करनाल। आरटीआई एक्ट के तहत मांगी गई सूचनाओं के प्रदेश में लंबित आठ हजार मामलों का अगले छह माह में निपटारा होगा। इसकी सूचना आयोग की ओर से तैयारी कर ली गई है। एक सप्ताह में इनके निपटान की तिथियां भी जारी कर दी जाएंगी। ये जानकारी अमर उजाला से विशेष बातचीत में नए सूचना आयुक्त संजय मदान ने दी।
उन्होंने बताया कि लोगों को आरटीआई एक्ट के तहत बिना देरी सूचनाएं मिलें, इसे लेकर व्यवस्था बनाई जा रही है। हमारा प्रयास रहेगा कि निर्धारित समय सीमा में ही व्यक्ति को सूचना मिले और विभाग के अधिकारी भी जानकारी देने में लापरवाही न बरतें।
उनका कहना है अब लोगों को जानकारी के लिए अधिकारियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। हम द्वितीय अपील अथॉरिटी हैं, प्रयास रहेगा कि पहली अपील पर ही मामले निपट जाएं, यदि वहां लंबित रहा तो हम शीघ्र निपटाने का प्रयास करेंगे। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश-
आरटीआई के मामले कब से और क्यों लंबित हैं?
जवाब : आरटीआई के आठ हजार मामले 2020 से पहले से लंबित हैं। हमारा प्रयास है कि इन्हें अगले छह माह में निपटा दिया जाए। इसके लिए प्रत्येक मामले पर तारीख तय करते हुए सुनवाई करेंगे। दोनों पक्षों को बुलाया जाएगा। सूचना आयुक्तों की कमी के कारण मामलों पर सुनवाई नहीं हो पाई, अब तेजी लाएंगे।
पहले कहां कमी थी और अब तेजी कैसे लाएंगे?
जवाब : सूचना आयुक्त के 11 पदों में से महज तीन ही भरे थे। इसलिए मामले बढ़ते गए। अब नई नियुक्ति होने के बाद आठ पद भर गए हैं तो मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी। पुराने सूचना आयुक्तों पर बोझ भी घटेगा। सप्ताह में पांच दिनों में से तीन दिन पंचकूला स्थित आयोग के कार्यालय में कोर्ट लगाई जाएगी।
कुछ मामलों में सेटेलमेंट हो जाती है तो ऐसी स्थिति में क्या करेंगे?
जवाब : सूचना देने की बजाय मांग रोककर प्रार्थी से कई बार सेटेलमेंट हो जाती है। ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्ति और अधिकारी को नोटिस देने के बाद केस को बंद किया जाएगा। लापरवाही या सेटेलमेंट के कारण मामलों को लंबित नहीं रख सकते।
आरटीआई में जानकारी न देने पर कितने जुर्माने का प्रावधान है?
जवाब : आरटीआई में जानकारी न देने वाले अधिकारियों पर जुर्माने का भी प्रावधान है। 250 रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। जुर्माना लंबित जवाब, अधूरी और गलत जानकारी देने पर भी लगाया जा सकता है। खास बात यह है कि यह जुर्माना अधिकारियों की जेब से वसूला जाता है।
क्या सूचना मिलने पर देरी होने पर मुआवजा भी दिया जाता है?
जवाब : सूचना न देने पर जुर्माना लगाने की तरह सूचना में देरी होने व चक्कर काटने पर सूचना मांगने वाले व्यक्ति को मुआवजा देने का भी प्रावधान है। यह राशि भी जिम्मेदारी अधिकारी से दिलवाई जाती है। मुआवजा दिए जाने की राशि का निर्धारण केस की स्थिति पर निर्भर करता है।