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माफिया ने यमुना के साथ लगती 100 एकड़ जमीन पर किया खनन, न पुलिस बोल रही है और न ही विभाग

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इंद्री। खनन माफिया धड़ल्ले से यमुना नदी के साथ लगती करीब 100 एकड़ जमीन पर अवैध रूप से खनन कर रहा है। दिनभर में सौ से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रालियां और ट्राले यहां से रेत लेकर निकल रहे हैं। खास बात ये है कि इनपर न तो पुलिस विभाग कुछ कह रहा है और न ही खनन विभाग। इससे भी बड़ी बात तो ये है कि माइनिंग विभाग तो ये कह कर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहा है कि हमें तो पता ही नहीं कि यहां खनन चल रहा है? जबकि 100 एकड़ में 20-20 फुट तक गहरे गड्ढे देखे जा सकते हैं।
बता दें कि प्रशासन ने अवैध माइनिंग पर रोक लगाई हुई है। बावजूद इसके यमुना नदी से सटे खंड इंद्री के गांव चंद्राव में रेत माफियाओं द्वारा यमुना नदी से दिन रात माइनिंग की जा रही है। रेत माफियाओं ने करीब 100 एकड़ यमुना नदी का सीना छलनी कर दिया है। जहां से प्रतिदिन काफी संख्या में ट्रॉली-ट्रैक्टर रेत से भरे हुए निकल रहे हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो पिछले 6 महीनों से यमुना नदी में लगातार माइनिंग हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी आते तो हैं, मगर रेत माफिया से जी हजूरी करवा कर चले जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शीघ्र ही अवैध माइनिंग बंद नहीं की गई तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
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कटाव का है डर
इस मामले में ग्रामीण रणबीर सिंह ने कहा कि यमुना नदी में पिछले करीब 6 महीनों से लगातार माइनिंग हो रही है। इसके कारण आने वाले समय में यमुना नदी में पानी अधिक आने के कारण भूमि कटाव हो सकता है। भूमि कटाव होने के कारण आसपास के क्षेत्र में बाढ़ की समस्या आ सकती है। इसलिए प्रशासन को रेत खनन करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए। वे कई बार अधिकारियों को शिकायत कर चुके हैं, लेकिन उसका समाधान नहीं किया जा रहा है।

राजस्व की लग रही चपत
इस मामले में समाजसेवी गौरव धूड़िया का कहना है कि पिछले 6 महीनों से यमुना नदी से माइनिंग होने के कारण लाखों टन रेत निकल चुका है। इसके कारण सरकार को करोड़ों रुपयों की राजस्व की चपत लग रही है। परंतु स्थानीय प्रशासन है कि सरकार को राजस्व पहुंचाने की बजाय अपना राजस्व लेने में लगा हुआ है। आश्चर्य की बात ये है कि कोई भी विभाग इस अवैध खनन की तरफ देखने की हिम्मत नहीं दिखा पा रहा है।

पब्लिक प्रॉपर्टी डैमेज एक्ट में भी किया जाए मुकदमा दर्ज
इस मामले में समाजसेवी बृजपाल ने कहा कि कुछ समय पूर्व इंद्री थाना में रेत तस्करों के खिलाफ माइनिंग एक्ट के साथ-साथ पब्लिक प्रॉपर्टी डैमेज एक्ट और रेत चोरी करने के आरोप में भी मुकदमे दर्ज किए गए थे। इसके कारण क्षेत्र में अवैध माइनिंग करने वाले रेत माफियाओं ने अवैध रेत खनन बिल्कुल बंद कर दिया था। इसलिए प्रशासन को रेत माफियाओं के खिलाफ रेत चोरी करने के आरोप में भी मुकदमे दर्ज करने चाहिए, तभी रेत का अवैध कारोबार बंद हो सकता है। अवैध खनन मिलीभगत से चल रहा है, ऐसे लोगों के खिलाफ भी जांच होनी चाहिए।
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माइनिंग अधिकारी बोली, मुझे जानकारी नहीं
धड़ल्ले से दिन और रात यमुना से रेत निकाला जा रहा है, लेकिन माइनिंग अधिकारी माधवी गुप्ता ये कह कर बात खत्म कर देती हैं कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है। जल्द ही इस मामले की जांच करवाई जाएगी। ऐसे में बात और भी गंभीर हो जाती है कि जब विभाग को ही अवैध खनन की जानकारी नहीं है तो वे खनन रोकेंगे कैसे? दूसरा पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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