छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सली हमले में शहीद हुए राममेहर के परिवार को सांत्वना देने के लिए उनके घर मुख्यमंत्री मनोहर लाल 22 दिन बाद पहुंचे। उन्होंने राममेहर के परिजनों से कहा कि दुख की घड़ी में सरकार और प्रशासन परिवार के साथ है। सीएम ने शहीद के परिवार को आश्वासन दिया कि पढ़ाई पूरी होने के बाद शहीद के बेटे को सरकारी नौकरी दी जाएगी। इस मौके पर शहीद के पिता पूर्ण चंद ने मुख्यमंत्री को बताया कि सरकार की ओर से उन्हें भरपूर सहयोग मिल रहा है।
बता दें कि जिस दिन छत्तीसगढ़ के सुकमा में राममहेर शहीद हुए तो उस समय शहीद के गांव खेड़ीमान सिंह से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक चल रही थी। इसमें मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी मौजूद थे। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि सीएम शोक व्यक्त करने गांव में पहुंचेंगे, लेकिन वे गए। इसके दो दिन बाद भी सीएम करनाल में एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे।
उस दिन भी शहीद के घर नहीं जा सके। 22 दिन बाद सीएम ने शहीद के करनाल स्थित घर पर पहुंचकर सांत्वना दी। शहीद के परिजनों ने मुख्यमंत्री को बताया कि सरकार की ओर से शहादत पर सैनिकों के सम्मान में परिजनों को मिलने वाली सहायता राशि मात्र तीन दिन के अंदर प्राप्त हो गई थी। इस मौके पर मंत्री कर्णदेव काम्बोज ने मुख्यमंत्री को गांव में शहीद की प्रतिमा स्थापित करने, गांव में किसी एक सड़क का नाम शहीद के नाम पर रखने और शहीद राममेहर के नाम पर गांव में स्टेडियम और गेट बनवाने की ग्रामीणों और परिवार की मांग से अवगत करवाया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा।
इस अवसर पर ओएसडी अमरेंद्र सिंह, हैफेड के चेयरमैन हरविंद्र कल्याण, भगवानदास कबीरपंथी, शुगरफेड के चेयरमैन चंद्रप्रकाश कथुरिया, जिलाध्यक्ष जगमोहन आनंद, मेयर रेनू बाला गुप्ता, सीनियर डिप्टी मेयर कृष्ण गर्ग, शहीद का बेटा रोहित, सुभाष चंद्र और जिला प्रशासन की ओर से एसपी जशनदीप सिंह रंधावा, नगर निगम आयुक्त आदित्य दहिया आदि मौजूद रहे।