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कोरोना इफैक्ट : 40 प्रतिशत विद्यार्थियों का पासिंग प्रतिशत और चार प्रतिशत जिले का ओवरआल रिजल्ट घटा

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कोरोना के कारण सीबीएसई के कक्षा 12वीं के 40 प्रतिशत बच्चे के पास होने का प्रतिशत घटा है। वहीं जिले का परीक्षा परिणाम ही वर्ष 2019 के मुकाबले चार प्रतिशत तक गिर गया। गत वर्ष कक्षा 12वीं का परीक्षा परिणाम 94 प्रतिशत था, जबकि इस बार परिणाम 90 प्रतिशत रहा है। परिणाम का यह आंकड़ा 2017 में था। जबकि इसके बाद साल दर सार दो-दो प्रतिशत परीक्षा परिणाम में वृद्धि हुई। इस बार करनाल जिले के विद्यार्थी कोरोना वायरस और लॉकडाउन के कारण छह विषयों की परीक्षा नहीं दे पाए थे। फिलहाल, बोर्ड की ओर से विद्यार्थियों को पुन परीक्षा का भी विकल्प दिया है।
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लॉक डाउन के दौरान रद हुई परीक्षाओं को बोर्ड ने जुलाई में कराने की योजना बनाई थी। जिसकी डेटशीट भी जारी हो चुकी थी। लेकिन सरकार के निर्देश पर परीक्षाओं को बोर्ड ने निरस्त कर दिया। जिसके कारण एक से 13 जुलाई तक होने वाली इन छह विषयों की 2500 विद्यार्थी परीक्षा नहीं दे पाए। इनमें से कई विद्यार्थियों की दो विषय की परीक्षा थी। शिक्षाविद् डॉ. प्रवीण भारद्वाज का कहना है कि हर बच्चे का कोई ना कोई फेवरेट विषय होता है। ऐसे में किसी का फेवरेट विषय जिसकी ज्यादा तैयारी थी, उसकी परीक्षा न होने से असर रिजल्ट पर पड़ा है। वहीं ऐसे विद्यार्थी जिनके लिए ये विषय मुश्किल थे, उनका परीक्षा ना होने से प्रतिशत बढ़ा भी है।
इस वर्ष इतना रहा था सीबीएसई 12वीं का जिले का परीक्षा परिणाम-
वर्ष प्रतिशत
2020 90
2019 94
2018 92
2017 90
इन विषयों नहीं हो पाई परीक्षा
तिथि विषय विद्यार्थी
1 जुलाई होम साइंस 200
2 जुलाई हिंदी 1664
7 जुलाई कंप्यूटर 274
9 जुलाई बिजनेस स्टडी 1956
11 जुलाई ज्योग्राफी 674
13 जुलाई सोशोलॉजी 148
जिन बच्चों को नंबर कम लग रहे हैं, उनके पास परीक्षा का विकल्प है। वे दोबारा परीक्षा देकर अपने नंबरों में सुधार करवा सकते हैं। यहां यह भी विकल्प है कि यदि उनके नंबर परीक्षा में कम आते हैं, तो वे पुराने नंबरों को ही रख सकते हैं। रिवाइज डीएमसी भी बोर्ड की ओर से जारी होगी। -डॉ. राजन लांबा, अध्यक्ष, सहोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स करनाल।
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