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सिंचाई विभाग पर भारी पड़ रहे हैं चूहे, 63 हजार क्यूसिक पानी छोड़ने पर दोबारा हुआ नहर में रिसाव

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अमर उजाला ब्यूरो
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इंद्री (करनाल)। पश्चिमी यमुना एमएलएल नहर टूटने के बाद से सिंचाई विभाग की नींद हराम हो गई। विभाग पर चूहे भारी पड़ रहे हैं। पांच दिनों में प्रशासन की ओर से 520 मजदूरों की मदद से 40 हजार मिट्टी के कट्टे लगाकर कट बंद किया था, लेकिन शुक्रवार को जब ट्रायल के तौर पर नहर में 6300 क्यूसिक पानी छोड़ा गया तो तटबंध से करीब 50 मीटर दूसरी पर ही दूसरी जगह पानी का रिसाव होना शुरू हो गया।
इसे देख प्रशासन के हाथ पांव फुल गए और उन्होंने तुरंत पानी बंद करा दिया। पानी रिसाव के बारे में जब ग्रामीणों को पता चला तो उनमें भी भय का महौल बन गया, वहीं दोबारा तटबंध ने टूट जाए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह सब सिंचाई विभाग विभाग की लापरवाही का नतीजा है, क्योंकि समय रहते विभाग के कर्मचारियों ने तटबंध की ओर कभी ध्यान ही नहीं दिया। आज के समय में तटबंध पूरी तरह से खस्ता हो चुका है। उधर, विभाग इस रिसाव के पीछे चूहों सहित अन्य जीव-जंतुओं द्वारा बनाए गए खोल को मान रहा है। इस कारण नहर की पटरी में कई स्थानों पर सुराग बने हुए हैं, जिनसे रिसाव हो रहा है। शनिवार सुबह उस दरार को बंद करने का कार्य किया जाएगा जहां से पानी का रिसाव हुआ है। वहीं, दूसरी ओर दिल्ली व दक्षिण हरियाणा में पानी की सप्लाई प्रभावित हो रही है। गौरतलब है कि दिल्ली में पानी इन्हीं नहरों के माध्यम से किया जा रहा है और इस नहर से 12 हजार क्यूसिक पानी मूनक हेड पर पहुंचता है, लेकिन पिछले एक सप्ताह से नहर में पानी बंद किया गया हुआ। ऐसे में दो और दिन इसमें पूरा पानी छोड़ने में लग सकते हैं। उधर, सिंचाई विभाग का दावा कि दिल्ली को पूरा पानी दिया जा रहा है, नहर बंद का असर वहां पर नहीं पड़ रहा है।
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कट ठीक करने में लग गया सप्ताह
इंद्री से गुजरने वाली पश्चिमी यमुना (मेन लाइन लोवर) एमएलएल नहर का तटबंध गांव शेखपुरा खादर के समीप से एक सितंबर की रात करीब आठ बजे टूट गया था। पानी के तेज बहाव के कारण तटबंध में 110 फीट चौड़ा 27 गहरी खाई बन गई थी। इस तटबंध को बनाने के लिए 520 मजदूर जुटे हुए थे। इसके साथ ही 3 पोपलिन मशीन, 6 जेसीबी, 6 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 13 डंपर लगे हुए थे। तब जाकर पांच दिन में तटबंध तैयार किया गया। लेकिन अभी भी यह तटबंध कभी भी टूट सकता है।

जगह-जगह से खस्ता है पटरी, प्रशासन के लिए बना चुनौती
पश्चिमी यमुना नहर का तटबंध जगह-जगह से खस्ता हालत में है। चूहों से सहित अन्य जीव जन्तुओं ने तटबंध में बिल बनाए हुए हैं और जिस कारण तटबंध के नीचे की मिट्टी निकली हुई है। नीचे से मिट्टी खोखली होने के कारण पानी का रिसाव हो रहा है। ऐसे में प्रशासन के सामने एक ओर समस्या खड़ी हो गई है। यदि ऐसे ही पानी का रिसाव तटबंध पर होने लगा तो उन्हें पूरा तटबंध ही दोबारा से तैयार करना पड़ेगा।

ग्रामीणों में भय है बरकरार
नहर के तटबंध को लेकर ग्रामीणों में अभी भी भय है, क्योंकि शुक्रवार को दोबारा तटबंध में पानी का रिसाव हो गया है। ग्रामीण शिवराम, सुरेंद्र, सुखदेव सिंह, हरप्रीत सिंह, चरणजीत सिंह का कहना है कि प्रशासन को अच्छे से पूरे तटबंध की मरम्मत करनी चाहिए। तटबंध पूरी तरह से खस्ता हो चुका है। यदि प्रशासन ने नहर में पानी छोड़ दिया तो भविष्य में कभी भी दोबारा से तटबंध टूट सकता है।
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नहर को किया जा रहा चेक : कार्यकारी अभियंता
इस बारे में सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता मुनीष शर्मा ने बताया कि नहर की पटरी में चूहों आदि के बिल होने की वजह से पानी का रिसाव शुरू हो गया था। जिस पर अब काबू पा लिया गया है और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। इसके अलावा, पूरे नहर को चेक कराया जा रहा है, ताकि कहीं रिसाव न हो सके। पिछले सात दिन में कट को अच्छी तरीके से बंद कर दिया है और इस पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
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