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ड्रोन से होगी जमीन की मेपिंग, आज से शुरू होगा कार्य

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। सर्वे ऑफ इंडिया की टीम एक पायलेट प्रोजेक्ट के तहत करनाल में ड्रोन की मदद से, लैंड रिकॉर्ड का जीआईएस (ज्योग्राफिक इन्फोर्मेशन सिस्टम) यानि भौगोलिक सूचना प्रणाली से मैपिंग करने का कार्य करेगी। इसके तहत, जिले के तीन गांवों का चयन किया गया है। मंगलवार से इन गांवों में टीम ड्रोन से मैपिंग करेगी। अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहा तो आगामी दिनों में इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा और हर गांव व शहर की ड्रोन से मैपिंग की जाएगी। इसके बाद इसके राजस्व विभाग के रिकार्ड से मिलान किया जाएगा। इस मामले को लेकर सर्वे ऑफ इंडिया के नॉर्थ जोन के निदेशक प्रशांत कुमार, उप महा सर्वेक्षक ले. कर्नल केए ग्रेवाल और उप अधीक्षक सर्वेक्षण सिद्घांत सेन ने सोमवार को डीसी करनाल डॉ. आदित्य दहिया से भेंट कर एक मीटिंग के माध्यम से प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा की। मीटिंग में जिला राजस्व अधिकारी राजबीर धीमान भी शामिल रहे।

जमीन की मिलेगी पूरी जानकारी, डायमेंशन समेत माप की भी डिटेल
मीटिंग में निदेशक प्रशांत कुमार ने बताया कि जीआईएस मैपिंग एक तरह से भू-रिकॉर्ड को लेकर वृहद पैमाने का मैप तैयार करना है, जिसमें जमीन के डायमेंशन अथवा माप की पूरी डिटेल तैयार की जाएगी। डिटेल में जमीन का लेवल, लंबाई-चौड़ाई, खेत और उनके आकार आबादी के अधीन क्षेत्र, आवास स्थलों का एरिया और उसमें रह रहे लोगों की सही-सही जानकारी इत्यादि डाटा तैयार किया जाएगा। इसे संबंधित व्यक्ति के आधार से भी जोड़ा जाएगा। करीब 50 मीटर ऊंचाई से ड्रोन सभी एरिया के चित्र लेगा, जिसमें 20 सेंटीमीटर से बड़ी सभी चीजें स्पष्ट नजर आएंगी, जिनसे मैपिंग को तैयार करने में मदद मिलेगी।
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हरियाणा में पहली बार सर्वे
हरियाणा में इस तरह का सर्वे पहली बार और प्रयोग के तौर पर निदेशक लैंड रिकॉर्ड हरियाणा के सहयोग से किया जा रहा है। सर्वे के बाद संबंधित क्षेत्रों में जल निकासी और बाढ़ नियंत्रण की योजनाएं व उपाय, तथा गांव, कस्बा व शहर के विस्तार की जानकारी एकत्र होगी। इसके अतिरिक्त, एकत्र किए गए सर्वे से सड़कों की वास्तविक स्थिति की जानकारी भी एकत्र हो सकेगी। डीसी ने बताया कि लैंड रिकॉर्ड और संपत्ति के सर्वे का कार्य इससे पहले इस टीम द्वारा देश के कर्नाटक और महाराष्ट्र में सफलतापूर्वक किया जा चुका है। देश से बाहर श्रीलंका में भी यह सर्वे किया गया है। यह पूर्णत: नई तकनीक से युक्त है और आधुनिकीकरण को लेकर सरकार भी इसमें अपनी गहन रुचि ले रही है। बैठक में डीसी डॉ. आदित्य दहिया ने बताया कि लैंड रिकॉर्ड के सर्वे का कार्य पूर्णत: सकारात्मक और जनहित में है। सर्वे टीम जिस गांव में जाएगी, वहां के लोग टीम का पूरा सहयोग करें।

आज छह सदस्यीय टीम शुरू करेगी कार्य
डीसी ने बताया कि सर्वे टीम में करीब 6 लोग होंगे, जो मंगलवार से ही अपना काम शुरू करेंगे। इस कार्य के लिए डीसी से चर्चा के बाद, सर्वे के लिए 3 गांव सिरसी, हेमदा व शाहपुर सिलेक्ट किए गए हैं। इन गांवों में जाकर वहां के लोगों से सहयोग लेकर सर्वे का कार्य शुरू करेंगे। गांव के चौकीदार या उसके प्रतिनिधि राजस्व विभाग के पटवारी व अन्य कर्मचारी से भी सिजरा व लाल डोरे इत्यादि के नंबर लिए जाएंगे। एनआईसी करनाल के डाटा एंट्री ऑपरेटर प्रतिदिन डाटा एकत्रीकरण में मदद करेंगे और एकत्र किए गए डाटा को देहरादून स्थित सेंटर में प्रोसेसिंग के लिए भेजा जाएगा।
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लाल डोरे की जमीन भी होगी चिह्नित
इस बारे में जिला राजस्व अधिकारी बताया कि डिजिटल मैपिंग से सबसे बड़ा फायदा गांवों में लाल डोरे के अंदर बने मकान मालिकों को होगा। फिलहाल पूरे प्रदेश में लाल डोरे के अंदर के मकानों किसी भी प्रकार का राजस्व रिकार्ड नहीं होता है। इन मकानों की कोई रजिस्ट्री आदि नहीं है। ऐसे अगर किसी को अपने मकान व प्लाट पर लोन आदि चाहिए तो उसे परेशानी उठानी पड़ती है। जीआईएस के बाद लाल डोरे की जमीन मालिकों को इसका लाभ मिलेगा। मैपिंग के बाद इस सारे रिकार्ड को ऑनलाइन कर दिया जाएगा। इसके तहत लाल डोरे के अंदर के हर मकान और प्लाट का डाटा तैयार किया जाएगा, साथ ही मालिक का नाम भी दर्ज किया जाएगा। कोई भी व्यक्ति इस रिकार्ड को नेट के माध्यम से देख सकेगा।
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