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जिले में वेंटिलेटर पर एंबुलेंस सेवा, कैसे होगा घायलों का इलाज

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वेंटिलेटर पर एंबुलेंस सेवा, कैसे होगा घायलों का इलाज
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-10 एंबुलेंस के भरोसे जिले की 15 लाख की आबादी
- सिसक - सिसक चल रही सरकारी एंबुलेंस, महंगे रेट पर प्राईवेट का लेना पड़ रहा सहारा
फोटो संख्या-4,5
जगदीप मराठा
करनाल। सरकार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लाख दावे जता रही है, लेकिन इन दावों की हकीकत कुछ और ही है। सीएम सिटी की एंबुलेंस सेवा स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। जिले में एंबुलेंस सेवाएं सिसकने के बाद अब दम तोड़ती नजर आ रही हैं। यहां 19 में से 6 एंबुलेंस कंडम हो चुकी हैं, वहीं दो गाड़ी पिछले काफी समय से खराब पड़ी हैं, जबकि एक एंबुलेंस को वीआईपी ड्यूटी के लिए रिजर्व रखा जाता है। इसका खामियाजा हादसों में घायलों और बीमार लोगों को भुगतना पड़ रहा है। यदि बड़ा हादसा हो जाए तो घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए आप भी यदि कहीं कोई बड़ा हादसा देखें तो सिवाय एंबुलेंस का इंतजार करने के खुद ही घायलों की सहायता करने का प्रयास करें।
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15 लाख की में आबादी में है 30 एंबुलेंस की जरूरत
जिले में 15 लाख की आबादी है। यहां लगभग 30 एंबुलेंस की आवश्यकता है। जबकि पूरे जिले का दस एंबुलेंस से ही काम चलाया जा रहा है। इनमें से भी अगर शहर में किसी वीआईपी का आगमन हो जाता है तो एक एंबुलेंस उनके साथ लगाई जाती है। जिले के सात सीएचसी और 19 पीएचसी सेंटरों पर भी एंबुलेंस की जरूरत है, लेकिन इनमें से भी अधिकतर जगह एंबुलेंस नहीं है। कई जगह की एंबुलेंस तो बिल्कुल कंडम हो चुकी है। ऐसे में लोगों को इलाज में देरी का समाना करना पड़ता है। एंबुलेंस रेफर के लिए जिले भर से कंट्रोल रूम में प्रतिदिन 100 से 110 कॉल्स आती हैं। ऐसे में 10 गाड़ियों में रेफर करने और मरीजों का लाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार मरीजों को बाहर से प्राइवेट एंबुलेंस पैसे देकर ले जानी पड़ती है। वहीं मेडिकल कॉलेज में 6 एडवांस लाइफ सर्पोट एंबुलेंस लगाने का दावा किया गया था। जबकि फिलहाल मेडिकल कॉलेज में एक एएलएस गाड़ी है।
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निजी एंबुलेंस संचालक वसूलते हैं डबल किराया
सरकारी एंबुलेंस सेवा के प्रधान सुरेश ने बताया कि सरकारी एंबुलेंस की सुविधा न मिलने के कारण लोगों को प्राइवेट एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है। जोकि मरीजों से डबल किराया वसूलते हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी एंबुलेंस में जच्चा-बच्चा और दुर्घटना में घायल को सरकार की ओर से फ्री सेवा दी जाती है। जबकि बीमार मरीज के लिए सात रुपये किलोमीटर के हिसाब से किराया लिया जाता है। प्राइवेट एंबुलेंस संचालक मरीजों से डबल किराया वसूलते है। प्राइवेट का चंडीगढ़ का किराया 2500 रुपये है।

बॉक्स
क्षमता कैपेसिटी तीन लाख किमी की, चार लाख से ज्यादा चली
एक एंबुलेंस की कैपेसिटी तीन लाख किलोमीटर की होती है। उसके बाद उसे कंडम घोषित कर दिया जाता है। जिले में आठ एंबुलेंस पिछले छह माह पहले आई थी। जबकि 11 एंबुलेंस एंबुलेंस 2009 की आई हुई है और तीन लाख से ज्यादा चल चुकी है। ऐसे में भगवान भरोसे दौड़ रही एंबुलेंस से कोई बढ़ा हादसा भी हो सकता है। इससे मरीजों की जान भी रामभरोसे हैं। वहीं जिले की मौजूदा एंबुलेंस भी कई बार बिना तेल के खड़ी रहती हैं। ड्राइवरों का कहना है कि पेट्रोल पंप का बिल ज्यादा होने के कारण पंप संचालक तेल देने से कई बार मना कर देता है। ऐसे में एंबुलेंस खड़ी रहती है। इस कारण चालकों के साथ साथ मरीजों को भी परेशानी होती है।
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वर्जन
जनसंख्या को देखते हुए 25 एंबुलेंस की जरूरत है। इस समय जिले में 19 एंबुलेंस हैं, जिनमें से छह कंडम है और दो गाड़ी कुछ दिनों से खराब है। विभाग के पास तीन एएलएस गाड़ी और बाकी बीएलएस गाड़ी है। जिनमें से एक एएलएस गाड़ी मेडिकल कॉलेज में, दो विभाग के पास हैं। वहीं 2 बीएलएस किलकारी गर्भवती महिलाओं के लिए और सभी सीएचसी में एक-एक बीएलएस एंबुलेंस मौजूद है।
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- गोपाल फ्लीट मैनेजर 102


विभाग के पास 19 एंबुलेंस हैं। 8 एंबुलेंस कुछ माह पहले नई आई हैं। लोगों को एंबुलेंस की बेहतर सेवाएं दी जा रही हैं। फिर भी अगर लोगों को मरीजों संबंधी कोई समस्या आती है तो उसे जल्दी ही दुरुस्त कर दिया जाएगा। जरूरत के हिसाब से नई एंबुलेंस के लिए डिमांड भेजी जाएगी।
- डॉ. योगेश शर्मा, सीएमओ, करनाल
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