करनाल। सरकारी स्कूलों में नया शिक्षा सत्र शुरू हुए 20 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक विद्यार्थी किताबों से वंचित हैं। कोरोना के कारण पैदा हुए हालात में इस बार शिक्षा विभाग की ओर से नई पुस्तकें न देकर बल्कि पास हो चुके सीनियर विद्यार्थियों की पुरानी किताबें कक्षा में आए नए विद्यार्थियों को मुहैया कराई जा रही हैं। स्थिति यह है कि पहली से आठवीं कक्षा तक के 50 प्रतिशत बच्चों को अभी तक किताबें नहीं मिली हैं।
अब शिक्षा निदेशालय में 10 दिन का विशेष अभियान चलाकर हर बच्चे तक किताबें पहुंचाने के निर्देश दिए गये हैं। इसके लिए जिले के सभी 778 स्कूलों के शिक्षकों की टीम आज से कार्य में जुटेगी। विभाग की ओर से जारी पत्र के आधार पर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने भी सभी स्कूल मुखिया को इस संदर्भ में हिदायत जारी कर दी है।
विदित हो कि पहली से आठवीं कक्षा तक सरकारी स्कूलों में करीब 80 हजार विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें से 40 हजार के करीब विद्यार्थी किताबों से वंचित हैं जिससे उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। फिलहाल सरकारी स्कूलों में शिक्षक छात्र संख्या बढ़ाने के लिए जोर दे रहे थे। इसके लिए टीमें लगातार हर गांव हर गली दस्तक दे रही हैं। काफी संख्या में स्थिति में सुधार भी आया है, लेकिन अब इन शिक्षकों को पुराने विद्यार्थियों से संपर्क कर उससे किताबें लेनी होंगी और कक्षा में आए नए विद्यार्थी तक किताबें पहुंचानी होंगी।
इससे पहले शिक्षकों को पुस्तकें लेते समय कोरोना सुरक्षा का ध्यान रखना होगा। इसके तहत शिक्षक पुराने बच्चे से किताबें लेने के बाद कम से कम दो दिन तक धूप में या ऐसे स्थान पर रखेंगे, जहां उन्हें कोई छू न सके। इसके बाद ही नए विद्यार्थी को किताबें दी जाएंगी।
10 दिनों में पुस्तक वितरण का कार्य पूरा करना होगा। इसके लिए शिक्षकों को हिदायत जारी कर दी है। प्रत्येक स्कूल द्वारा विद्यार्थियों को किताबें देने के बाद उसकी रिपोर्ट भी गूगल फार्म पर अपलोड करनी होगी। इसके लिए 15 जुलाई अंतिम तिथि है। -रोहताश वर्मा, डीईईओ करनाल।