करनाल के अब तक के इतिहास में पहली बार जिले के पांच शिक्षकों को एक साथ राज्य शिक्षक पुरस्कार मिला है। स्कूल में छात्र संख्या बढ़ाने और विद्यार्थियों के हित मेें चलाई गई सरकार की योजनाओं में बेहतर कार्य करने पर इन शिक्षकों का पुरस्कार के लिए चयन हुआ है। जिन्हें शिक्षक दिवस पर राजभवन में राज्यपाल सम्मानित करेंगे। करीब पांच साल बाद जिले की झोली में इस बार ये पुरस्कार आ रहे हैं। इससे पहले कभी जिले को दो से ज्यादा पुरस्कार एक साथ नहीं मिले। 2019 में हरिसिंहपुरा स्कूल की शिक्षिका को पुरस्कार मिला था, वे भी पानीपत से ट्रांसफर होकर आईं थीं।
2019-20 के लिए हुए आवेदनों मेंपुरस्कार की घोषणा सरकार की ओर से करीब 10 माह बाद वीरवार को की गई है। कोरोना के कारण प्रदेश सरकार ने गत वर्ष पुरस्कारों की घोषणा नहीं की थी। जबकि केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए घोषणा की गई थी, उसमें भी हरियाणा से एक मात्र गुरुग्राम के शिक्षक का चयन हुआ था। शिक्षकों ने बताया कि वे छात्र हित में नई योजनाओं के साथ कार्य करेंगे। जिले का नाम प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर हर गतिविधि में रोशन करना उनका मुख्य उद्देश्य होगा।
सियाराम शास्त्री, टीजीटी संस्कृत, राजकीय माध्यमिक विद्यालय घीसरपुरी
उपलब्धि : 2006 में साथी शिक्षक को यह पुरस्कार मिला था। तभी से इसके लिए प्रयास शुरू किए थे। 2000 में नियमित संस्कृत शिक्षक के रूप में नियुक्ति हुई। कई साल से स्काउट एंड गाइड, कानूनी साक्षरता, सांस्कृतिक गतिविधियां, भाखड़ा बांध मैनेजमेंट बोर्ड और रेडक्रास के जिला समन्वयक हैं। जिले का नाम प्रदेश स्तर पर चमकाया। परीक्षा परिणाम भी अच्छा रहा।
लक्ष्य : ड्राप आउट बच्चों को स्कूल लाने के लिए कार्य करेंगे ताकि बच्चों का भविष्य संवरे और राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार भी करनाल की झोली में ला सकें।
अनिल कुमार, जेबीटी, राजकीय उच्च विद्यालय अर्बन अस्टेट सेक्टर-13, जेबीटी
उपलब्धि : 2000 में नियुक्ति हुई। 2013 से करनाल में कार्यरत हैं। प्राइमरी खेलों में तीन साल तक इनकी टीमें प्रदेश में प्रथम रहीं। सर्व शिक्षा अभियान के टीचर लर्निंग मेटिरियल प्रतियोगिता में भी तीन साल पुरस्कार जीते। 2017 से स्काउट में कब बुलबुल के जिला संगठन आयुक्त हैं। 2018 में कब बुलबुल में बेहतर कार्य के लिए राज्य स्तरीय गवर्नर अवार्ड मिला।
लक्ष्य : कोरोना में जो बच्चे घर पर रहकर तनाव ग्रस्त हुए हैं, उन्हें खेल-खेल में पढ़ाकर आगे बढ़ाएंगे। बच्चों को शिक्षा के साथ खेलों में भी आगे बढ़ाएंगे।
गायित्री देवी, टीजीटी संस्कृत, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल तरावड़ी
उपलब्धि : 1998 में हिसार में नियुक्ति हुई थी। 2005 से तरावड़ी स्कूल में कार्यरत हैं। 2015 तक 10वीं के विद्यार्थियों को पढ़ाने का मौका भी मिला। हर बार परीक्षा परिणाम शानदार रहा। गीता जयंती अैर प्रदेश स्तरीय कानूनी साक्षरता पर आने वाले कार्यक्रम में इनकी टीमों ने पुरस्कार जीते हैं। रमाना रमानी स्कूल के मुख्याध्यापक पति अमन शर्मा, स्कूल के प्रिंसिपल विवेक भैणीवाल, पूर्व प्रिंसिपल संतोष बैरागी और पूर्व डीपीसी ओमपाल बालियान का उपलब्धियों में सहयोग रहा।
लक्ष्य : बच्चे आगे बढ़ें, यही प्रयास है। उन्हें लक्ष्य तक पहुंचाएंगे। इसलिए शिक्षक को राष्ट्र निर्माता का नाम दिया है।
नरेंद्र मान, जेबीटी, राजकीय प्राथमिक स्कूल टपराना
उपलब्धि : 2000 में नियुक्ति हुई थी। खेलों में हर साल जिला टीम लेकर प्रदेश में गए हैं और पुरस्कार भी जीते। 2017 तक करनाल के मॉडल टाउन स्कूल में कार्यरत थे, उस समय सुंदरता में स्कूल प्रथम आया था। 2018 में उसके बाद टपराना स्कूल आ गए, फिर ये स्कूल भी स्वच्छता में प्रथम आया। पुरस्कार बच्चों को समर्पित किया।
लक्ष्य : पुरस्कार के लिए अन्य शिक्षकों को प्रेरित करेंगे ताकि वे भी आगे आएं और शिक्षा सुधार में कार्य करें। जिससे बच्चों को लाभ हो।
डॉ. राधेश्याम, हिंदी टीचर, राजकीय उच्च विद्यालय नगला मेघा
उपलब्धि : ग्राम पंचायत और स्टाफ के साथ मिलकर स्कूल को सुंदर बनाया। पहले स्कूल बदहाल था। बच्चों को लॉकडाउन में भी अतिरिक्त कक्षाएं लेकर पढ़ाया। पीएचडी होने के नाते अब तक तीन किताबें भी लिख चुके हैं। इनमें से दो किताबें लघु कथाएं और एक बच्चों की कहानियों पर आधारित है। अब तक कई रक्तदान शिविर भी आयोजित किए।
लक्ष्य : बच्चों को पूरा समय देंगे। शिक्षा सुधार के लिए कार्य करेंगे। खेल खेल में ज्ञान देने का प्रयास करेंगे।
पांच शिक्षकों में एक नीलोखेड़ी और अन्य चार करनाल खंड से हैं। सभी मौलिक शिक्षा से जुड़े हैं। पांच शिक्षकों के नाम ही हमने पुरस्कार के लिए सरकार को भेजे थे। पांचों का चयन होना जिले के लिए बड़ी उपलब्धि है।
रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी करनाल