24 घंटे काम, सुनकर ही लगता है कि बड़ा मुश्किल है, लेकिन यह हकीकत है। कल्पना चावला मेडिकल कालेज में स्थापित वीआरडीएल (वायरस रिसर्च एवं डायग्नोस्टिक लैबोरेट्री) का स्टाफ 24 घंटे जागकर सैंपल की रिपोर्ट तैयार कर रहा है। खुद लैब की इंचार्ज डा. प्रेरणा अग्रवाल इस काम में डटी हुई हैं और साथ दे रही है पूरी टीम। इस समय लैब में रोजाना करीब 150 सैंपल आ रहे हैं और कई बार तो संख्या इससे भी ज्यादा हो जाती है। वैसे लैब को 12 घंटे के लिए चालू किया गया था, लेकिन जिस प्रकार से सैंपल आ रहे हैं, उससे अब 24 घंटे काम चल रहा है। स्टाफ और संसाधन कम होने के बावजूद लैब टीम कोरोना के खिलाफ जंग में जुटी हुई है। टीम के सदस्य बताते हैं कि रेस्ट और ड्यूटी तय नहीं है, जिस हिसाब से सैंपल आते हैं, उसी हिसाब से उनकी ड्यूटी होती है। कई बार तो स्टाफ ने 24 घंटे तक भी काम किया है। इसके बावजूद थकान नहीं होती, बल्कि गर्व का अहसास होता है।
विदित हो कि सप्ताह पहले ही मेडिकल कालेज में वीआरडीएल लैब की स्थापना की गई है। एनडीआरआई से आरटी-पीसीआर मशीन उधार में लेकर यहां पर टेस्ट करने की व्यवस्था की गई है। इसी प्रकार, आनन फानन में वैज्ञानिकों और उनके सहायकों की नियुक्ति भी की गई है। पहले करनाल से सैंपल खानपुर मेडिकल कालेज में भेजे जाते थे और रिपोर्ट दो से तीन दिनों में आती थी, लेकिन अब यहां पर टेस्ट शुरू होने के बाद रिपोर्ट आठ से दस घंटे में आ जाती है। मेडिकल कालेज में कैथल, करनाल और कुरुक्षेत्र जिलों के सैंपल टेस्ट किए जा रहे हैं।
कोई टाइम टेबल नहीं, फिर भी हम खुश हैं : डा. प्रेरणा
इस बारे में लैब की इंचार्ज डा. प्रेरणा अग्रवाल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनका कोई टाइम टेबल तय नहीं है। जैसे-जैसे सैंपल आते हैं, वैसे वैसे ही उनकी ड्यूटी तय होती है। लैब की पूरी टीम न केवल एनरजेटिक है, बल्कि बड़ी ही सावधानीपूर्वक सभी अपना काम कर रहे हैं। कई बार तो टीम 24 घंटे तक काम करती है, इसके बावजूद कोई थकान नहीं होती, बल्कि सुकून भरी मुस्कान होती है। डा. प्रेरणा ने कहा कि वे सिर्फ अपना काम कर रहे हैं और ऐसे समय में ये काम करना अपने आप में गर्व की अनुभूति दिलाता है।
जरा से असावधानी पड़ सकती है भारी
लैब में टेस्ट प्रक्रिया एक व्यक्ति से नहीं बल्कि पूरी प्रक्रिया से चलती है। इसमें सैंपल लेने से लेकर सैंपल लगाने और रिपोर्ट आने तक का प्रोसेस है। हर व्यक्ति का कार्य अलग है। सावधानी इतनी कि जरा सी असावधानी भारी पड़ सकती है, इसलिए पूरी बारीकी से जांच की जाती है और फिर रिपोर्ट भेजी जाती है। लैब की टीम में साइंटिस्ट अमित कुमार, तृप्ती रूंगटा, पियूष सुभाष शर्मा और रिसर्च सहायक अनुश्री शामिल हैं।
कल्पना चावला मेडिकल कालेज के निदेशक डा. जगदीश दुरेजा का कहना है कि उन्हें लैब टीम पर नाज है, जिस प्रकार से यह लैब शुरू की गई है, वह अपने आप में संघर्ष की कहानी है। लैब के सदस्य जिस प्रकार से तन्मयता से काम कर रहे हैं वो प्रशंसनीय है। हम सभी उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं, क्योंकि सैंपल एकत्रित करना और फिर जांच करना अपने आप में ही चुनौतीपूर्ण कार्य है, लेकिन ये सब बड़े अच्छे तरीके से टीम कर रही है। वहीं, कालेज के डीएमएस डा. गौरव कांबोज ने भी लैब के सदस्यों की सराहना की है।