अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। भूस्वामियों को अधिग्रहीत जमीन की अदालत से बढ़ाई गई मुआवजा राशि समय पर न देने पर कड़ा संज्ञान लेते हुए स्थानीय अतिरिक्त जिला न्यायाधीश डॉ. चंद्रहास की अदालत ने पंचकूला में अर्बन एस्टेट हरियाणा के भूमि अर्जन कलेक्टर और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण करनाल के एस्टेट ऑफिसर के खिलाफ सीपीसी के आर्डर-21 रूल-37 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर निर्देश दिया है। इसमें कहा गया है कि 21 सितंबर को अदालत में पेश होकर इस नोटिस का जवाब देवें कि क्यों न आपको सिविल जेल में हिरासत में लिया जाए। अगर ऐसा नहीं किया तो यह समझ लिया जाएगा कि आपने इस संबंध में कुछ नहीं कहना है और फिर आपके खिलाफ कानूनी नियमों के तहत एक्शन लिया जाएगा।
भूस्वामियों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता शक्ति सिंह ने अदालत को बताया कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने तरावड़ी में सेक्टर-1 स्थापित करने के लिए 30 जनवरी, 2007 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 4 के तहत गजट अधिसूचना जारी कर भूमि अधिग्रहण की थी और तत्कालीन भूमि अर्जन कलेक्टर पंचकूला ने अवार्ड नं. 8 31 दिसंबर, 2009 को घोषित किया था। इस अवार्ड के खिलाफ भूस्वामियों द्वारा दायर किए गए केस को मंजूर करते हुए अतिरिक्त जिला न्यायाधीश विमल सपरा की अदालत ने 13 नवंबर, 2013 को मुआवजा राशि बढ़ाने का फैसला किया था। बढ़ी हुई मुआवजा राशि लेने के लिए भूस्वामियों ने अप्रैल, 2014 में इजराए दायर की गई थी, किंतु अभी तक भी हुडा ने पूरी राशि नहीं दी है। अदालत ने इस मामले में कड़ा संज्ञान लेेकर नोटिस जारी करते हुए कहा कि 2018-19 के एक्शन प्लान की कैटेगरी में आ गई है और अभी तक मुआवजा राशि जमा नहीं करवाई गई है। क्यों ने हुडा के अधिकारियों को हिरासत में ले लिया जाए।