अमर उजाला ब्यूरो
इंद्री। सेल्स गर्ल से सामूहिक दुष्कर्म और वीडियो वायरल करने के मामले में एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब अन्य को काबू करने के लिए छापेमारी के दावे कर रही है। इससे पहले, थाना प्रभारी सतप्रकाश दहिया उन्हीं आरोपियों के साथ मीटिंग पर मीटिंग करते रहे। सवाल ये है कि जब सारा मामला उनके सामने आ चुका था, केस भी दर्ज किया चुका था, बावजूद इसके थाना प्रभारी इस मामले को लटकाते रहे। उधर, महिला आयोग का कहना है कि वे इस मामले में पुलिस अधिकारियों से जवाब तलब करेगी।
गौरतलब है कि एक गांव में सेल्स गर्ल के साथ कुछ युवकों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म किया। साथ उसकी वीडियो भी आरोपियों द्वारा सोशल मीडिया पर वायरल की गई। वीडियो सामने आने के बाद गांव के पूर्व सरपंच रामकुमार द्वारा युवकों की पहचान करते हुए इस पूरे मामले की शिकायत पुलिस को दी गई। इस पर पुलिस द्वारा सामूहिक दुष्कर्म और आईटी एक्ट की धारा में राम त्यागी, श्याम त्यागी और अंकुर नामक तीन युवकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इंद्री पुलिस आरोपियों को पकड़ने की बजाय उनके साथ करीब एक सप्ताह तक मीटिंग करती रही। शिकायतकर्ता की मानें तो पुलिस ने इस मामले में आरोपियों को बचाने की तैयारी की हुई थी। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दो आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
सवाल ये है कि जब सारे आरोपियों से रोजाना थाने में एसएचओ मिल रहे थे और पंचायतें कर रहे थे तो उस समय क्यों नहीं उनको काबू किया गया। थाने के ही सूत्रों का दावा है कि थाना प्रभारी इस मामले को निपटाना चाह रहे थे और इसलिए आरोपियों को बचने का पूरा मौका दिया।
उसी समय किए जा सकते थे गिरफ्तार : शिकायतकर्ता
इस मामले में शिकायतकर्ता रामकुमार ने कहा कि यदि इंद्री पुलिस इस मामले में पहले ही दिन सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लेती तो आज पुलिस को अन्य आरोपियों के लिए छापेमारी करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि मीटिंगें थाने में ही हो रही थी। इंद्री पुलिस युवकों को बचाने के प्रयास में थी और मुझ पर भी बेवजह दबाव बना रही थी, ताकि मैं आरोपियों के साथ समझौता कर सकूं।
निराधार हैं आरोप : थाना प्रभारी
इस बारे में इंद्री थाना प्रभारी सतप्रकाश दहिया का कहना है कि अन्य आरोपियों के लिए छापेमारी की जा रही है और शीघ्र ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। मामले की जांच के लिए जरूर ग्रामीणों को बुलाया गया था, आरोपियों से किसी भी प्रकार की मीटिंग नहीं की गई। जल्द ही अन्य आरोपियों को काबू कर लिया जाएगा। इस प्रकार के आरोप निराधार हैं।