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नोडल अधिकारी बोले, गलत तरीके से बिल काटना बंद करे, व्यापारियों ने साधी चुप्पी

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नोडल अधिकारी बोले, गलत तरीके से बिल काटना बंद करे, व्यापारियों ने साधी चुप्पी
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारियों को होने वाली समस्याओं के निवारण के लिए अबकारी व कराधान विभाग और हरियाणा व्यापार मंडल द्वारा बुलाए गए बैठक में गलत तरीके से बिल काटने का मुद्दा छाया रहा। गारमेंट, जूते व चश्मा व्यापारियों के लिए आयोजित इस बैठक में वस्तु एवं सेवाकर(जीएसटी) के नोटल अधिकारी रोहताश ने व्यापरियों को समझाइस देते हुए कहा कि, मीडिया के माध्यम से जानकारी मिल रही है कि कुछ व्यापारी टैक्स स्लेब से बचने के लिए गलत बिल काट रहे हैं। व्यापारी ऐसा करना बंद करें, अगर किसी को कोई समस्या है तो हमें बताएं, उसका समाधान किया जाएगा। हालांकि व्यापारी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रहें।
विदित हो कि अमर उजाला ने 10 जुलाई के अंक में जीएसटी ने तोड़ी सलवार-कमीज की जोड़ी र्शीषक से करनाल में कुछ व्यापारियों द्वारा टैक्स स्लैब से बचने के लिए गलत तरीके से बिल बनाने का मुद्दा उठाया था। इसमें बताया गया था कि जीएसटी के बड़े टैक्स स्लैब से बचने के लिए जहां गारमेंट के कुछ व्यापारी सलवार-कमीज, दुपट्टा जैसे कपड़ों को अलग-अलग बिल पर बेच रहे, वहीं जोड़ी में बिकने वाले जूते और चप्पल का भी अलग-अलग बिल बनाया जा रहा है। व्यापारियों की यह चालाकी जीएसटी के नियमों के तहत है, इसलिए अबकारी व कराधान विभाग के अधिकारी भी कुछ नहीं कर पा रहे। हालांकि बैठक में अधिकारियों ने गलत तरीके से बिल न काटने का निर्देश देकर यह जरूर बता दिया कि उनकी चालाकी प्रशासन की नजर में हैं।
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इस बैठक की अध्यक्षता डीईटीसी डॉ आनंद सिंह ने किया, वहीं जीएसटी के नोडल अधिकारी रोहताश ने व्यापारियों की समस्या का समाधान किया। व्यापारियों ने जीएसटी रिर्टन भरने से लेकर बिल काटने, पुराने स्टॉक को खत्म करने और जीएसटी रजिस्ट्रेशन से संबंधित सवाल किए। जिनका अधिकारियों ने प्रमुखता से जवाब दिया। नोडल अधिकारी रोहताश ने व्यापारियों के शंका का समाधान करते हुए कहा कि कुछ लोग अफवाह फैला रहे हैं कि व्यापारियों को महीने में तीन बार जीएसटी रिर्टन भरना होगा। जबकि व्यापारी को महीने में सिर्फ एक बार रिर्टन फाइल करना होगा।
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यापारी जिसकी सेल 20 लाख के ऊपर है वह बिना जीएसटी नंबर के सेल नहीं कर सकता। वहीं, जो जीएसटी के दायरे में नहीं आते वे व्यापारी ग्राहकों से जीएसटी नहीं वसूल सकते, क्योंकि इन व्यापारियों को जीएसटी देना ही नहीं पड़ेगा। हालांकि ऐसे व्यापारियों को कैश मेमो काटना अनिवार्य रहेगा। इस बैठक में आबकारी व कराधान विभाग से अनुरूद्घ शर्मा और अजय सैनी के अलावा हरियाणा व्यापार मंडल के प्रधान कृष्ण लाल तनेजा, चेयरमैन कैलाश गुप्ता, महासचिव हरमीत सिंह हैप्पी के अलावा अन्य व्यापारी मौजूद रहे।
30 जुलाई तक करा सकते हैं जीएसटी रजिस्ट्रेशन
जीएसटी के दायरे में आने वाले जिन व्यापारियों ने अभी तक जीएसटी नंबर के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, वे 30 जुलाई तक रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। डीईछीसी डॉ आनंद सिंह ने बताया कि व्यापारियों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए एक और मौका दिया गया है। अगर इस दौरान भी बचे हुए व्यापारी रजिस्ट्रेशन नहीं कराए तो शायद दोबारा उन्हें मौका न मिले। वहीं कोई भी व्यापारी जो जीएसटी के दायरे में आता है वह बिना जीएसटी नंबर के सेल नहीं कर पाएगा।
अब के प्राइज रेट की स्लीप लगाना अनिवार्य
जीएसटी लागू होने के बाद जिन वस्तुओं के दाम में गिरावट या बढ़ोत्तरी हुई है, उसके पहले और अब के प्राइज रेट की स्लीप लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। एक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि आम लोगों को अभी भी जीएसटी का फायदा नहीं मिल पा रहा है। क्योंकि जीएसटी लागू होने के बाद जिन वस्तुओं के दाम गिर गए हैं, उनको भी पहले की प्राइज पर ही बेचा जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि ऐसा करना गलत है, जो भी ऐसा करते हुए पाया जाएगा उस पर कार्रवाई होगी। सभी व्यापारी जिन वस्तुओं के दाम में बदलाव हुआ है उसके पहले और अब के प्राइज का स्लीप उस वस्तु के ऊपर लगाएं।
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व्यापारियों ने भी माना आम लोगों तक नहीं पहुंच रहा जीएसटी का फायदा
बैठक में अधिकारियों ने व्यापारियों से पूछा कि अब आप आम आदमी बनकर बताओ की क्या आम लोगों तक जीएसटी का फायदा पहुंच रहा है कि नहीं। अधिकारियों के इस प्रश्न पर व्यापारियों ने एकसुर में कहा कि नहीं, जीएसटी का फायदा नहीं मिल पा रहा। इसपर अधिकारियों ने कहा कि सरकार ने जीएसटी आम जनता को फायदा पहुंचाने के लिए लागू किया है और इसका फायदा पहुंचाने की जिम्मेदारी आप लोगों पर। इसलिए आप सभी मदद करें, व्यापारियों को जो भी समस्या होगी, उसका निवारण किया जाएगा।
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