फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीएम की घोषणाओं में लेटलतीफी पर आग बबूला सरकार, पीडब्ल्यूडी व मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों को फटकार

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

करनाल। विकास कार्यों को लेकर सीएम की घोषणाओं में हो रही लेटलतीफी पर अब सरकार आग बबूला हो रही है। मुख्यमंत्री की घोषणाओं की समीक्षा को लेकर गुरुवार को विकास सदन में जिलेभर की पांचों विधानसभाओं में चल रहे कार्यों को लेकर मंथन किया गया। बैठक में सबसे ज्यादा पीडब्ल्यूडी और मार्केटिंग बोर्ड और वन विभाग के अधिकारी निशाने पर रहे। मंत्री ने तो कई अधिकारियों को जमकर फटकार भी लगाई और संबंधित मामलों की दोबारा से रिपोर्ट भी तलब की। खिंचाई के चलते एसी हाल में अधिकारियों के पसीने छूटते नजर आए। अधिकारियों को चेतावनी दी गई कि वे समय पर कार्य पूरा करें, अगर कोई लापरवाही बरतेगा तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विकास सदन में हुई बैठक में इंद्री से मंत्री कर्णदेव कांबोज, असंध से विधायक बख्शीश सिंह, घरौंडा से विधायक और हैफेड के चेयरमैन हरविंद्र कल्याण और सीएम की विधानसभा को लेकर ओएसडी अमरेंद्र सिंह, डीसी डॉ. आदित्य दहिया समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। विकास सदन में राज्यमंत्री कर्णदेव कांबोज ने अधिकारियों की जमकर क्लास ली। खासकर पीडब्ल्यूडी और मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारी उनके निशाने पर रहे। राज्यमंत्री ने पूछा कि सीएम की घोषणाएं समय पर पूरा क्यों नहीं हो रही? करनाल-इंद्री रोड का जिक्र आते ही मंत्री का पारा हाई हो गया। उन्होंने पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन वाईएम मेहरा से पूछा कि एक्सईएन महोदय, आपने इंद्री रोड पर दोनों तरफ खाई खोद दी, क्या आपको यह सब दिखाई नहीं देता? कर्णदेव कांबोज ने कहा कि सड़क के दोनों तरफ खाई खोदने का मतलब क्या है? पहले एक तरफ का काम ही पूरा कर लेते। कम से कम रोजाना हो रहे हादसे तो नहीं होते? कर्णदेव कांबोज एक के बाद एक सवाल दागते रहे, लेकिन एक्सईएन के पास इनका ठोस जवाब नहीं था। वहीं, डीएफओ बिजेंद्र सिंह को पेड़ों को लेकर अनुमति नहीं मिलने पर खिंचाई की। बैठक में अटके प्रोजेक्टों को लेकर ज्यादातर अधिकारियों ने वन विभाग को जिम्मेदार ठहराया। इस पर मंत्री ने डीएफओ को कहा कि वे हर कार्य को गंभीरता से लें और जितना जल्दी हो सके उसे पूरा कराएं।
विज्ञापन


इससे घटिया मेटेरियल नहीं मिला था क्या?
पीडब्ल्यूडी के अलावा मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों की भी मंत्री कांबोज ने जमकर खिंचाई की। कर्णदेव कांबोज ने बैठक में गांव दरड़ से संगोहा जाने वाली सड़क के बारे में पूछा, क्या ये सड़क पूरी हो गई। इस पर अधिकारियों ने जवाब दिया कि सड़क पूरी कर ली गई है। इतना सुनते ही मंत्री का पारा फिर बढ़ गया। मंत्री ने कहा, क्यों झूठ बोल रहे हो, मैं कल वहीं से होकर आया हूं। सड़क अधूरी पड़ी है। मेटेरियल के तो कहने ही क्या हैं? इससे घटिया सामग्री नहीं मिली थी क्या सड़क बनाने के लिए। इस पर न तो एक्सईएन जवाब दे पाए न ही एसई। दोनों अधिकारी पसीना पोंछते नजर आए।

ओएसडी बोली, धीमी गति बर्दास्त नहीं
सीएम की घोषणाओं में देरी के लिए मुख्यमंत्री के ओएसडी अमरेंद्र सिंह ने भी पीडब्ल्यूडी एक्सईएन वाईएम मेहरा को फटकारा। उन्होंने कहा कि काम को लटकाने और क्वालिटी से समझौता बर्दाश्त नहीं होगा। सीएम मनोहर लाल दोनों विभागों की सड़कों की सैंपलिंग की बात पहले ही कह चुके हैं। उन्होंने करनाल से काछवा रोड, करनाल से मूनक रोड पर धीमी गति से चल रहे कार्यों को लेकर हड़काया और चेतावनी दी कि ये कार्य समय पर पूरा करें। इस दौरान ओएसडी ने पीडब्ल्यूडी समेत अन्य विभागों द्वारा बरती जा लापरवाही पर भी खिंचाई की। इसी प्रकार, नगर निगम, पंचायती राज विभाग के अधिकारियों से अटके विकास कार्यों को लेकर रिपोर्ट तलब की।

रौनक कंस्ट्रक्शन कंपनी पर हो सकती है कार्रवाई
करनाल-इंद्री रोड 39 करोड़ से फोरलेन हो रहा है। इसके अलावा छह किलोमीटर लंबे पश्चिमी बाईपास 57 करोड़ से बनाया जा रहा है। यह दोनों काम दिल्ली की रौनक कंस्ट्रक्शन कंपनी कर रही है। दोनों ही प्रोजेक्ट देरी से चल रहे हैं। करनाल-इंद्री रोड पर देरी के लिए पीडब्ल्यूडी दो बार एजेंसी को नोटिस तक दे चुका है, लेकिन हालात नहीं सुधर रहे। सीएम की घोषणाओं में देरी के लिए रौनक कंस्ट्रक्शन कंपनी पर कार्रवाई हो सकती है। जिस हिसाब से काम हो रहा है उससे तो कंपनी के साथ ही अधिकारियों की भी मुश्किलें बढ़ना तय है। इस बारे में पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन वाईएम मेहरा ने कहा कि करनाल-इंद्री रोड का काम स्लो चल रहा है। इसलिए मंत्री जी नाराज थे। उन्होंने कहा है कि पहले एक तरफ का काम पूरा करना चाहिए था। दो बार मैनेजमेंट की मीटिंग हो चुकी है। ठेकेदार को दो नोटिस भी दे चुके हैं।

सीएम की 132 घोषणाओं पर आज तक शुरू नहीं हुआ काम
बता दें कि सीएम ने अब तक जिला करनाल के लिए कुल 1664 करोड़ रुपये की 384 घोषणाएं की हैं। इनमें से इनमें से 94 घोषणाएं मुकम्मल हुई, 149 अंतिम चरण में हैं और 132 पर आज तक काम ही शुरू नहीं हो पाया है। इसके साथ ही 9 ऐसी घोषणाएं हैं, जो नॉट फिजीबल हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2014 में 9 घोषणाएं, 2015 में 70 घोषणाएं, 2016 में 67 घोषणाएं, 2017 में 179 घोषणाएं तथा वर्ष 2018 में अब तक 59 घोषणाएं की गई हैं। इसके साथ ही असंध विधानसभा के लिए 50 घोषणाएं, घरौंडा के लिए 75 घोषणाएं, इंद्री विधानसभा के लिए 75 घोषणाएं, करनाल विधानसभा के लिए 94 घोषणाएं व नीलोखेड़ी विधानसभा के लिए 90 घोषणाएं की गई हैं।
विज्ञापन


सीएम की घोषणाओं को लेकर समीक्षा बैठक हुई थी। बैठक में विकास कार्यों को लेकर चर्चा की गई, साथ ही जो प्रोजेक्ट अटके हुए हैं, उनको गति देने को चर्चा की गई। मार्केटिंग बोर्ड व पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की खिंचाई इसलिए की गई क्योंकि उनकी कमी के कारण सड़क बनाने में देरी हो रही। मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारी ने बैठक में गलत जानकारी दी, उससे रिपोर्ट तलब की गई है। साथ ही करनाल इंद्री रोड को फोरलेन करने को लेकर कहा गया है कि पहले एक साइड से सड़क को पूरा करें, ताकि हादसे न हों। -कर्णदेव कांबोज, मंत्री, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें