करनाल। उच्च एवं निम्न रक्तचाप और मधुमेह अब महज उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी नहीं रह गई है, युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। जिसकी सबसे बड़ी वजह निष्क्रिय जीवनशैली बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले के 46 प्रतिशत लोग उच्च या निम्न रक्तचाप और मधुमेह की चपेट में हैं। इन रोगों की जांच कराने वालों में युवाओं की संख्या अधिक है। चिकित्सकों के अनुसार इन बीमारियों से बचाव के लिए एकमात्र उपाय जीवनशैली में बदलाव लाना है।
सिविल अस्पताल की नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) क्लीनिक में जनवरी 2022 से फरवरी 2023 तक 14 महीनों में 33363 लोगों की मधुमेह व रक्तचाप की जांच की गई। इनमें 30 से अधिक उम्र के लोगों की संख्या 17285 रही जबकि 60 से अधिक उम्र के लोगों की संख्या युवाओं से कम 16078 रही। इनमें से 15346 लोग उच्च या निम्न रक्तचाप या मधुमेह से ग्रस्त मिले। रोगियों का यह आंकड़ा 46 प्रतिशत है। - संवाद
मरीजों के आंकड़ों पर एक नजर
(2022)
माह 30 प्लस 60 प्लस कुल
जनवरी 1074 891 1965
फरवरी 1166 967 2133
मार्च 1301 1222 2523
अप्रैल 1253 1044 2297
मई 867 999 1866
जून 1216 1014 2230
जुलाई 1343 1071 2414
अगस्त 760 1212 1972
सितंबर 1470 1019 2489
अक्तूबर 739 1392 2131
नवंबर 1299 1145 2444
दिसंबर 1715 1649 3364
(2023)
जनवरी 1946 1113 3059
फरवरी 1136 1340 2476
कुल 17285 16078 33363
(एनसीडी क्लीनिक के मुताबिक आंकड़े)
समय पर इलाज नहीं कराया तो बढ़ सकता है खतरा
नॉन कम्युनिकेबल डिसीज अर्थात असंचारी रोग, संक्रामक नहीं होते हैं, लेकिन इन रोगियों को समय पर इलाज नहीं मिले तो मौत भी हो सकती है। उच्च रक्तचाप और मधुमेह हृदय संबंधी बीमारियों के साथ ही अन्य रोगों को बढ़ा देते हैं। जोकि खतरनाक है। ऐसे में जीवनशैली में बदलाव बेहद जरूरी है। शरीर का वजन संतुलित रखने के साथ ही प्रतिदिन 30 मिनट तक व्यायाम बेहद जरूरी है। थोड़े-थोड़े समय पर कम मात्रा में पौष्टिक एवं संतुलित भोजन लिया जाना चाहिए। फाइबर युक्त फल या सब्जी का सेवन करें। तंबाकू व शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। रक्त में शुगर के स्तर की जांच नियमित कराते रहना चाहिए।
- डॉ. कुलबीर सिंह, फिजिशियन
एनसीडी क्लीनिक में मिलता है निशुल्क उपचार
रक्तचाप और मधुमेह की जांच, उपचार और दवाओं के लिए सिविल अस्पताल में एनसीडी क्लीनिक बनाई गई है। जहां मरीजों को निशुल्क इलाज दिया जाता है। एनसीडी क्लीनिक के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग दो कार्यक्रम चला रहा है। पहला एनपीसीडीसीएस (नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ कैंसर, डायबिटीज, कार्डियोवस्कुलर डिसीजेज एंड स्ट्रोक है। जिसके तहत 30 से अधिक उम्र के युवाओं की निशुल्क जांच की जाती है। दूसरा कार्यक्रम एनपीएचसीई (नेशनल प्रोग्राम फॉर दी हेल्थ केयर ऑफ एडरली है। इसके तहत 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को निशुल्क इलाज दिया जाता है। सिविल अस्पताल की एनसीडी क्लीनिक में स्टाफ नर्स मनीषा शर्मा, रितु और कोमलदीप कौर मरीजाें के उपचार में तैनात है।
बीमारी के कारण
पौष्टिक आहार नहीं लेना, फास्ट फूड व बाजार में बने खाने का अधिक सेवन। शारीरिक निष्क्रियता की वजह से भी मोटापा बढ़ता है। जिससे उच्च रक्तचाप व मधुमेह का खतरा बढ़ता है। इसकी वजह से किडनी का फेल होना, हृदय व रक्त वाहिकाओं संबंधी रोग, दिल का दौरा, नसों की क्षति व सुन्न पड़ना, हाथ या पैरों में झनझनाहट होना, पैरों में घाव और संक्रमण होना।
मधुमेह के लक्षण
बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक भूख लगना, बिना किसी कारण वजन गिरना, थकान और कमजोरी महसूस होना, धुंधला दिखाई देना, बार-बार संक्रमण होना, जख्मों का जल्दी न भरना, ऊर्जा की कमी और अत्यधिक थकावट।