चावल घोटाले में राइस मिलर्स पर मेहरबानियां : चार साल बाद जागा विभाग, डिफॉल्टर्स पर कराए केस
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। डिफॉल्टर राइस मिलर्स और डीएफएससी विभाग के अधिकारियों के गठजोड़ से 2013 से वर्ष 2015 तक घोटाला होता रहा, लेकिन इतने साल तक किसी भी डिफॉल्टर के खिलाफ विभाग ने कार्रवाई तो दूर की बात है, उनका नाम तक जुबां पर नहीं लाया। जब खुद की नौकरी पर बात आई तो आनन-फानन में विभाग ने चार साल के बाद फरवरी 2018 में डिफॉल्टर्स राइस मिलर्स के खिलाफ धड़ाधड़ एफआईआर करा दी हैं। ऐसे मिलर्स की संख्या 12 है। इनके अलावा, कई राइस मिलर्स को अब भी छोड़ दिया गया है। इनके खिलाफ केस दर्ज नहीं कराया गया है। मिलीभगत के इस खेल में अब उस समय के चार डीएफएससी और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों के खिलाफ जांच की तलवार लटक गई है। मामले की गंभीरता से जांच हुई तो कई अधिकारियों का नपना तय है। इस कदम से राइस मिलर्स और अधिकारियों में हड़कंप है।
बता दें कि कैग की रिपोर्ट पर लोक सेवा समिति ने इस मामले पर कड़ा संज्ञान लिया था। इस मामले में डिफाल्टर राइस मिलर्स और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की थी। इसके बाद से विभाग के अधिकारियों की नींद टूटी और आनन-फानन में डिफॉल्टर्स राइस मिलर्स पर धोखाधड़ी और गबन के केस दर्ज कराए गए। करनाल में अब तक 12 मिलर्स के खिलाफ केस दर्ज कराए गए हैं। ये केस फरवरी, 2018 माह में कराए हैं। इससे पहले चार साल तक विभाग ने चावल और पैसे लेने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए। इसके चलते राइस मिलर्स मनमानी करते रहे। विभाग के ही जानकारों का मानना है कि यदि समय पर विभाग कार्रवाई करता तो जरूर रिकवरी हो सकती है या फिर चावल मिल सकता था।
डिफॉल्टर होते हुए भी नाम बदलकर ली पैडी
डीएफएससी के दस्तावेजों के अनुसार, आशीर्वाद फूड्स विभाग का करीब साढ़े सात करोड़ रुपये का देनदार वर्ष 2013-14 के सीजन में था। उसे डिफॉल्टर घोषित कर दिया गया। विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के चलते उसी राइस मिल का नाम बदलकर अन्नपूर्णा कर दिया गया। अगले साल वर्ष 2014-15 में फिर से विभाग ने उसे पैडी अलॉट कर दी। इस बार भी यह मिल पांच करोड़ रुपये से ज्यादा का चावल डकार गया। इतना ही नहीं डीएफएससी विभाग के इंस्पेक्टर से लेकर ऊपर तक की मिलीभगत के चलते उन आढ़तियों को भी पैडी अलॉट कर दी गई, जिनके पास राइस मिल ही नहीं है। कुंजपुरा और करनाल मंडी के इन दोनों मामलों की अब जांच की जा रही है। साफ है कि विभाग ने सबकुछ जानते हुए भी ये सब चलने दिया।
इन डीएफएससी के समय हुआ घोटाला
रविंद्र मलिक : 2-2-2010 से 6-3-2014
मोनिका मलिक : 6-3-2014 से 21-5-2014
रविंद्र मलिक : 21-5-2014 से 18-9-2014
मोनिका मलिक : 18-9-2014 से 9-4-2015
निशांत राठी : 9-4-2015 से 30-9-2016
अनिल कुमार : 1-10-2016 से मार्च 2018
(इनके साथ ही वे इंस्पेक्टर और अन्य स्टाफ सदस्य इसके जिम्मेदार हैं, जिनकी ड्यूटी लगाई गईं थीं)
कमाई इतनी कि बढ़ते चले गए राइस मिलर्स
वर्ष - राइल मिल (जिनको पैडी अलाट हुई)
2011-12 : 76
2012-13 : 109
2013-14 : 125
2014-15 : 104
2015-16 : 117
वर्जन
वर्ष 2013-14 और अन्य के डिफॉल्टर राइस मिलर्स के खिलाफ केस दर्ज कराए गए हैं। कुछ ऐसे राइस मिलर्स हैं, जिनके खिलाफ केस नहीं बनता। इसके लिए बाकायदा लीगल अपोनियन ली गई है। इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। कुछ राइस मिलर्स ऐसे हैं, जिनके पास चावल हैं। उनसे पहले हम रिकवरी करेंगे। यदि रिकवरी नहीं हुई तो केस दर्ज कराएंगे।
-कुशल बूरा, डीएफएससी, करनाल।