता जीवन में साथ-साथ और चुनाव के वक्त दो-दो हाथ करता है। लेकिन अब शर्मा अपनी ही पार्टी से बगावत कर कांग्रेस से दो-दो हाथ और कांग्रेस की धुर विरोधी एक पार्टी के साथ जुड़ने जा रहे हैं।
पार्टी में शामिल होकर करेंगे मोबाइल ऑन
इस्तीफा देने से आठ घंटे पहले से केएल शर्मा का मोबाइल स्विच ऑफ है। वीरवार को सुबह जब उनके फोन पर बार-बार काल की तो उनका मोबाइल स्विच आफ मिला, हालांकि शाम तक इस्तीफे की बात स्पष्ट हो गई, उधर शुक्रवार को भी जब उनका फोन बंद मिला और शर्मा के बेहद नजदीकी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अब तो पार्टी ज्वाइन करने के बाद ही मोबाइल ऑन करेंगे।
इनेलो में हो सकते हैं शामिल
कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट पर इनेलो की जाट और सैनी वोटरों पर अच्छी खासी पकड़ है, जबकि इस वोट बैंक के साथ इनेलो ब्राह्मण और पंजाबी वोटरों को लुभाने के लिए केएल शर्मा को तुरुप का पत्ता खेल सकती है, कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र से लगातार दो बार प्रतिनिधित्व कर रहे नवीन जिंदल को घेरने के लिए इनेलो की ये कोशिश कितनी कामयाब होगी? इसका खुलासा अधिकारिक रुप से इनेलो प्रत्याशी के नाम की पुष्टि और उसके बाद चुनावी नतीजों से ही ज्ञात होगा।