अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। कई दिन के इंतजार और कड़े मुकाबले के बीच पूर्व मेयर रेणु बाला गुप्ता को भाजपा द्वारा मेयर पद के लिए टिकार्थी घोषित किया गया है। लिबर्टी परिवार समेत नौ दावेदारों पर रेणु बाला गुप्ता का पांच साल का तजुर्बा भारी पड़ा। इसके साथ ही उनके सरल और मिलनसार स्वभाव के साथ साथ पूरे शहर और सभी वर्गों में उनकी पकड़ के चलते भाजपा ने ये फैसला लिया है।
बता दें कि कुछ दिन पहले लिबर्टी के मालिक शम्मी बंसल की पत्नी अंजली बंसल का नाम सामने आया था। हालांकि, भाजपा के नेताओं ने इसका विरोध किया था, इसके साथ ही आरएसएस की तरफ से भी यही बात सामने आई थी टिकट बाहरी नहीं पार्टी से जुडे़ लोगों को मिलनी चाहिए। वहीं, अब मेयर पद को लेकर कांटे का मुकाबला होने के आसार हैं। बता दें कि पहले से ही डिप्टी मेयर मनोज वधवा की पत्नी आशा वधवा आजाद उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं।
गौरतलब है कि मेयर पद के लिए भाजपा में 10 महिलाओं ने अप्लाई किया था। इनमें पूर्व मेयर रेणु बाला गुप्ता, रीतिका गुप्ता, सीनियर डिप्टी मेयर कृष्ण गर्ग की पुत्रवधू मोनिका गर्ग, लिबर्टी के मालिक शम्मी बंसल की पत्नी अंजली बंसल, पूर्व पार्षद सुजाता अरोड़ा, सीमा खन्ना, सोनिया पंडित, संचिता मेहता, दीप्ति सुखिजा, रेखा आनंद ने आवेदन किया था। इसलिए मेयर टिकट के लिए कड़ा मुकाबला था। बीच में ये भी खबर आई कि अंजली बंसल पर भाजपा दांव खेल सकती है, हालांकि, भाजपा के अंदर ही इसका विरोध चल रहा था। किसी भी तरह का रिस्क न लेते हुए भाजपा ने अपने सबसे मजबूत दावेदार पर दांव खेला है। मेयर पद के लिए साक्षात्कार और लिए गए फीडबैक के बाद आखिरकार भाजपा चुनाव समिति ने मेयर पद की टिकट पूर्व मेयर रेणु बाला गुप्ता को थमा दी। बता दें कि अमर उजाला ने रेणु बाला गुप्ता को टिकट मिलने की संभावना 21 नवंबर को ही कर दी थी।
आशा वधवा पहले से ही मैदान में, कांग्रेसी दुबके
बता दें कि पहले से ही डिप्टी मेयर मनोज वधवा की पत्नी आशा वधवा मेयर पद के लिए प्रचार में जुटी हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि मुकाबला दोनों के ही बीच होगा। फिलहाल कांग्रेस पार्टी से ऐसा कोई दावेदार सामने नहीं आया है जो बिना पार्टी के सिंबल के चुनाव लड़ना चाह रहा हो। गौरतलब है कि कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ने करनाल दौरे के दौरान 6 से 7 नेताओं के घर पर जाकर चुनाव को लेकर नब्ज टटोली थी और कुछ नेताओं ने चुनाव लड़ने के लिए ताल भी ठोकी थी, लेकिन कांग्रेस द्वारा सिंबल पर नहीं लड़ने के कारण सभी पीछे हट गए।