संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले के 33 निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना से दो दिन में 55 ऑपरेशन लटक गए हैं। अन्य मरीज भी लगातार दूसरे दिन तीमारदारों संग जांच व इलाज के लिए एक से दूसरे अस्पताल में भटकते नजर आए। कई निजी अस्पतालों में पैसे देकर इलाज कराने पर मजबूर हुए, वहीं बाकी आयुष्मान से इलाज बंद होने का पता लगने पर घर लौट गए।
बहुत से ऐसे भी हैं, जिन्होंने निजी अस्पतालों में जल्द आयुष्मान से इलाज शुरू होने की आस में ऑपरेशन व इलाज टाल दिया है। जिले में आयुष्मान भारत योजना के आठ लाख एक हजार 730 पात्र हैं। इन्हें पांच लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा देने के लिए जिले में 33 अस्पताल पैनल पर हैं। इनमें हर दिन औसत 23 आयुष्मान पात्रों के ऑपरेशन होते हैं।
वहीं 250 आयुष्मान पात्रों को इलाज मिलता है। इस तरह दो दिन में इन निजी अस्पतालों करीब 45 ऑपरेशन लटक गए, वहीं 300 अन्य मरीजों को तीमारदारों संग परेशान होना पड़ा। गंभीर स्थिति वाले मरीजों का ऑपरेशन व इलाज तीमारदारों को आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद जेब से पैसे भरकर कराना पड़ा। कई ने निजी अस्पताल में आयुष्मान से इलाज न मिलने पर जिला नागरिक अस्पताल व उप जिला नागरिक अस्पताल जगाधरी का भी रुख किया।
तीन मांगों के लिए इलाज बंद : डॉ. डीके सोनी
आईएमए के राज्य सचिव डॉ. डीके सोनी ने बताया कि उनकी मांग है कि समय पर अस्पतालों को बिलों का भुगतान हो। साथ ही बिलों में कटौती व उन्हें रद किया जाना बंद हो। इन मांगों के लिए ही आयुष्मान योजना में इलाज बंद किया गया है। अभी 14 अगस्त तक इलाज बंद रखने का फैसला लिया गया है। अगर सरकार से मांगों पर सहमति नहीं बनती तो यह अवधि बढ़ाने का निर्णय लेंगे।