अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। रोडवेज में हड़ताल के दौरान कार्यरत चालक-परिचालकों ने रोजगार की मांग को लेकर बुधवार को तीसरे दिन भी सेक्टर-12 के हुडा ग्राउंड में डेरा जमाये रखा। चालक-परिचालक आज हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच रजाइयां लेकर आमरण अनशन पर बैठे रहे और प्रदेश सरकार को कोसते नजर आये। कल रात से हो रही बरसात से बढ़ी ठंड भी चालक-परिचालकों को हौसले को नहीं डगमगा सकी और वे धरने पर डटे रहे। सुजेश पान्नु के साथ-साथ दिनेश शर्मा, नसीब ढांडा व जयदेव ने भी अन्न व जल त्याग दिया, जिस कारण चारों चालक-परिचालकों की हालत खराब हो गई है, लेकिन ऐसा लगता है कि प्रदेश सरकार कुंभकरणी नींद सोई हुई है।
चालक-परिचालकों के आमरण-अनशन में रेवाड़ी से महिला प्रचारक शर्मिला भी धरना स्थल पर पहुंची और प्रदेश सरकार से जल्द से जल्द बेरोजगार हुए सभी चालक-परिचालकों को रोजगार दिए जाने की गुहार लगाई। चालक-परिचालकों ने रोष जताते हुए कहा कि जब तक सरकार द्वारा उन्हें रोजगार मुहैया नहीं करवाया जाता, तब तक वे आमरण-अनशन पर डटे रहेंगे। सुजेश पान्नु हिसार ने बताया कि इससे पहले उन्होंने रोडवेज की हड़ताल के दौरान सरकार का साथ देकर रोडवेज की बसों का संचालन सही रूप से किया, लेकिन हड़ताल खत्म होते ही सरकार ने उन्हें बिना किसी नोटिस के हटा दिया। अब सभी चालक-परिचालक बेरोजगार हो गए हैं। उन्होंने बताया कि वे जहां काम करते थे, अब उन्हें वहां से भी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। अपनी समस्या को लेकर वे सभी मंत्रियों, विधायकों से अपनी नौकी की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन सरकार के किसी भी जनप्रतिनिधि ने उनकी कोई सुनवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि रोडवेज का ओवर टाईम बंद करने के बाद आज 1500 बसें डिपो में खड़ीं हैं। इससे पहले 1972, 1979 व 1993 में जिन कर्मचारियों न हड़ताल के दौरान कार्य किया था उन कर्मचारियों को सरकार ने पॉलिसी बनाकर तोहफे के तौर पर अपने अधीन (विभाग) में ले लिया था इसलिए उन्होंने सरकार से मांग की है कि नौकरी से हटाए गए सभी चालक-परिचालकों को सरकार पॉलिसी बनाकर विभाग के अंदर समायोजित करे ताकि सभी बसों का सुचारु रुप से संचालन हो व जनता को सुविधा मिले और उन्हें उनका रोजगार वापस मिल सके।