फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फांसी से कम सजा मंजूर नहीं

Sat, 04 May 2013 05:30 AM IST
Karnal
विज्ञापन
विज्ञापन
करनाल। 1984 के दंगों में आरोपी सज्जन कुमार को बरी करने के विरोध में शुक्रवार को सिख समाज ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। समाज के लोगोें ने केंद्र सरकार और सज्जन कुमार का पुतला भी फूंका और इस मामले मेें न्याय की मांग की।
विज्ञापन

शुक्रवार को सिख समाज के लोग डेरा कार सेवा में जमा हुए। यहां से प्रदर्शन करते हुए कमेटी चौक पर पहुंचे और जमकर नारेबाजी की। रोषस्वरूप काली पगड़ियां पहने सिख संगत, काली चुन्नियां ओढ़े सिख बीवियों और बाजू पर काली पट्टियां बांधे आम नागरिकों ने सज्जन कुमार को फांसी दो, जगदीश टाइटलर मुर्दाबाद, 1984 के कातिलों को फांसी दो, पंगु न्याय मुर्दाबाद के नारे लगाकर शहर के मुख्य बाजारों से सज्जन कुमार के पुतले की शवयात्रा निकाली। करनाल की विभिन्न गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों और सिख जत्थे बंदियों के आह्वान पर लोग सड़क पर उतरे।
सरबजीत के लिए मूल मंत्र पाठ
प्रदर्शन के बाद संगत ने कमेटी चौक पर पहुंचकर 1984 के दंगों में मारे गए लोगाें को याद किया और साथ ही सरबजीत सिंह की आत्मिक शांति के लिए पांच बार मूल मंत्र का पाठ किया। मूल मंत्र के पाठ के बाद सिख संगत ने सज्जन कुमार संरक्षण देने के लिए केंद्र सरकार को जमकर कोसा।
विज्ञापन

इतिहास का काला अध्याय
समाजसेवी प्रीतपाल सिंह पन्नु ने कहा कि यह विश्व के इतिहास का ऐसा काला अध्याय है जिसमें सरकारी आंकड़ों के अनुसार भी 3000 से ज्यादा बेगुनाह सिखों को घरों से निकालकर सड़कों पर सरेआम कत्ल कर दिया गया था। 29 साल बाद भी इस कत्लेआम के साजिशकर्ता और कातिल जेड सिक्योरिटी में कानून का मजाक उड़ाते हुए घूम रहे हैं जबकि जिन्होंने इस कत्लेआम में अपनों को खो दिया वे आज भी इंसाफ के लिए एक अदालत से दूसरी अदालत में धक्के खा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 29 साल के इंतजार के बाद कड़कड़डूमा अदालत द्वारा सज्जन कुमार को रिहा करना न्याय के मुंह पर तमाचा है।
रची थी साजिश
प्रदर्शन के दौरान गतका फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रधान गुरतेज सिंह खालसा और नौजवान सिख चेतना जत्थे के संयोजक पलविंदर सिंह ने कहा कि सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर को फांसी से कम सजा मंजूर नहीं है। क्योंकि बच्चा-बच्चा जानता है कि ये लोग इस कत्लेआम के सबसे बड़े साजिशकर्ता थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि वे पूरी जांच और सुनवाई पर उसी प्रकार नजर रखे जैसे गुजरात दंगों में किया गया था ताकि प्रभावशाली लोग बच न पाएं।
इन संगठनों ने लिया हिस्सा
प्रदर्शन में गुरुद्वारा मंजी साहिब कमेटी के प्रधान सुखवंत सिंह, गतका फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रधान गुरतेज सिंह खालसा, गुरुद्वारा शीश गंज तरावड़ी के प्रधान प्रताप सिंह, मनजीत सिंह खालसा, प्रताप सिंह रंधावा, गुरदेव सिंह रंभा, सतिंदर जीत सिंह, गुरु नानक सेवक जत्थे से राजिंदर सिंह मिड्ढा, नवाब सिंह सींगड़ा, हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह, अमीर सिंह, अमनदीप सिंह चावला, दर्शन सिंह सहगल, अमृतपाल सिंह, बलहार सिंह, सुरिंद्रपाल सिंह, रामगढ़िया, स्त्री सत्संग सभा की प्रधान सुरेंद्र कौर शामिल रहीं। इसके अलावा चरणजीत कौर, प्रीतम सिंह सोढी, जोगिंदर सिंह नीसिंग, दीप सिंह मैनेजर, जसविंदर सिंह बिल्ला के साथ नगर व्यापारमंडल के प्रधान कृष्णलाल तनेजा, परमजीत सिंह, डॉ. पुरी, लखविंदर सिंह, समाजसेवी कृष्ण गर्ग, मेलाराम स्कूल मार्केट के प्रधान हरमनदीप सिंह भिंडर, समाजसेवी पवन शर्मा, मनदीप सिंह, सुरजीत सिंह, हरजीत सिंह, लक्की सहित भारी संख्या में संगत इस प्रदर्शन में शामिल हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें