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पात्र अध्यापकों और प्रेरकों ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा, सीएम कैंप आवास का घेराव करने पहुंचे, पुलिस ने रोका, लगा जाम

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पात्र अध्यापकों और शिक्षा प्रेरकों ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
साल 2014 में हुई टीजीटी और पीजीटी भर्ती बीच में रुकने और परिणाम घोषित न होने से परेशान पात्र अध्यापकों और नौकरी बहाली की मांग पर शिक्षा प्रेरकों ने शुक्रवार को सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। पात्र अध्यापकों और शिक्षा प्रेरकों ने अलग-अलग रास्तों से पहुंचकर सीएम कैंप हाउस का घेराव कर सरकार के खिलाफ जमकर नारेेबाजी की। इसी बीच दोनों सड़कों पर बैरिकेट लगाकर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक लिया। पात्र टीजीटी और पीजीटी अध्यापक 19 जनवरी से पहले सीएम मनोहर लाल से बैठक कराने की मांग को लेकर देर शाम तक सड़क पर डेरा डालकर बैठ गए। वहीं मॉडल टाउन की तरफ रास्ते में बैठे शिक्षा प्रेरक शाम को नायब तहसीलदार राजबख्श को ज्ञापन सौंपकर वापस चले गए। पात्र अध्यापकों और शिक्षा प्रेरकों के प्रदर्शन के कारण दोपहर बाद अग्रसेन चौक से आईटीआई चौक की तरफ और सेक्टर 12 से सीएम कैंप हाउस की ओर जाने वाली सड़क पर यातायात पूरी तरह से बाधित रहा। करीब चार घंटे से ज्यादा समय तक शहरवासी जाम से परेशान रहे। नायब तहसीलदार राजबक्श के आश्वासन के बाद शाम करीब छह बजे पात्र अध्यापक सड़क से उठ गए।
टीजीटी-पीजीटी पात्र अध्यापक संगठन के सदस्य राज्य प्रधान जितेंद्र मान के नेतृत्व में कर्ण पार्क में इकट्ठे हुए। इसके बाद अध्यापकों ने अग्रसेन चौक से होते हुए सीएम कैंप हाउस की ओर कूच किया। जहां कैंप हाउस से पहले पुलिस ने बैरिकेट लगाकर अध्यापकों को रोक लिया। अध्यापकों ने सड़क पर ही डेरा डाल लिया। प्रधान जितेंद्र मान ने कहा कि जब तक उन्हें सीएम मनोहर लाल से बैठक कराए जाने का आश्वासन नहीं मिलेगा। तब तक अध्यापक सड़क पर ही बैठे रहेंगे। देर शाम तक अध्यापक सीएम से मिलवाने की मांग को लेकर सड़क पर ही बैठ गए। जबकि मॉडल टाउन की तरफ से कैंप हाउस तका घेराव करने पहुंचे शिक्षा प्रेरकों को भी पुलिस ने बैरिकेट लगाकर रोक लिया। इससे दोपहर बाद दोनों सड़कें पूरी तरह से जाम रही। दोपहर दो बजे से लेकर शाम छह बजे तक लघु सचिवालय रोड और कुंजपुरा रोड पर जाम रहा, इससे वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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सरकार श्वेत पत्र जारी करे कितनों को रोजगार दिया-छीना
पात्र अध्यापकों को समर्थन देने पहुंचे हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ जिला प्रधान अनिल सैनी ने कहा कि सवा तीन साल पहले लोक लुभावने वायदे करके सत्ता में आए मुख्यमंत्री अध्यापकों की बात नहीं सुन रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार श्वेत पत्र जारी करे कि तीन साल में कितने लोगों को रोजगार दिया है और कितने लोगों का रोजगार छीना है। उन्होंने कहा कि आज अध्यापकों के 50 हजार पद खाली पड़े हैं। सरकार को तुरंत इस भर्ती को पूरा करके पात्र अध्यापकों को नौकरी देनी चाहिए।

शहीद के पिता ने रोते हुए सुनाई कर्मचारी, शहीदों और किसानों की व्यथा
वहीं बेटी के समर्थन में पात्र अध्यापकों के धरने में शामिल होने पहुंचे रोहतक जिले के गांव रूड़की निवासी हवा सिंह ने रोते हुए कहा कि ये सरकार किसी की नहीं सुनती। सरकार शहीदों के नाम पर झूठी घोषणा करती है। परिवार को सहायता के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। हवा सिंह ने रोते हुए कहा कि उसका बेटा दिनेश आईटीबीपी में था, जोकि छत्तीसगढ़ में तैनात था। बेटा आठ अक्तूबर 2010 को नक्सली हमले में शहीद हो गया था। उसके बाद सरकार ने गांव के स्कूल का नाम शहीद दिनेश के नाम पर रखने की घोषणा की थी। लेकिन आज तक नहीं बन पाया। बुजुर्ग ने रोते हुए कहा कि शहीद के माता-पिता का फ्री बस पास बनना चाहिए। इसी के साथ सरकारी नौकरी भी परिवार के सदस्य को नौकरी मिलनी चाहिए। इस बाबत जानकारी गृहमंत्री राजनाथ सिंह, कैप्टन अभिमन्यु और ओपी धनखड़ को दी है, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी है। बुजुर्ग ने कहा कि पात्र अध्यापकों को नौकरी तुरंत मिलनी चाहिए। क्योंकि अध्यापक से पढ़कर ही नेता और अफसर बनते हैं।

पुलिस ने वापस भेजी जज की गाड़ी
पात्र अध्यापकों और शिक्षा प्रेरकों को जब पुलिस ने बैरिकेट लगाकर रोका तो दोनों सड़कों पर वाहनों की लंबी लाइन लग गई। अध्यापकों के पहुंचने से पहले एक जज की गाड़ी वहां पहुंची। इस दौरान जज के सुरक्षा कर्मचारी ने गाड़ी से उतरकर बैरिकेट हटाने की बात कही तो पुलिस ने बैरिकेट नहीं हटाए। इसके बाद उन्हें गाड़ी घुमाकर वापस जाना पड़ा। इसी बीच एक महिला भी गाड़ी लेकर कैंप हाउस के गेट के सामने पहुंची। महिला ने गाड़ी से उतरकर पुलिस को मॉडल टाउन की तरफ के बैरिकेट हटाने के मांग की तो पुलिस ने नहीं हटाए। महिला ने कहा कि हर रोज के प्रदर्शनों के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए सरकार को शहर से दूर एक जगह निर्धारित करनी चाहिए।
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डीसी साहब, अध्यापकों की संख्या गिन लो और रजाई का प्रबंध करलो...
प्रदर्शन के दौरान पात्र अध्यापकों ने कहा कि उन्होंने एक समाचार-पत्र में खबर पढ़ी है कि अगर कोई बाहर सड़कों पर सोएगा तो उसके जिम्मेदार डीसी होंगे। उन्होंने कहा कि जब तक अध्यापकों को सीएम से मिलवाने का आश्वासन नहीं मिलेगा वह यहां से नहीं उठेंगे। अध्यापकों ने कहा कि डीसी साहब अध्यापकों की संख्या गिन लो और रजाई का प्रबंध करलो, ताकि सभी अध्यापक सड़क पर रजाई ओढ़कर सो सके।
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