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मानसून सक्रिय, प्रशसान की तैयारियां अधूरी : यमुना में बाढ़ आई तो 37 गांवों को ले डूबेगी

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। मानसून सक्रिय हो गया है, पहाड़ों में तेज बारिश शुरू हो गई है। ऐसे में अगर यमुना नदी में बाढ़ आती है तो इसके साथ लगते करीब 37 गांवों में बाढ़ का खतरा रहेगा, क्योंकि अभी तक बाढ़ से बचाव की तैयारियों को लेकर प्रशासन की ओर से कोई पुख्ता कार्य नहीं किया गया है। इस बार प्रशासन की ओर से अभी न तो पत्थर के स्टड लगाने का कार्य पूरा हुआ है और न ही उसकी तारबंदी हुई है। जमीनी हकीकत ये है कि करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के लिए पत्थर को यमुना पर लगाकर रख दिए गए हैं और उनकी पैमाइश भी कर ली गई है, लेकिन इन्हें तरतीब से लगाने का कार्य काफी धीमी गति से चल रही है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि खुद डीसी डॉ. आदित्य दहिया ने यमुना नदी पर बाढ़ से बचाव को लेकर चल रहे कार्यों का मुआयना किया था और अधिकारियों को आदेश दिये थे कि मानसून से पहले 20 जून तक ये कार्य पूरा करें, लेकिन अभी तक हालात बेकाबू ही हैं। उधर, लगातार यमुना नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। हालांकि, अभी ये सामान्य से भी कम पानी चल रहा है, लेकिन अगर ज्यादा पानी आया तो प्रशासन के पास उसे रोकने के लिए कोई प्रबंध नहीं है।
बता दें कि यमुना के साथ लगते क्षेत्र में 2 नए स्टोन स्टड (पत्थर की ठोकरें) बनाने, नौ की मरम्मत व 627 फुट पत्थरों के सहारे दीवार तैयार करवाने का कार्य इस साल किया जाना है। प्रशासन द्वारा किया गया था कि 30 जून तक ये कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इन पर करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। जिले की बात करें तो यमुना नदी का इसका बहाव क्षेत्र करीब 11 किलोमीटर तक फैला है। सिंचाई विभाग की ओर से इस बार कुंडा कलां और जम्मूखाला में स्टड बनाने का कार्य चल रहा है। विभाग का दावा है कि कुंडा कलां का कार्य पूरा कर लिया गया है, जबकि जम्मूखाला का कार्य 80 प्रतिशत तक पूरा कर लिया गया। लेकिन जमीनी हकीकत जानने के लिए अमर उजाला की टीम ने यमुना के साथ लगते गांवों का और यमुना नदी का मुआयना किया। सच्चाई ये है कि कुंडा कलां में स्टड तो बना लिये गए हैं, लेकिन अभी भी तारबंदी पूरी तरह से नहीं हुई है। इसी प्रकार, जम्मूखाला गांव के पास तो कार्य की गति काफी धीमी है। यहां पर स्टड बनाने को लेकर काफी एरिया में पत्थर को रख दिया गया है और इसकी पैमाइश भी कर ली गई है, लेकिन स्टड बनाने को लेकर केवल एक जेसीबी लगाई गई है। जिस गति से कार्य चल रहा है, उससे लगता है कि यह कार्य आगामी 15 दिन तक भी पूरा नहीं हो सकता। इसके बाद पत्थरों को रोकने के लिए तारबंदी का कार्य अलग से है। ऐसे में अगर यमुना नदी में बाढ़ आती है तो साथ लगते गांवों में पानी घुसने का खतरा बरकरार है।
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कब कब आई जिले में बाढ़
1978 में यमुना में 7.14 लाख क्यूसिक पानी आया। वर्ष 2010 में यह 7.45 लाख क्यूसिक रिकॉर्ड किया गया था, जिसने 48 साल का रिकॉर्ड तोड़ा था। इसी प्रकार वर्ष 2013 में ताजे वाला हेड से यमुना में 8 लाख, 6 हजार 464 क्यूसिक पानी छोड़ा गया था, जिससे करनाल के कुछ हिस्से प्रभावित हुए थे। वर्ष 2014 में 1 लाख, 28 हजार 339 क्यूसिक व वर्ष 2015 में 1 लाख 1 हजार 360 क्यूसिक पानी छोड़ा गया था। वर्ष 2017 में 1 लाख, 47 हजार क्यूसिक पानी यमुना में आया।

ये गांव हैं बाढ़ प्रभावित क्षेत्र
यमुना नदी के साथ लगते नबियाबाद, सैयद छपरा, जपती छपरा, गढ़पुर टापू, खिराजपुर, कुंडा कलां, जम्मूखाला, बलेड़ा, चंद्रों व शेरगढ़ टापू ऐसे गांव हैं जो यमुना की चपेट में आ जाते हैं। दूसरी ओर, यमुना की बाढ़ से चोगावां, नग्गल, हंसूमाजरा, डबकोली कलां, हलवाना, कमालपुर गडरियां, सदरपुर, मुंडीगढ़ी, बड़सत, फरीदपुर, लालूपुरा, गढ़ीबरल, बराना, बहलोलपुर, डेरा खोकीपुर, खुखनी, डबरकी पार, जड़ौली, देवीपुर, नबीपुर, नसीरपुर, मुस्तफाबाद, पीर बडौली, डबकोली खुर्द, नगली, तातारपुर व कलसोरा गांव भी बाढ़ से प्रभावित हो जाते हैं।
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तीन दिन में पूरा करेंगे कार्य : कार्यकारी अभियंता
इस बारे में सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता मुनीष शर्मा ने बताया कि यमुना नदी पर दो स्थानों पर काम चल रहा था, इनमें से कुंडा कलां का कार्य पूरा कर लिया गया है और वहां पर स्टड के साथ साथ तारबंदी भी की गई है। इसी प्रकार, गांव जम्मूखाला के पास कार्य चल रहा है, उम्मीद है कि आगामी दो से तीन दिन में इसे पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि, जब तारबंदी के बारे में सवाल पूछा गया तो कार्यकारी अभियंता ने माना इसमें कुछ देरी हुई है, जल्द ही इसे भी पूरा कर लिया जाएगा।
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