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पांच सड़कों को चौड़ा करने को काटे गए 4029 पेड़, नये पौधे दो साल बाद लगाएंगे

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। सीएम सिटी में विकास के नाम पर हजारों पेड़ों की बलि दे दी गई। अभी भी पेड़ों के काटने का सिलसिला जारी है। शहर की पांच सड़कों को चौड़ा करने के लिए सड़क के किनारे 4029 पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी गई है और जो कुछ बाकी है उन्हें भी जल्द ही काट लिया जाएगा।
जिले में घट रही हरियाली का खामियाजा यहां के लोगों को ही भुगतना पड़ेगा। क्योंकि जिस तरह जिले में वाहनों की संख्या बढ़ रही है, जगह-जगह निर्माण कार्य चले हुए हैं, अनेकों उद्योग चले हुए हैं। इन सभी के कारण प्रदूषण लेवल भी बढ़ रहा है। फिलहाल शहर का प्रदूषण लेवल 80 माइक्रोग्राम पर मीटर क्यू तक है। फिलहाल बारिश का मौसम चला हुआ है। आम दिनों में प्रदूषण का लेवल 100 तक पहुंच जाता है, लेकिन जिस तरह पेड़ों की कटाई चली हुई है, यह लेवल बढ़ सकता है। जिस कारण लोगों को जहरीली हवा में सांस लेनी पड़ेगी। हालांकि, वन विभाग का दावा है कि कटे हुए पेड़ों की एवज में 52660 पौधे शेखपुरा व बस्सी के जंगलों में लगाए जाएंगे, लेकिन इन पौधों से कटे हुए पेड़ों की भरपाई करने के लिए सात से आठ वर्ष का समय लगेगा। तब तक तो लाखों की संख्या में पेड़ कट जाएंगे और प्रदूषण लेवल भी पहले से कई गुणा बढ़ जाएगा। पर्यावरण में ऑक्सीजन का स्तर कम होगा। इसका सीधा नुकसान जीव जंतुओं को होगा। करनाल-कुंजपुरा, रमाना-रमानी, एनडीआई से आईटीआई चौक, हांसी चौक से बड़ौता व करनाल से कुंजपुरा की सड़कों की सड़कों को चौड़ा करने का काम जारी है।
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औद्योगिक इकाइयों और वाहनों की संख्या से बढ़ा प्रदूषण
जिले में औद्योगिक इकाइयों और वाहनों की संख्या बढ़ रही है। इससे पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ रहा है। शहर से बड़ी मात्रा में कचरा और वेस्ट पदार्थ नालियों के माध्यम से नदियों में गिर रहा है। प्रत्येक वर्ष पर्यावरण प्रदूषण पर देश में सब पौधे लगाने की शपथ लेते हैं। लेकिन, कुछ देर बाद भूल जाते हैं। वन विभाग हर साल मानसून सीजन में लाखों पौधे लगाने का दावा करता है। इसके बाद भी हरियाली बढ़ने की बजाए कम होती जा रही है।
वहीं वाहनों की संख्या भी हर रोज बढ़ती है। इन वाहनों में बाइक, कार, ट्रक की संख्या सबसे अधिक है।

दो साल तक नहीं हो सकेगा पौधरोपण
डीएफओ विजेंद्र सिंह का कहना है कि वन विभाग के नोटिफाइड एरिया में पेड़ों को काटने व लैंड डायवर्जन के लिए वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की साइट पर ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। फिर वन विभाग एरिया का दौरा कर प्रपोजल भेजेगा। इसके बाद मंत्रालय ऑनलाइन चेक करेगा कि इसकी एवज में जहां पौधे लगाए जाएंगे वह जगह पौधरोपण के लिए उपयुक्त है भी या नहीं। सरकार के फंड में राशि जमा कराएगा।प्रदेश सरकार यह पैसा वन विभाग के संबंधित जिला कार्यालय को भेजेगी तब जाकर पौधरोपण शुरू होगा। इसमें करीब दो साल का समय लगेगा। पहले 10 साल तक लग जाते थे।

एक पेड़ देता है 260 पौंड ऑक्सीजन, व्यक्ति को चाहिए 130 पौंड
पर्यावरणविद डॉ. चंद्रशेखर का कहना है कि एक बड़ापेड़ एक साल में 260 पौंड ऑक्सीजन पैदा करता है। एक व्यक्ति को एक साल में 130 पौंड ऑक्सीजन की जरूरत होती है। यानि एक पेड़ से दो लोगों का काम चल जाता है। 4029 पेड़ कटने का मतलब है कि 8058 लोगों को ऑक्सीजन के लिए दूसरे पेड़ों पर निर्भर होना पड़ेगा। यह तो पर्यावरण के लिए खतरे की घंटी है। पौधरोपण केवल कागजों में होता है। जमीनी स्तर पर होता तो आज यह नौबत नहीं आती।

लगातार घट रहा वन क्षेत्र
वर्ष 2014-15 में जिले में 7700 हेक्टेयर पर वन क्षेत्र था यानि 19250 एकड़ जमीन पर पेड़ थे। पांच सड़कों के दोनों तरफ भी वन विभाग की 64 एकड़ जमीन थी। जो अब पीडब्ल्यूडी को सौंप दी गई है। इसके अलावा कई अन्य सड़कों पर भी काम जारी है। हर साल वन क्षेत्र लगातार घट रहा है।
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जानिए किस सड़क पर कितने पेड़ कटेंगे
सड़क - वन विभाग की जमीन - पेड़ कटेंगे - पौधे लगाने होंगे - पेड़ व जमीन की कीमत
करनाल-कुंजपुरा - 8.22 हेक्टेयर - 1364 - 16940 - 2.46 करोड़
हांसी चौक-बड़ौता - 9.58 हेक्टेयर - 1156 - 19160 - 2.86 करोड़
करनाल-काछवा - 4.86 हेक्टेयर - 1040 - 9730 - 1.53 करोड़
एनडीआरआइ-आईटीआई - 2 हेक्टेयर - 419 - 4690 - 68.44 लाख
रमाना-रमानी रोड - 1.07 हेक्टेयर - 50 - 2140 - 30.34 लाख
कुल - 15.73 हेक्टेयर - 4029 -52660 - 7.83 करोड़

आगे सड़क चौड़ी करने के लिए जमीन नहीं बची
डीएफओ विजेंद्र सिंह का कहना है कि पीडब्ल्यूडी सड़कों को चौड़ा करने के लिए वन विभाग से जमीन एक्वायर कर रहा है। इन पांच सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने के लिए वन विभाग की 25.53 हेक्टेयर यानि 64 एकड़ जमीन का मालिक पीडब्ल्यूडी बन जाएगा। पहले पीडब्ल्यूडी इसके बदले में किसानों से जमीन लेकर वन विभाग को सौंप देता था। लेकिन इस बार पेड़ों के साथ जमीन की भी कीमत चुकाई गई है। इन सड़कों के आस-पास पौधे लगाने के लिए जमीन बची ही नहीं। भविष्य में यदि यातायात बढ़ने पर सड़क चौड़ी करनी पड़ी तो भूमि अधिग्रहण के अलावा कोई चारा नहीं होगा।
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