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Karnal News: किसानों तक पहुंचेंगे 7,000 कृषि वैज्ञानिक, बताएंगे नई तकनीकियां

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। पहली बार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के करीब 7000 वैज्ञानिक किसानों के गांव पहुंचेंगे, उनसे सीधा संवाद करेंगे। किसानों को आधुनिक तकनीकियों, नए अनुसंधानों, प्रौद्योगिकियों से अवगत कराएंगे।
वैज्ञानिक केंद्र सरकार की कृषि, पशुपालन संबंधी विभिन्न योजनाओं की जानकारी तो देंगे ही। साथ ही जलवायु परिवर्तन के इस दौर में कृषि, बागवानी, पशुपालन में आ रही दिक्कतों, चुनौतियों को जानेंगे, जिससे भविष्य में इन्हीं के आधार पर अनुसंधान कार्यो, तकनीक तैयार करने को दिशा दी जाएगी।
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राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के निदेशक एवं कुलपति डॉ. धीर सिंह ने बताया कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर 29 मई से 12 जून, 2025 तक एक देशव्यापी विकसित कृषि संकल्प अभियानका शुभारंभ किया जा रहा है। जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन से प्रेरित है।
इसमें उन्नत कृषि, आधुनिक कृषि तकनीकों और किसानों की समृद्धि की नींव रखना उद्देश्य है। इस अभियान से देश के 1.45 अरब लोगों तक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना, किसानों की आय में वृद्धि करना और भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना भी जुड़ा है। डॉ. सिंह ने बताया कि आईसीएआर के सभी 113 संस्थानों के वैज्ञानिक, 2,170 विशेषज्ञ दल, जिनमें प्रत्येक दल में प्रतिदिन कम से कम तीन वैज्ञानिक होंगे।
सभी 723 जिलों के 65,000 से अधिक गांवों में जाएंगे। विशेषज्ञ दल में कृषि विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, सरकारी विभागों, नवोन्मेषी किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के सदस्य शामिल होंगे। ये अभियान सभी राज्यों में एक साथ चलेगा। हरियाणा में एनडीआरआई को अभियान का नोडल संस्थान बनाया गया है। जिसके अगुवाई में हरियाणा के सभी 22 जिलों के 7400 गांवों में वैज्ञानिकों का दल पहुंचेगा।
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इसके लिए आसपास के 20 से 30 गांवों को मिलाकर कलस्टर बनाए गए हैं, कुल 900 कलस्टर बने हैं। इसके लिए विशेषज्ञों की 30 टीमें बनी हैं, जो हर रोज निकलेंगी और एक टीम कम से कम तीन कलस्टर तक पहुंचेगी। इसमें राज्य सरकार के अधिकारी भी सहयोग करेंगे। वैज्ञानिक अपनी तकनीक किसानों को बताकर उनकी समस्या जानेंगे। समस्याओं के आधार पर अनुसंधानों को प्राथमिकता दी जाएगी।
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