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खेल महाकुंभ के खाने में खेल : जांच करने पहुंचे डिप्टी डायरेक्टर

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। खेल महाकुंभ में खिलाड़ियों को खाना नहीं मिलने के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। शुक्रवार को खेल विभाग के डिप्टी डायरेक्टर राजबीर सिंह कर्ण स्टेडियम पहुंचे। सुबह साढ़े नौ बजे से शाम के पांच बजे तक पूरा दिन यहीं बिताया। डिप्टी डायरेक्टर ने सभी कोच को अलग-अलग बुलाकर उनके बयान कलमबद्ध किए। उन्होंने एक-एक करके कोच से जवाब तलब किए। खेल महाकुंभ की कमेटी में शामिल सभी सदस्यों को भी बुलाया गया। जांच के लिए तत्कालीन डीएसओ अनिल चहल नूंह से करनाल आए। डिप्टी डायरेक्टर ने इसे विभागीय कार्रवाई बताकर जांच के निष्कर्ष के बारे में नहीं बताया। वह अपना पिटारा अब में डायरेक्टर के सामने ही खोलेंगे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राज्य स्तरीय खेल महाकुंभ की व्यवस्था में खामी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए अभी से इंतजाम शुरू कर दें। इसकी व्यवस्था के लिए अब तक किए कार्यों की समीक्षा भी की। अमर उजाला ने इसे मुद्दे को उठाया था।

नूंह से आए तत्कालीन डीएसओ
जिला स्तरीय प्रतियोगिता के समय डीएसओ की कमान अनिल चहल के हाथ थी। मुद्दा गर्माने के बाद दूसरे दिन ही उनका तबादला नूंह कर दिया गया था। डिप्टी डायरेक्टर ने शुक्रवार को उन्हें भी जांच के लिए तलब किया। उनसे काफी देर पूछताछ की गई। महाकुंभ की कमेटी में नोडल अधिकारी सीनियर वालीबॉल कोच सुलतान सिंह थे। इसके अलावा क्लर्क सुमित गौड, कोच नवीन, पुनित, ओंकार सिंह भी शामिल थे। जांच अधिकारी ने ऑफिस की रूटीन में चेकिंग भी की। रिकॉर्ड भी देखा। उन्होंने राज्य स्तरीय खेल महाकुंभ के टेंडर के बारे में भी जाना। यह 23 अक्तूबर से शुरू होना था।
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यह कैसी जांच : खिलाड़ियों को बुलाया ही नहीं
एथलीट श्याम सिंह नरवाल व बड़ौता के ग्रामीणों ने विभाग की जांच पर सवाल उठाए। कहा कि डिप्टी डायरेक्टर को खिलाड़ियों से भी पूछताछ करनी चाहिए थी। आखिर उनके साथ ही विभाग ने ज्यादती की है। लेकिन इस जांच में तो पीड़ितों को बुलाया तक नहीं गया। परिजनों ने आरोप लगाए कि इससे तो यही लग रहा है कि क्लीन चिट का रोडमैप पहले ही तैयार हो चुका है।

चार लाख के बजट के बावजूद नहीं मिला था खाना
11 से 13 अक्तूबर तक आयोजित जिला स्तरीय खेल महाकुंभ में खाने के लिए चार लाख का बजट था। करीब तीन हजार खिलाड़ियों ने इसमें हिस्सा लिया था। प्लेयर्स ने आरोप लगाया था कि तीन दिवसीय प्रतियोगिता में पहले दिन उन्हें खाना नहीं मिला। विभाग ने जानबूझकर पहले दिन व्यवस्था के बारे में किसी को नहीं बताया। दूसरे दिन भी खानापूर्ति कर यूं ही काम चला दिया। जबकि आखिरी दिन शनिवार को खाना परोसा ही नहीं गया। पहले दिन खिलाड़ियों को खाना नहीं मिलने पर दूसरे दिन शुक्रवार को परिजनों ने भी रोष जताया था। आरोप लगाया था कि दो दिन में तीन हजार खिलाड़ियों का भी भोजन नहीं बनाया गया। जैसा खाना था उस पर एक से डेढ़ लाख के बीच में ही लागत आई होगी। जबकि बिल पूरे चार लाख के ही पेशा किए जाएंगे।
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जिला स्तरीय खेल महाकुंभ में खिलाड़ियों को खाना नहीं मिलने की शिकायत मिली थी। एसीएस ने इस पर संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए थे। पूरे स्टाफ के बयान कलमबद्ध कर लिए गए हैं। यह जांच रिपोर्ट डायरेक्टर को सौंपी जाएगी।
-राजबीर सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, खेल विभाग, करनाल।
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