राहत की बारिश बनने लगी मुसीबत, जागा प्रशासन
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। जिले में बुधवार से रूक-रूक कर हो रही बारिश शुक्रवार को भी जारी रही। हालांकि शुक्रवार को तेज बारिश की जगह रिमझिम बारिश ने ले ली। रात करीब एक बजे से शुरू हुई बारिश दोपहर एक बजे तक जारी रहा। 12 घंटे के दौरान शहर में 45.6 एमएम बारिश दर्ज की गई। लगातार हो रही बारिश का अब साइड इफैक्ट भी सामने आने लगा है। बारिश के कारण जहां शहर की कॉलोनियां जलमग्न हैं, वहीं जुंडला में एक घर गिर गया। इसके अलावा यमुना किनारे लगी तरबुज-खरबूज की फसल भी पूरी तरह खराब हो गई है। किसान खेतों में अत्याधिक पानी भरने को नई जीरी के लिए भी नुकसान देय बता रहे हैं। दो दिनों तक रूक-रूक कर हुई तेज बारिश के बाद शुक्रवार को रिमझिम बारिश शुरू हो गई। देर रात से शुरू हुई बारिश दोपहर एक बजे तक जारी रहा। बारिश के कारण प्रशासन के अथाह प्रयास के बाद भी कॉलोनियों से जल निकासी नहीं हो पा रही है। शुक्रवार को भी श्याम नगर, सदर बजार, ब्रह्मनगर, शिव कॉलोनी, सेक्टर-13, 14 जैसी जगहों पर जलभराव हुआ। हालांकि बारिश की रफ्तार कम होने और प्रशासन द्वारा सीवरों की सफाई के कारण जलभराव की समस्या कम हुई। तीन दिनों से जिस तरह बारिश हो रही है, उससे नई जीरी लगाने वाले किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं। किसानों का कहना है कि बारिश के कारण सभी खेत पानी से लबालब भरे हुए हैं, जीरी की पूरी फसल पानी के अंदर जलमग्न है। अगर दो तीन दिन के अंदर खेतों में पानी कम नहीं हुआ तो नई जीरी खेत के अंदर ही गल जाएगी। हालांकि जीरी की जो फसलें चार से पांच दिन पुरानी हैं, उनको इस बारिश से कोई नुकसान नहीं होगा।
आधे मानसून का पानी तीन दिन में बरसा
इस साल जून के अंतिम तीन दिन में हुई बारिश नेेे नया रिकार्ड बना दिया। तीन दिन के अंदर जिले में जितनी बारिश हुई है, वह मानसून के दौरान होने वाली औसतन बारिश के आधी से ज्यादा है। 1 जून से 30 सितंबर तक मानसून सत्र के दौरान जिले में औसतन 462 एमएम बारिश होती है। लेकिन इसबार तीन दिन के अंदर ही करनाल में 238.6 एमएम बारिश हो चुकी है। जबकि अभी प्रदेश में मानसून पहुंचा ही नहीं है। वहीं अगर पूरे जून माह की बात करें तो इस साल 44 साल पहले बना रिकार्ड भी टूटा है। इसके पहले सबसे अधिक बारिश वर्ष 1973 में 195 एमएम दर्ज की गई थी, जबकि इसबार पूरे महीने में 271.6 एमएम बारिश हो चुकी है। वहीं मौसम विभाग के अनुसार अगामी 7 जुलाई तक इसी तरह की बारिश जारी रहेगी। हालांकि अब बारिश की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है।
जलभराव के बाद सक्रिय हुआ प्रशासन
बारिश के कारण जलमग्न हुई कॉलोनियों से पानी निकासी के लिए अब प्रशासन सक्रिय हो गया है। शुक्रवार को नगर निगम व पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी दिनभर कॉलोनियों से पानी निकासी में जुटे रहें। वाटर डिस्पोजल पंप हाउस का निरीक्षण करने पहुंचे नगर निगम आयुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने पम्प हाऊस नम्बर-3 में खामी पाने पर संबंधित ठेकेदार को दण्डित करते हुए उसके एक कर्मचारी को काम से हटा दिया। इस कर्मचारी की कोताही से सेक्टर-13 में पानी जमा हो गया था। इसके अलावा आईटीआई चौक पर जमा पानी को भी निकाल दिया गया। इस दौरान 6 डिस्पोजल पम्प हाऊस चेक किए गए। निगम आयुक्त ने बताया कि निरीक्षण के दौरान नगर निगम की जिम्मेदारी वाले क्षेत्रों में पानी की निकासी करवा दी गई। एक-दो जगह को छोड़कर अब कहीं भी पानी नहीं जमा है। आयुक्त ने कहा कि 7 प्वाईंट ऐसे पाए गए थे, जिन्हे दुरूस्त करने की जरूरत थी। इनमें से मॉडल टाऊन व हांसी रोड़ के प्वाइंट पर काम शुरू कर दिया गया है, शेष को भी ठीक किया जा रहा है। अगले कुछ दिनों में नगर निगम द्वारा यह सभी प्वाईंट दुरूस्त कर दिए जाएंगे। इसके पश्चात आयुक्त ने वार्ड नम्बर-11 स्थित दयाल सिंह कॉलोनी में मास्टिक एस्फाल्ट तकनीक से बनाई गई सड़कों का निरीक्षण किया। जिसमें कमी पाए जाने पर उन्होंने संबंधित ठेकेदार की पेमेंट में से कटौती करने के निर्देशे दिए।
डीसी भी निकले निरीक्षण पर
शहर में जलभराव के बाद शुक्रवार को डीसी मंदीप सिंह बराड़ा भी शहर का निरीक्षण करने निकले। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों में शहर से लगभग डेढ सौ टैंकर पानी निकाला गया है। इन टैंकरों द्वारा पम्पों के माध्यम से पानी भरकर उन नालों में डाला जा रहा है ,जहां पानी की निकासी समुचित है। शहर में सही पानी निकासी की व्यवस्था बनाने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। हमारा पूरा प्रयास है कि कहीं भी पानी जमा न हो, लेकिन लगातार बारिश के चलते जलभराव की निकासी में अगर दिक्कत आती है तो लोग तत्काल इसकी सूचना प्रशासन को दें। ----------------------------------
यमुना में बढ़ा जलस्तर, खराब होने लगी सब्जियां
इंद्री। तीन चार दिन से हो रही बारिश के कारण यमुना का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है। इस समय युमना नदी में करीब 50 हजार क्यूसिक पानी बह रहा है, हालांकि अभी खतरे की कोई बात नहीं, लेकिन तेज बारिश के कारण यमुना किनारे लगी सब्जियां अब खराब होने लगी हैं। इसलिए किसान सब्जियों के बढ़ने से पहले ही उन्हें तोड़कर अपने नुकसान को कम करने की कोशिश में जूट गए हैं। वहीं यमुनानदी के समीप रहकर मधुमक्खी पालन करने वाले किसान भी नदी में बढ़ता जलस्तर देख अपना डेरा उठाना शुरू कर दिया है। किसान साहब सिंह निवासी लबकरी का कहना है कि उसने यमुना नदी के किनारे मधुमक्खी पालन कर रखा था, लेकिन नदी में पानी बढ़ने के कारण उसे मधुमक्खियों के डिब्बों को उठाकर दूसरी जगह ले जाना पड़ रहा है। इसके पहले भी कई किसानों के काफी मधुमक्खी के डिब्बे यमुनानदी में बह चुके हैं। शुक्रवार के दिन इंद्री की एसडीएम मनीष शर्मा ने तहसीलदार नरेश गौत्तम, नायब तहसीलदार व बीडीपीओ राजकुमार के साथ गढपुर घाट व यमुना क्षेत्र का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। एसडीएम ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। यमुनानदी क्षेत्र में कई किसानों ने ईख, करेला, घीया व तोरी आदि की फसल किसानों ने लगा रखी है, जो अब खराब होने लग गई है। एसडीएम मनीषा शर्मा ने बताया कि अभी स्थिति ठीक है अगर कोई खत्तरे वाली बात होगी तो गांवो में सरपंच, पंच व नंबरदारों की टीमें बनाकर स्थिति को संभाला जाएगा। प्रशासन पूरी तरह तैयार है। वहीं, विभाग के एक्सईएन मनीष ने बताया कि यमुनानदी में करीब 50 हजार क्युसीक पानी छोड़ा गया है। स्थिति ठीक है घबराने वाली कोई बात नहीं है।