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करनाल में 6.56 लाख वोटों से दोबारा खिला कमल

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। करनाल लोकसभा का चुनाव परिणाम कई मायनों में प्रदेश और देश के लिए खास रहा। सीएम मनोहर लाल के गढ़ करनाल में भाजपा प्रत्याशी संजय भाटिया को जनता ने दिल खोलकर वोट दिए। भाटिया को बैलेट पेपर समेत कुल 1300722 वोटों में से 911594 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के कुलदीप शर्मा को 255452 वोटों से संतोष करना पड़ा। कांग्रेस के दिग्गज और पूर्व विधानसभा स्पीकर को भाटिया ने 656142 वोटों से करारी शिकस्त दी। अब तक हरियाणा और देश में ये जीत का सबसे बड़ा अंतर बताया जा रहा है। इतनी बड़ी जीत की भाजपाइयों को भी उम्मीद नहीं थी। हरेक राउंड में बढ़त को देखकर भाजपा नेता खुद हतप्रभ रह गए। रिकार्ड मतों से जीत पर भाजपाई जश्न में डूब गए। सेक्टर 14 स्थित श्रीकृष्णा मंदिर में भाजपा कार्यकर्ता और नेता ढोल की थाप थिरकते नजर आए।
कड़ी सुरक्षा के बीच सुबह आठ बजे एसडी माडल स्कूल के अंदर मतगणना का कार्य शुरू हुआ। स्कूल में पांचों विधानसभा इंद्री, घरौंडा, नीलोखेड़ी, असंध और करवाल की अलग अलग काउंटिंग की गई। पानीपत जिले की चार विधानसभाओं को वोटों को गिनने के बाद एक एक करके 19 राउंड हुए। भाटिया ने पहले राउंड से कांग्रेस के शर्मा पर हजारों वोटों की बढ़त बनाई और अंतिम चरण तक इसकी संख्या बढ़ती गई। जैसे जैसे भाजपा प्रत्याशी की लीड बढ़ती गई, वैसे-वैसे ही स्कूल ग्राउंड से कांग्रेस नेता और वर्कर खिसकते रहे। देर शाम तक जारी किए गए परिणामों में संजय भाटिया को विजयी घोषित किया गया। जैसे ही जीत की घोषणा हुई तो भाजपा कार्यालय में ढोल बज गए। इस दौरान संजय भाटिया भाजपा कार्यालय पहुंचे। यहां पर मेयर रेणु बाला गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष जगमोहन आनंद, पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक सुखिजा, योगेंद्र राणा समेत अन्य नेताओं ने भाटिया का मुंह मीठा कराया और बधाई दी।
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इसलिए एकतरफा जीते भाटिया
संजय भाटिया की इतनी बड़ी जीते के पीछे कई कारण हैं। पहला पीएम नरेंद्र मोदी का नाम और दूसरा सीएम मनोहर लाल की मेहनत। सीएम के गढ़ से चुनावी मैदान में उतरने के कारण लोकसभा क्षेत्र के सभी नौ विधायकों ने उनकी जीत के लिए पसीना बहाया। गांवों में बिना पर्ची और बिना खर्ची के नौरी मिलने कारण गांवों में भाजपा का खूब वोटें मिले। इसके अलावा, भाजपा की पन्ना प्रमुख बनाकर जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के कारण भाटिया को जीत मिली। प्रदेश सरकार द्वारा मेरिट के आधार पर नौकरी देने के कारण भी भाजपा के पक्ष में युवाओं ने खूब माहौल बनाया।
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इन कारणों से बुरी तरह हारे कुलदीप शर्मा
कांग्रेस के कुलदीप शर्मा की गिनती दिग्गज नेताओं में होती है। देरी से मैदान मेें आना और दो बार गन्नौर से विधायक होने के कारण करनाल में कम समय देना भी उनकी हार का कारण बना। ब्राह्मण समाज के होने के बावजूद समाज के लोगों ने उन पर विश्वास नहीं जताया। उनकी हार के पीछे सबसे बड़ा कारण कांग्रेस का संगठन नहीं होना है। गुटबाजी का असर भी यहां देखने को मिला।
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