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मिसाल : 40 साल पहले जिन अध्यापकों से शिक्षा ग्रहण की, पहले उनको ढूंढा फिर किया सम्मानित, झलके आंसू

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। कैथल जिले के कस्बे पुंडरी के एएस सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 40 साल पहले पढ़े 13 शिष्यों ने एक मिसाल पेश की है, जो शायद ही कोई शिष्य अपने गुरुजनों के लिए कर सके। इन्होंने कर दिखाया कि गुरु को कभी भुलाया नहीं जा सकता। इन शिष्यों में कोई डीएसपी बन गया तो कोई बिजनेसमैन तो कोई एसआई। इन सभी शिष्यों ने दस दिनों में उन गुरुजनों को ढूंढ निकाला, जो 40 साल पहले उन्हें दसवीं कक्षा में पढ़ाते थे। इसके लिए वे पानीपत, कुरूक्षेत्र व पंजाब गए। वहां अपने गुरुजनों से मिले और उन्हें कार्यक्रम निमंत्रण दिया। जो इन 13 शिष्यों ने टीचर डे के उपलक्ष्य में गोल्डन मूमेंट में किया हुआ। कार्यक्रम में पहुंचने पर बुजुर्ग 12 गुरुजनों की खुशी का ठिकाना न रहा। अपने 40 पुराने शिष्य को देखकर उनकी पुरानी यादें ताजा हो गई और खुशी में आंखें नम हो गई। अपने गुरुजनों को आशीर्वाद लेते हुए सभी शिष्यों ने अपने पुरानी बातें दोहराई। इसके बाद सभी शिष्यों ने अपने 12 गुरुजनों को शॉल व स्मृति चिह्न भेज कर उनका सम्मान किया।

40 साल पहले स्कूल के ग्राउंड में एक साथ खेलते थे सभी शिष्य
करनाल में स्टेट विजिलेंस में तैनात एसआई भीम सिंह ने बताया कि डीएसपी बने हिशम सिंह जो पंचकूला में तैनात हैं, रिटायर्ड एसआई धर्मवीर वालिया, एसआई सतपाल, हेड कांस्टेबल सतीश, बड़ागांव के सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल रविंद्र बंसल, आईटीआई के लेक्चरर हर्ष गिरधर, लेक्चरर महेंद्र गोलन, बिजनेसमैन दिलदीप रंजन, प्रवीण मित्तल, सतीश आर्य, बलबीर, राजिंद्र गर्ग ये सभी सन 1978 में पुंडरी के एएस स्कूल में पढ़ते थे। तभी वे दोस्त हैं और स्कूल के ग्राउंड में एक साथ खेलते थे। टीचर डे से कुछ दिन उसे दिलदीप रंजन, राजिंद्र, महेंद्र मिले थे तो उन्होंने दोबारा एक साथ खाना खाने का प्रोग्राम बनाया तो उन्हें याद आया की टीचर डे भी है। फिर उन्होंने सोच लिया की इस बार खाना अपने गुुुरुजनों के साथ ही खाएंगे। तभी उन्होंने अपने गुुरुजनों को ढुंढना शुरू कर दिया।
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दस दिन तक अपने गुरुजनों का पता ढुंढते रहे शिष्य
एसआई भीम सिंह ने बताया कि उनके तीन गुुरुजन उनके गांव पुंडरी के हैं, उनसे उन्होंने बाकि के गुरुजनों का पता लिया। पुंडरी में गुरु तेज सिंह वालिया, पूर्ण चुघ, बलवंत राय गर्ग से मिले, इसके बाद पानीपत में ओपी सेहगल को ढूंढा, वहां से पटियाला में रह रहे बलभ्रर कुमार को ढूंढ़ा तो वहां से कैथल रह हरे बलराज शास्त्री, कुरुक्षेत्र में रह रहे मामचंद शर्मा, करनाल में ही रह रहे बलबीर व जीरकपुर में रह रहे हरि वालिया, रमेश बंसल को ढुंढा और उनका आशीर्वाद लेकर उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित किया।
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70 से 80 की उम्र के गुरुजनों की खुशी का नहीं रहा ठिकाना
कार्यक्रम में पहुंचने पर 70 से 80 की उम्र के गुरुजनों की खुशी का उस समय कोई ठिकाना नहीं रहा, जब उन्होंने अपने 40 साल पुराने शिष्यों को एक साथ देखा, जो डीएसपी तक बन चुके हैं। सभी गुरुजनों ने कहा कि वे इस दिन का इंतजार कर रहे थे।
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