अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। जिला प्रशासन ने रात को रोडवेज कर्मचारियों के कर्ण पार्क के समीप धरना स्थल पर लगे टेंट को उखाड़ दिया। सुबह धरने पर बैठने आए कर्मचारियों को टेंट नहीं मिला, जिससे कर्मचारियों में रोष बढ़ गया और वे काले कपड़े पहनकर सड़क पर उतर गए। रोडवेज कर्मचारियों ने जमकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
वहीं दूसरी ओर दिनभर रोडवेज की 140 बसें चलीं। यात्रियों को यात्रा करने में किसी तरह की परेशानी नहीं हुए। रोडवेज कर्मचारियों ने 4 नवंबर को जींद में रोडवेज बचाओ रोजगार बचाओ रैली की घोषण कर दी है और जिले के सभी रोडवेज कर्मचारी रैली में हिस्सा लेंगे। रोडवेज कर्मचारियों को कहना है किरात को 2 बजे धरना स्थल पर लगा हुआ टेंट जिला प्रशासन उखाड़ कर ले गए जिससे पूरे जिले के तमाम कर्मचारी जिला प्रशासन की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं क्योंकि न्यायालय द्वारा हड़ताली कर्मचारियों को कर्मशाला में अंदर बैठने की इजाजत दी हुई थी जो कि नक्शे के अंदर बिंदु पर अंकित है ऐसा करने से यह आंदोलन और भी तेज होगा जिससे जिला प्रशासन द्वारा न्यायालय के आदेशों की अवहेलना भी हुई है। हरियाणा रोडवेज के तमाम कर्मचारियों की सरकार से अपील है कि समय रहते हमारे तालमेल कमेटी के नेताओं से बात करके इस हड़ताल को खत्म करवाएं क्योंकि प्राइवेट परमिट ना तो जनता की मांग है और ना ही कर्मचारियों की मांग है इन प्राइवेट बसों के आने पर ना तो बच्चों को रोजगार मिलेगा और ना ही जनता को अच्छी परिवहन सुविधा मिलेगी। सरकार इस विभाग को घाटे में दिखा कर इस विभाग को बंद करना चाहती है जबकि सरकार का यह बयान बिल्कुल गलत है क्योंकि इन बसों के अंदर वरिष्ठ नागरिकों को आधे कराएं की सुविधा मिलती है और स्कूल के छात्रों को रियायती दरों पर पास की सुविधा उपलब्ध है छत्तीस कटेगिरी को फ्री सुविधा भी उपलब्ध है लड़कियों को फ्री आने जाने की सुविधा भी उपलब्ध है एमएलए एमपी सरपंच कैंसर पीड़ित इत्यादि रोगियों को भी यह सुविधा फ्री उपलब्ध है परंतु फिर भी सरकार ने अड़ियल रवैया बनाया हुआ है जिसकी वह खुद जिम्मेदार है।