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जब तक सूरज चांद रहेगा नरेंद्र तेरा नाम रहेगा जय कारों से गुंजी शिवपुरी

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। रोहतक कोर्ट परिसर के बाहर पेशी पर लेकर गए युवती की जान बचाने के खातिर अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले एसआई नरेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ वीरवार दोपहर कर करनाल पहुंचा, वहां का माहौल पूरी तरह से शोकाकुल हो उठा। शहीद एसआई नरेंद्र सिंह पुलिस विभाग के कर्मचारी व अधिकारियों सहित सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। राजकीय सम्मान के साथ एसआई नरेंद्र का हांसी रोड स्थित शिवपुरी में अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटे पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी। इस दौरान जब तक सूरज चांद रहेगा नरेंद्र तेरा नाम रहेगा जय कारों से शिवपुरी गुंज उठी। इस दौरान सभी की आंखों में आंसू थे।वहां पर उपस्थित सभी ने परमपिता परमात्मा से इस दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान देने के लिए प्रार्थना की। जिला पुलिस की सलामी गार्द द्वारा शौक सलामी देकर उनके सम्मान में शस्त्र झुकाए और फिर फायर किए।
डीजीपी बीएस संधू ने कहा कि पूरा पुलिस महकमा शहीद हुए एसआई नरेंद्र कुमार के परिजनों के साथ खड़ा है। शहीद नरेंद्र कुमार हमेशा हरियाणा पुलिस के कर्मियों को न केवल प्रेरणा देंगे, बल्कि हमेशा याद रखे जाएंगे। इससे पहले डीजीपी बीएस संधू ने शहीद हुए एसआई नरेंद्र कुमार के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें सैल्यूट करते हुए सलामी दी। इस अवसर पर भाजपा के जिलाध्यक्ष जगमोहन आनंद ने प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर की तरफ से पुलिसकर्मी पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। करनाल के आईजी नवदीप सिंह विर्क तथा करनाल के एसपी सुरेंद्र सिंह भोरिया, नीलोखेड़ी के विधायक भगवानदास कबीरपंथी तथा स्वच्छ भारत मिशन के कार्यकारी उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र ने भी पुष्प अर्पित कर शहीद हुए उपनिरीक्षक नरेंद्र कुमार को अंतिम विदाई के समय श्रद्धांजलि अर्पित की।
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बेटे को सरकारी नौकरी देने की की मांग
शहीद एसआई नरेंद्र के अंतिम संस्कार के बाद लोगों ने डीजीपी से मांग करते हुए कहा कि नरेंद्र के बेटे निशांत को सरकार की ओर से सरकारी नौकरी दिलाई जाए। इस दौरान डीजीपी ने कहा कि इस बारे में वे पुरा प्रयास करेंगे। बता दें एसआई नरेंद्र कई सालों से करनाल ही रह रहे थे और चार सालों से वह एस्कोर्ट गार्द में अपनी सेवाएं दे रहे थे। परिवार में उनकी पति वीना, बड़ी बेटी खुशबु व बेटा निशांत हैं। जो अब अकेले रहे गए हैं। नरेंद्र अपने बेटे व बेटी को बड़ा अफसर बनाना चाहता था।
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