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बंद रहे निजी अस्पताल : इलाज के लिए मेडिकल कालेज पहुंचे मरीज, जवाब मिला हमारे पास डाक्टर नहीं हैं, इसलिए रेफर हो जाओ

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बंद रहे निजी अस्पताल, इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचे मरीज, जवाब मिला- हमारे पास डॉक्टर नहीं, रेफर हो जाओ
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
सरकार द्वारा क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट-2010 को लागू करने के फैसले के विरोध में शुक्रवार को जिलेभर के प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टरों ने क्लीनिक और अस्पतालों की ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं को बंद रखा। डॉक्टरों की हड़ताल से गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को काफी असुविधा हुई। प्राइवेट अस्पताल बंद होने के बाद मेडिकल कॉलेज में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को जवाब मिला कि हमारे पास डॉक्टर नहीं हैं, आप चंडीगढ़ जाइए। जबकि रूटीन के मरीज दवाई लेने के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचे। ओपीडी में आए दिनों के मुकाबले ज्यादा मरीज आए। हालांकि, हड़ताल के दौरान कोई अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज में ओपीडी 3500 के करीब रही, जबकि सर्दी के चलते यह संख्या 1500 के करीब चल रही थी। इसी प्रकार, इमरजेंसी में भी आने वाले मरीजों की संख्या 100 से ज्यादा रही।
करीब 110 अस्पतालों के डॉक्टरों ने सुबह से ही प्राइवेट अस्पतालों के बाहर बंद होने के नोटिस लगा दिए। नोटिस देखकर कुछ मरीज तो वापस लौट गए। लेकिन हार्ट अटैक और सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को मेडिकल कॉलेज का रुख करना पड़ा। मेडिकल कॉलेज में इलाज की सुविधा न होने के कारण ऐसे मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया। वहीं, मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में आए दिनों की बजाए मरीजों की संख्या ज्यादा रही। अमर उजाला ने ऐसे कई मरीजों से बातचीत की, जिन्हें गंभीर बीमारी के चलते मेडिकल कॉलेज से पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया।
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कुछ लोगों को जहां सुविधा न होने से मेडिकल कॉलेज में इलाज नहीं मिल पाया, तो कुछ को जवाब मिला कि हमारे पास डॉक्टर नहीं है, इसलिए आप दिल्ली या चंडीगढ़ जाइए। बता दें कि मेडिकल कॉलेज द्वारा दावा किया गया था कि उन्होंने निजी अस्पताल के डाक्टरों की हड़ताल को देखते हुए छुट्टी पर गए डॉक्टरों को वापस बुलाया गया था।
दुर्घटना में घायल महिला को नहीं मिला डॉक्टर (फोटो-8)
वहीं ऋषि नगर निवासी प्रकाशी देवी मां कृष्णा देवी के साथ किसी काम से सब्जी मंडी जा रही थी। इस दौरान उसे सामने से आ रहे एक बाइक सवार ने टक्कर मार दी। हादसे में कृष्णा देवी को चोट लग गई। आसपास के एरिया में कोई भी डॉक्टर न मिलने के कारण वह मां को रेहड़ी में बैठाकर मेडिकल कॉलेज पहुंची। जहां बुजुर्ग मां को इलाज मिल पाया।

मरीजों की कहानी, उन्हीं की जुबानी

केस नंबर 1 : कर्मचारी नेता को आया अटैक, मेडिकल कॉलेज में नहीं हुई एंजियोग्राफी
सर्व कर्मचारी संघ के जिला सचिव कृष्ण चंद को सुबह छह बजे अटैक आया। जब परिजन उसे एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे तो उन्होंने हड़ताल होने की बात कहकर इलाज करने से मना कर दिया। कृष्ण के समधी रूपचंद ने बताया कि जब यहां इलाज नहीं मिला तो उन्होंने दूसरे निजी अस्पताल में इलाज करवाने के लिए फोन किया। लेकिन वहां से भी उन्हें हड़ताल का हवाला देकर इलाज से मना कर दिया। जब वह मरीज को लेकर मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में पहुंचे तो वहां एंजियोग्राफी की सुविधा नहीं मिली। बाद में परिजन और यूनियन के नेता उसे मोहाली ले गए।

केस नंबर 2 : महिला को आया अटैक, मेडिकल कॉलेज ने कहा हमारे पास नहीं हैं डॉक्टर
सेक्टर-7 निवासी अनिल सोही ने बताया कि उसकी रिश्तेदार सीमा को सुबह बाथरूम में नहाते समय हार्ट अटैक आया था। वह उसे इलाज करवाने के लिए दो निजी अस्पतालों में लेकर पहुंचे। लेकिन वहां साफ कह दिया गया कि आज कोई भी इलाज नहीं किया जाएगा। इसके बाद वह उसे मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। वहां मरीज को प्राथमिक उपचार के बाद कह दिया गया कि मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर नहीं है। परिजनों का आरोप है कि बिल्डिंग तो इतनी बड़ी बना दी। लेकिन डॉक्टरों की हमेशा कमी रहती है और लोगों केेे इलाज नहीं मिल पाता। इसके बाद परिजन मरीज को चंडीगढ़ पीजीआई लेकर चल दिए।

केस नंबर-3 मेडिकल कॉलेज में न्यूरो सर्जन न होने से रेफर
शुगर मिल क्षेत्र निवासी शिवम पिता बिजेंद्र सिंह के साथ जा रहा था। इस दौरान अन्य वाहन से टकराने के कारण शिवम गंभीर रूप से घायल हो गया। शिवम के सिर में ज्यादा चोट लग गई। प्राइवेट अस्पतालों में हड़ताल होने के कारण पिता बिजेंद्र उसे मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में लेकर पहुंचे। लेकिन मेडिकल कॉलेज में न्यूरो सर्जन न होने की वजह से उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। घायल के पिता बिजेंद्र सिंह ने कहा कि अगर हड़ताल न होती तो उसके बेटे का इलाज यहीं हो जाता और उसे चंडीगढ़ नहीं जाना पड़ता।

हड़ताल के कारण मेडिकल कॉलेेज में बढ़ी सीजेरियन डिलीवरी
आईएमए के निर्देश पर हुई एक दिन की सांकेतिक हड़ताल के कारण गर्भवती महिलाओं को ज्यादा परेशानी रही। प्राइवेट अस्पताल बंद होने के कारण गर्भवती महिलाओं ने मेडिकल कॉलेज का रुख किया। हर रोज को देखते हुए लेबर रूम में डिलीवरी की संख्या दोगुनी हो गई है। हर रोज जहां मेडिकल कॉलेज लेबर रूम में 6-7 सीजेरियन डिलीवरी होती थी। वहीं शुक्रवार को यहां करीब 15 महिलाओं की सीजेरियन डिलीवरी हुई है। जबकि मेडिकल कॉलेज के गायनी विभाग में डॉक्टरों की कमी है। हर रोज मेडिकल कॉलेज में 30 से 35 गर्भवती महिलाएं पहुंचती थी। शुक्रवार को संख्या बढ़कर 55 के करीब रही।

सीईए लागू होगा तो तोड़नी पड़ेगी अस्पतालों की बिल्डिंग, महंगा होगा इलाज
सरकार द्वारा क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) 2010 को लागू करने के फैसले के विरोध में आईएमए के निर्देश पर जिलेभर के 110 प्राइवेट अस्पतालों और क्लीनिक के डॉक्टरों ने अस्पताल बंद कर विरोध जताया। आईएमए के जिला प्रधान डॉ. गगन कौशल के नेतृत्व में डीसी डॉ. आदित्य दहिया को एक्ट लागू करने के विरोध में डॉक्टरों ने सीएम और स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान डॉक्टरों ने कहा कि उन्होंने यह एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की है। आईएमए के जिला प्रधान डॉ. गगन कौशल ने कहा कि पिछले काफी वर्षों से लोगों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान कर रहे डॉक्टरों को सीईए नया कानून लागू होने के बाद अस्पतालों की पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर दोबारा बनाना पड़ेगा। जिस कारण अधिकतर छोटे अस्पताल और क्लीनिक तो बंद हो जाएंगे। एक्ट के तहत पुराने स्टाफ को हटाकर नया स्टाफ रखना पड़ेगा। ऐसे में जो लोग वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। वह सड़क पर आ जाएंगे। डॉ. कौशल ने बताया कि एक्ट के लागू होने के बाद इलाज काफी मंहगा हो जाएगा। इसलिए वह इस एक्ट के विरोध में एक दिन की सांकेतिक हड़ताल कर रहे हैं।
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निजी अस्पताल संचालकों की हड़ताल के चलते मेडिकल कालेज में पुख्ता प्रबंध किये गए थे। न्यूरो सर्जन नहीं होने के कारण हैड इंजरी वालों को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया जाता है। हड़ताल के चलते छुट्टी पर गए आठ डाक्टरों को बुलाया गया था। ओपीडी और इमरजेंसी में अन्य दिनों के मुकाबले मरीजों की संख्या ज्यादा रही। जरूरत होने पर ही मरीजों को रेफर किया गया। -डॉ. जगदीश दुरेजा, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, कल्पना चावला मेडिकल कालेज।
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