अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। लघु सचिवालय की दूसरी इमारत में बिजली का फ्यूज उड़ने से बंद हुई लिफ्ट में छह लोग एक घंटा 10 मिनट फंसे रहे। इनके लिए रॉड से दरवाजे में दरार करके हवा का रास्ता नहीं बनाते तो जान भी जा सकती थी। सचिवालय की बिल्डिंग में इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा और न ही उन्हें बाहर निकालने के प्रयास किए गए। लोगों ने ही बिजली घर में जाकर पूरी घटना से अवगत करवाया और फ्यूज लगने के बाद सप्लाई आने पर बाहर फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला गया।
बुधवार को दोपहर 11 बजे लघु सचिवालय की बिल्डिंग नंबर दो की लिफ्ट से ग्राउंड फ्लोर से सात व्यक्ति ऊपर जाने के लिए सवार हुए। जैसी ही लिफ्ट आधा फीट ऊपर गई तो फ्यूज उड़ने से लिफ्ट बंद हो गई। इस दौरान चुनाव कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी रणजीत बाहर आ गए। बाकी छह लोगों ने फिर से दरवाजा बंद करके ऊपर जाने का बटन दबा दिया। इस बार दरवाजा तो बंद हो गया, पर लिफ्ट एक इंच भी ऊपर-नीचे नहीं हो पाई। बाहर निकले रणजीत ने वहां पर लिफ्ट रुकने पर लिफ्ट कर्मचारियों को बुलाया। करीब 20 मिनट बाद आए एक कर्मचारी केवल बाहर वाला ही दरवाजा खोला और अंदर वाला दरवाजा खोलने में खुद को असमर्थ बताया। धीरे-धीरे वहां पर भीड़ जमा हो गई। करीब आधे घंटे बाद वहां पर मौजूद लोगों ने लोहे की रॉड को दरवाजों के बीच फंसा कर अंदर हवा के जाने का रास्ता बनाया। दरवाजे की दरारों से गत्ते को पहुंचाकर हवा करने को कहा और इसी जगह से पीने के लिए पानी की बोतलें पहुंचाई। मौजूद भीड़ ऐसा नहीं करती तो लिफ्ट में बंद लोगों की जान भी निकल सकती थी। दोपहर 12:22 बजे फ्यूज लगने के बाद सप्लाई शुरू होने पर लिफ्ट का दरवाजा खुला और सभी छह लोगों ने बाहर निकलकर रास्ता की सांस ली।
इस मामले में जिसकी कमी पाई जाएगी उस पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी लिफ्टों की मरम्मत करवाई जाएगी, ताकि आगे से ऐसी घटना न हो।
-नवीन आहूजा, सीटीएम करनाल।