लॉकडाउन के दौरान फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए दूसरा घर साबित हुए राधा-स्वामी सत्संग भवन करनाल से जिला प्रशासन द्वारा मजदूरों को इनके गंतव्य स्थान की ओर रवाना किया गया। प्रवासी मजदूरों के चहरे पर घर वापस जाने और अपने से मिलने का उत्साह साफ दिख रहा था। सहारनपुर के हरीश, सोनू और रीना ने बताया कि हरियाणा को कौन छोड़कर जाना चाहता है, यहां पर घर से भी ज्यादा पराये की सेवा होती है, परन्तु मजबूरी में अपने घर तो जाना ही पड़ेगा। उन्होंने जिला प्रशासन व सामाजिक संस्थाओं द्वारा की गई सेवा की सराहना की।
बसों में सवार होने के बाद जहां एक ओर प्रवासी मजदूर सत्संग भवन में उपस्थित अनुयायियों को राधा-स्वामी बोलकर उनकी सेवा के प्रति धन्यवाद कर रहे थे। दूसरी ओर सत्संग भवन के सेवादार भी राधा-स्वामी बोलकर सेवा का मौका देने के लिए अतिथि देवो भव की संस्कृति का निर्वाह कर रहे थे। एसडीएम नरेन्द्र पाल मलिक सहित कईं अधिकारियों ने सत्संग भवन में उपस्थित सभी अनुयायियों का बेहतर व्यवस्था के लिए धन्यवाद किया और प्रवासी मजदूरों का भी व्यवस्था में सहयोग के लिए आभार जताया।
उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को उनके गृह स्थान पर भेजने का सिलसिला जारी है। इससे पहले भी करीब 1 हजार मजदूर पहले उनके गृह स्थानों पर भेजे गए हैं। शनिवार को 12 बसों में 344 मजदूरों को करनाल से सहारनपुर, मथुरा, शामली रूटों पर आने वाले विभिन्न जिलों के प्रवासी मजदूरों को उनके घर रवाना किया गया।
ऐसे किया सेवादारों ने सच्ची सेवा का काम
803 प्रवासी मजदूरों के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित राधा-स्वामी सत्संग भवन करनाल, नीलोखेडी, घरौंडा, इन्द्री, कैथल रोड करनाल तथा सेक्टर 32-33 के सत्संग भवन में व्यवस्था की गई थी। प्रवासी मजदूरों को प्रसाद के रूप में पौष्टिक व संतुलित भोजन उपलब्ध करवाने के लिए लगभग 500 सेवादार दिन-रात सेवा कर रहे थे। सुबह, दोपहर और शाम समय पर भोजन देने के साथ-साथ चाय और बच्चों के लिए दूध उपलब्ध करवा सेवादारों ने मानवता की सच्ची सेवा का काम किया है। यहां तक कि भोजन बनाने में कोरोना वायरस से बचाव के लिए पूरी एहतियात बरती गई और सैनिटाइजेशन का काम भी बराबर किया जाता रहा।