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पाकिस्तान में 70 साल से ताले में बंद जैन मूर्तियों की सुध लेगा करनाल का जैन समाज

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पाकिस्तान में 70 साल से ताले में बंद जैन मूर्तियों की सुध लेगा करनाल का जैन समाज
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित राजा बाजार के एक जैन मंदिर में 70 साल से ‘ताले में बंद’ जैन तीर्थकरों की मूर्तियों को वापस भारत लाने को लेकर जैन समाज ने पहल की है। मामले को लेकर सोमवार को जैन समुदाय के लोगों की बैठक हुई, जिसमें फैसला लिया गया कि समाज का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मिलेगा और पाकिस्तान से जैन मंदिर की मूर्तियों को भारत में लाने की मांग करेगा।
दिगंबर जैन समाज करनाल में हुई बैठक में निर्मल कुमार जैन ने बताया कि पाकिस्तान में एक मौलवी मौलाना अशरफ अली इस मंदिर को सुरक्षित रखे हुए है। वह अभी भी इस इंतजार में है कि भारत का जैन समाज इस मंदिर में रखी मूर्तियों को ले जाएगा। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि आज तक जैन मूर्तियां और मंदिर ताले में बंद हैं। यहां पर मदरसा बना हुआ है। उन्होंने इस बात के लिए पाकिस्तान के मौलवी मौलाना अशरफ अली को साधुवाद देते हुए कहा कि वह इन मूर्तियों को सहेज कर रखे हैं।
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इस मौके पर पूर्व अध्यक्ष निर्दोष कुमार जैन ने कहा कि चाहे भले ही समाज के करोड़ों रुपये खर्च हो जाएं, लेकिन जैन समाज की इस धरोहर को भारत में लाने के लिए पूरे प्रयास किए जाएंगे। इन मूर्तियों के लिए विशेष मंदिर भी बनवाया जाएगा। प्रधानमंत्री तथा विदेश मंत्री को इस आशय का एक पत्र भी लिखा गया है। इसमें लिखा गया है कि इन मूर्तियों को लाने के लिए पाकिस्तान उच्चायोग के माध्यम से पत्र व्यवहार किया जाएं। इस मौके पर हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रदेश प्रवक्ता किशोर नागपाल ने बताया कि व्यापार मंडल इस मुहिम का समर्थन करता है और इस मुहिम को आगे ले जाने तक पूरा सहयोग किया जाएगा। बैठक में जयप्रकाश जैन, निर्दोष, दीपक कुमार, वीरेश कुमार, दिनेश कुमार, हरीश गोयल, सुशील कुमार, अजय कुमार, राजकुमार जैन, प्रवीण कुमार जैन आदि मौजूद थे।
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विभाजन के समय मंदिर को बंद कर मौलवी को सौंप दी थी चाबी
जब देश का विभाजन हुआ था तो पाकिस्तान के रावलपिंडी में जैन मंदिर था। इस मंदिर को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी जैन समाज के लोगों ने तत्कालीन मौलवी मौलाना गुलाम उल्ला खान को सौंपी थी और कहा था कि वह इस मंदिर को सहेजकर रखें। मौलाना गुलाम उल्ला खान के वारिस जैन समाज को मंदिर की चाबी लौटाना चाहते हैं। उनका कहना है कि जब बाबरी मस्जिद भारत में टूटी थी तो उस समय भी पाकिस्तान के लोग मंदिर को तोड़ने के लिए आए थे, लेकिन उस समय मूर्तियां सुरक्षित रखी गई।
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